टर्बिडिटी यूनिट: NTU vs FNU, कैलिब्रेशन और 4-20 mA स्केलिंग

मान लीजिए जापान से एक वॉटर ट्रीटमेंट स्किड आया है। उसके ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर की डेटाशीट में लिखा है "0–20 度 (do) (formazin), 4–20 mA" और अलार्म "5 度" पर सेट है।
आपके प्लांट की रिपोर्ट NTU में बनती है और लैब का मीटर FNU में पढ़ता है। सबसे पहला सवाल यही आता है कि जापान का एक "डिग्री" कितने NTU के बराबर है, और अलार्म की वैल्यू अब भी ठीक है या नहीं।
छोटा जवाब: कोई एक कन्वर्ज़न फ़ैक्टर नहीं है। टर्बिडिटी की रीडिंग दो बातों पर टिकी होती है: कैलिब्रेशन में कौन-सा स्टैंडर्ड लिया गया (kaolin, formazin या polymer beads), और मीटर की optics कैसी है (रोशनी की wavelength और डिटेक्टर का कोण)। दो रीडिंग तभी मिलाई जा सकती हैं जब ये दोनों बातें एक जैसी हों।
यूनिट सही पढ़ने के साथ-साथ यह भी देखना पड़ता है कि कैलिब्रेशन ठीक है और मीटर से कंट्रोल सिस्टम तक 4–20 mA की स्केलिंग मेल खाती है।
इस गाइड में ये बातें हैं: जापानी टर्बिडिटी यूनिट, NTU और FNU (EPA 180.1 बनाम ISO 7027), टर्बिडिटी और TSS का फ़र्क़, नापने के मुख्य तरीक़े, कैलिब्रेशन, 4–20 mA स्केलिंग और गड़बड़ी की जाँच। अंत में चेकलिस्ट, जापानी सप्लायर से पूछने के सवाल और ईमेल का नमूना है।
विषय-सूची
- टर्बिडिटी क्या नापती है (और क्या नहीं)
- टर्बिडिटी की यूनिट: जापानी "डिग्री" (度, do), NTU, FNU और FAU
- टर्बिडिटी और TSS (suspended solids) में फ़र्क़
- टर्बिडिटी कैसे नापी जाती है: मुख्य तरीक़े
- नापने का तरीक़ा कैसे चुनें
- ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर की सैंपल लाइन का डिज़ाइन
- टर्बिडिटी मीटर का कैलिब्रेशन: formazin, StablCal और दूसरे स्टैंडर्ड
- 4–20 mA स्केलिंग और अलार्म का डिज़ाइन
- लक्षण से टर्बिडिटी रीडिंग की गड़बड़ी ढूँढना
- चेकलिस्ट: जापानी टर्बिडिटी मीटर का स्पेक जाँचना
- जापानी सप्लायर से पूछने के सवाल
- इस गाइड की सीमाएँ
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- सोर्स
टर्बिडिटी क्या नापती है (और क्या नहीं)
टर्बिडिटी (turbidity) यानी पानी का गदलापन। यह बताती है कि पानी का सैंपल रोशनी को कितना बिखेरता या कमज़ोर करता है। मिट्टी, बारीक ठोस कण और सूक्ष्म जीव पानी में रोशनी का रास्ता बदल देते हैं, और टर्बिडिटी मीटर इसी बदलाव को एक रेफ़रेंस सस्पेंशन से मिलाकर नापता है।
यह कणों की गिनती नहीं है, और पानी में कुल ठोस का वज़न भी नहीं है। कण का साइज़, आकार और रंग, सब रोशनी पर असर डालते हैं।
बारीक सफ़ेद कणों वाला पानी और बड़े काले कणों वाला पानी, दोनों में ठोस का वज़न बराबर हो सकता है, फिर भी बिखरी रोशनी की रीडिंग अलग आएगी। यानी टर्बिडिटी बराबर होने का मतलब यह नहीं कि पानी में चीज़ें भी बराबर हैं।
टर्बिडिटी, कंडक्टिविटी (पानी में घुले आयन) और pH (अम्ल या क्षार का स्तर) तीनों अलग चीज़ें हैं। साफ़ दिखने वाले पानी में भी बहुत आयन हो सकते हैं। इसलिए ट्रीटमेंट प्लांट में जो हटाना और कंट्रोल करना है, उसके हिसाब से कई पैरामीटर साथ देखे जाते हैं।
टर्बिडिटी की यूनिट: जापानी "डिग्री" (度, do), NTU, FNU और FAU
जापानी स्पेसिफ़िकेशन में टर्बिडिटी अक्सर 度 (do, "डिग्री") में लिखी होती है। सिर्फ़ संख्या काफ़ी नहीं है। यह भी जानना पड़ता है कि वह डिग्री किस स्टैंडर्ड से तय हुई। Kaolin, formazin और polystyrene जैसे कण, तीनों का रेफ़रेंस अलग है।
- डिग्री (kaolin): 1 डिग्री वह टर्बिडिटी है जो 1 लीटर शुद्ध पानी में 1 mg स्टैंडर्ड kaolin डालने पर आती है। यह 1 mg/L स्टैंडर्ड पदार्थ से मिलान की बात है। आपके सैंपल में कणों का असली वज़न-प्रति-लीटर यह नहीं है।
- डिग्री (formazin): formazin एक पॉलीमर सस्पेंशन है, जिससे टर्बिडिटी मीटर कैलिब्रेट किए जाते हैं। यहाँ भी स्टैंडर्ड से तुलना ही होती है। एक ही सैंपल पर kaolin डिग्री और formazin डिग्री की वैल्यू अलग आती है, और दोनों का अनुपात हर बार एक-सा नहीं रहता।
- डिग्री (polystyrene): polystyrene जैसे कण जापान की सरकारी नल-जल जाँच में इस्तेमाल होते हैं। वहाँ पर्यावरण मंत्री की तय की हुई विधि में अलग-अलग साइज़ के स्टैंडर्ड कण मिलाए जाते हैं।
चित्र 1 में वे यूनिट हैं जो जापानी और अंतरराष्ट्रीय मीटरों पर दिख सकती हैं। हर यूनिट को उसके स्टैंडर्ड और optics के साथ पढ़ें।
चित्र 1: हर टर्बिडिटी यूनिट को उसके स्टैंडर्ड और optics के साथ पढ़ें
एक ही स्टैंडर्ड से कैलिब्रेट करने का मतलब यह नहीं कि असली सैंपल पर जवाब भी एक-सा आएगा।
| यूनिट | स्टैंडर्ड और optics | तुलना से पहले क्या जाँचें |
|---|---|---|
| डिग्री (kaolin) | kaolin स्टैंडर्ड से तुलना | सैंपल में कणों के असली वज़न-प्रति-लीटर के बराबर नहीं है |
| डिग्री (formazin), FTU | formazin स्टैंडर्ड; optics का ढाँचा भी स्पेक में लिखें | सिर्फ़ स्टैंडर्ड नहीं, पहचानने का तरीक़ा भी मिलाएँ |
| डिग्री (polystyrene) | polystyrene जैसे स्टैंडर्ड कणों से तुलना | जापान की सरकारी नल-जल जाँच में इस्तेमाल; बताई गई विधि के हिसाब से चलती है |
| NTU | आम तौर पर सफ़ेद रोशनी, 90° स्कैटर | विधि (जैसे EPA 180.1) और मीटर के स्पेक देखें |
| FNU | near-infrared रोशनी, 90° स्कैटर | ISO 7027 की माप-शर्तों से मेल खाती है |
| FAU | near-infrared रोशनी, attenuation (डिटेक्टर किरण की सीध में) | ज़्यादा टर्बिडिटी के लिए; FNU से बदली नहीं जा सकती |
कुछ मीटरों पर पुरानी यूनिट का नाम ही छपा रहता है। इसलिए सिर्फ़ डिस्प्ले की यूनिट देखकर optics का अंदाज़ा न लगाएँ।
NTU vs FNU: EPA 180.1 और ISO 7027
NTU (nephelometric turbidity unit) सफ़ेद रोशनी वाले nephelometer की यूनिट है, जिसका आम रेफ़रेंस अमेरिकी EPA Method 180.1 है। FNU (formazin nephelometric unit) near-infrared मीटरों की यूनिट है, जो ISO 7027-1 पर बने हैं। दोनों 90° पर बिखरी रोशनी नापते हैं और formazin से कैलिब्रेट होते हैं। मुख्य फ़र्क़ रोशनी के सोर्स का है।
नीचे की टेबल में optics की शर्तें एक जगह रखी हैं। वैल्यू लेख के अंत में दिए सोर्स से ली गई हैं। डिज़ाइन या कम्प्लायंस के काम में हर स्टैंडर्ड का ताज़ा टेक्स्ट देखें।
| EPA 180.1 (NTU) | ISO 7027-1 (FNU / FAU) | |
|---|---|---|
| रोशनी का सोर्स | टंगस्टन लैंप, colour temperature 2200–3000 K (सफ़ेद रोशनी) | Near-infrared, 860 nm, bandwidth 60 nm या कम (secondary सोर्स से) |
| डिटेक्टर | किरण से 90° (±30°), spectral peak 400–600 nm; कुल light path 10 cm या कम | FNU के लिए 90° (±2.5°); FAU के लिए किरण की सीध में (attenuation) |
| रेंज | 0–40 NTU; ज़्यादा वैल्यू के लिए dilution | Nephelometry में आम तौर पर 0.05 से कम से लेकर 400 FNU; attenuation में आम तौर पर 40–4,000 FAU |
| सैंपल का रंग | सैंपल के रंग का असर ज़्यादा | रंग का असर कम, क्योंकि घुला रंग near-infrared में कम सोखता है |
| कहाँ आम है | उत्तरी अमेरिका में पीने का पानी और वेस्टवॉटर | यूरोप और एशिया-पैसिफ़िक |
ISO 7027-1 के हिसाब से एक ही scattered-light विधि के अंदर NTU और FNU संख्या में बराबर माने जाते हैं। लेकिन यह अलग optics वाले दो मीटरों की रीडिंग आपस में बदलने जैसी बात नहीं है। प्राकृतिक पानी में कण का साइज़, आकार और रंग रीडिंग बदल देते हैं, इसलिए एक ही सैंपल पर सफ़ेद रोशनी वाला मीटर और infrared मीटर अक्सर अलग-अलग पढ़ते हैं।
इसी वजह से USGS और ASTM D7315 सलाह देते हैं कि हर टेक्नोलॉजी की रीडिंग उसकी अपनी यूनिट में लिखी जाए (NTU, FNU, FNRU, FAU, FBU वग़ैरह)। पर पुराने मीटर optics चाहे जो हों, "NTU" ही दिखाते थे। इन दो हालात को अलग-अलग देखें:
- वही मीटर, नया लेबल: डिस्प्ले NTU से FNU कर दिया गया, पर optics नहीं बदली।
- दूसरा मीटर: नए मीटर में रोशनी का सोर्स या डिटेक्टर का कोण अलग है, तो कैलिब्रेशन के बाद भी असली सैंपल पर रीडिंग खिसक सकती है।
जापानी डिग्री को NTU में कैसे बदलें
"एक डिग्री कितने NTU" का कोई एक सामान्य फ़ैक्टर नहीं है। formazin वाली डिग्री भी NTU से तभी मेल खाती है जब optics भी मिलती हो। kaolin डिग्री या transmitted-light रीडिंग तो अलग ही माप है। आप ये कर सकते हैं:
- पता करें कि जापानी वैल्यू किस स्टैंडर्ड पर है (kaolin, formazin या polystyrene)।
- पता करें कि मीटर की optics क्या है (transmitted, 90° scatter, ratio, integrating sphere या surface scatter) और रोशनी का सोर्स कौन-सा है।
- अगर पुराना और नया मीटर अलग हैं, तो कुछ समय दोनों को एक ही सैंपल पर चलाकर रीडिंग मिलाएँ।
जापान में पीने के पानी की सीमा: 2 डिग्री, और भारत में IS 10500
जापान में नल के पानी का टर्बिडिटी स्टैंडर्ड 2 डिग्री या उससे कम है। इससे अलग एक "water quality management target" है, जो 1 डिग्री या उससे कम रखता है। ये दोनों अलग श्रेणियाँ हैं, इन्हें आपस में न मिलाएँ।
भारत में पीने के पानी के लिए IS 10500:2012 है। इसमें टर्बिडिटी की acceptable limit 1 NTU है, और जब कोई दूसरा बेहतर सोर्स न हो तब permissible limit 5 NTU है। जापानी "2 डिग्री" और भारतीय "1 / 5 NTU" को सीधे बराबर न मानें, क्योंकि यूनिट, मापने की विधि और नियम की श्रेणी अलग हैं।
सिर्फ़ टर्बिडिटी की सीमा पूरी हो जाने से पानी पीने लायक नहीं हो जाता। पीने के पानी के स्टैंडर्ड में सूक्ष्म जीव, केमिकल और बाक़ी पैरामीटर भी आते हैं।
ये सीमाएँ प्लांट के वेस्टवॉटर या प्रोसेस के पानी पर भी सीधे लागू नहीं होतीं। पीने के पानी की क़ानूनी जाँच, प्रोसेस की कंट्रोल वैल्यू और वेस्टवॉटर का डिस्चार्ज परमिट, तीनों का दायरा और तय विधि अपनी-अपनी है।
टर्बिडिटी और TSS (suspended solids) में फ़र्क़
TSS (total suspended solids, जापान में इसे SS कहते हैं) सैंपल के प्रति आयतन में तैरते पदार्थ का वज़न है। तय विधि से सैंपल को फ़िल्टर किया जाता है, फिर बचे हुए पदार्थ को सुखाकर तौला जाता है। टर्बिडिटी रोशनी से नापी जाने वाली रीडिंग है, इसलिए दोनों को अलग रखें।
कुछ टर्बिडिटी मीटर SS को mg/L में भी दिखाते हैं, पर वे कुछ सुखाते या तौलते नहीं। वे असली सैंपलों से निकले एक रिश्ते (correlation) से टर्बिडिटी को SS में बदलते हैं।
एक काल्पनिक उदाहरण लें। टर्बिडिटी x (डिग्री) और SS y (mg/L) है, और असली सैंपलों से y = 2 + 1.5x मिला। उसी तरह के सैंपल और उसी रेंज में 20 डिग्री की रीडिंग पर अनुमानित SS 32 mg/L होगा।
2 और 1.5 सिर्फ़ समझाने के लिए बनाई गई संख्याएँ हैं। नदी के मटमैले पानी पर बना correlation अगर तेल या पिगमेंट वाले प्रोसेस के पानी पर लगाया जाए, तो कणों का फ़र्क़ कन्वर्ज़न की गलती बनकर सामने आता है।
correlation बनाते समय एक ही सैंपल पर टर्बिडिटी और SS जोड़े में नापें, और पूरी कंट्रोल रेंज में नापें। रेंज के दोनों सिरे और गड़बड़ी वाले हालात भी देखें, सिर्फ़ वह हिस्सा नहीं जो सीधी रेखा जैसा दिखता है। केमिकल या कच्चा माल बदलने पर रीडिंग का मतलब बदल सकता है, इसलिए समीकरण के साथ प्रोसेस और मान्य रेंज भी लिखकर रखें।
टर्बिडिटी कैसे नापी जाती है: मुख्य तरीक़े
टर्बिडिटी नापने के तरीक़े आम तौर पर चार हिस्सों में बाँटे जाते हैं: visual, transmitted light, scattered light और integrating sphere। सब सैंपल की तुलना एक रेफ़रेंस टर्बिडिटी से करते हैं, पर रोशनी के अलग हिस्से को और अलग दिशा से इकट्ठा करते हैं।
Visual टर्बिडिटी में सैंपल और स्टैंडर्ड को एक जैसी comparison ट्यूब में रखकर देखा जाता है। रोशनी, बैकग्राउंड और देखने की दिशा तय रखनी पड़ती है। बोतल को लाइट के सामने उठाकर देख लेना यह तरीक़ा नहीं है।
जापान में JIS K 0101 (industrial water) और JIS K 0102 (industrial wastewater) अब JIS K 0102 सीरीज़ में मिला दिए गए हैं। टर्बिडिटी समेत आम physical-chemical टेस्ट JIS K 0102-1:2021 और उसके Amendment 1:2023 में हैं। Automatic टर्बिडिटी मीटर का अपना स्टैंडर्ड JIS K 0801 है। उसका ताज़ा एडिशन और शर्तें सप्लायर या Japanese Standards Association से पक्का करें।
जापान की नल-जल जाँच पर्यावरण मंत्री की तय की हुई विधि से होती है। भारत में टर्बिडिटी की जाँच के लिए nephelometric विधि वाला IS 3025 (Part 10) है, जो पानी और वेस्टवॉटर के सैंपलिंग और टेस्ट के सेट का हिस्सा है। यह पुराना स्टैंडर्ड है (1984 का), इसलिए ताज़ा स्टेटस BIS से देख लें। नापने का सिद्धांत जानना एक बात है, और किसी तय जाँच-विधि पर खरा उतरना दूसरी। टेस्ट का मक़सद तय करे कि कौन-सी विधि लगेगी।
किसी भी optical मीटर में रोशनी के सोर्स, सैंपल और डिटेक्टर की आपसी जगह ही रीडिंग तय करती है।
Transmitted light (आर-पार जाने वाली रोशनी)
Transmitted-light मीटर सैंपल के आर-पार रोशनी भेजता है और देखता है कि दूसरी तरफ़ के डिटेक्टर तक कितनी पहुँची। कण रोशनी को सीधे रास्ते से बिखेर देते हैं, इसलिए टर्बिडिटी बढ़ने पर डिटेक्टर तक कम रोशनी पहुँचती है।
ये मीटर मध्यम से ज़्यादा टर्बिडिटी में इस्तेमाल होते हैं, पर कितनी रेंज चलेगी यह path length और डिटेक्टर पर टिका है। चूँकि यह रोशनी का घटना देखता है, इसलिए कणों के अलावा दूसरी चीज़ों का सोखना और ऑप्टिकल विंडो पर जमी गंदगी भी रीडिंग पर असर डालती है।
चित्र 2: Transmitted light दूसरी तरफ़ पहुँचने वाली रोशनी का घटना नापता है
सैंपल के रंग या विंडो की गंदगी से जो रोशनी घटती है, वह कणों से हुई कमी में जुड़ जाती है।
लगभग साफ़ पानी में कणों से आर-पार रोशनी बहुत थोड़ी बदलती है। बैकग्राउंड रोशनी और सेल-सेल के फ़र्क़ के आगे यह छोटा सिग्नल दब जाता है। इसलिए इस तरीक़े से कम टर्बिडिटी नापना मुश्किल है।
दूसरे छोर पर, पानी इतना गँदला हो कि लगभग कोई रोशनी पार न हो, तो पढ़ने लायक बदलाव भी कम बचता है। "ज़्यादा टर्बिडिटी के लिए ठीक" का मतलब "कोई सीमा नहीं" नहीं है। मीटर की असरदार रेंज देख लें।
- रंग: रंगीन पानी में कण कम हों, तब भी रंग रोशनी सोखकर आर-पार की रोशनी घटा सकता है। असली सैंपलों पर मीटर का जवाब मिलाकर देखें, ताकि रंग का बदलाव टर्बिडिटी का बदलाव न समझ लिया जाए।
- सेल की हालत: उँगलियों के निशान, पानी की बूँदें और बारीक खरोंच रीडिंग खिसका देती हैं। सैंपल पर शक करने से पहले साफ़ सेल में, उसी दिशा और उन्हीं शर्तों पर दोबारा नापें।
- केमिकल एनालिसिस नहीं: colorimetric analyzer (जैसे silica analyzer) भी आर-पार रोशनी नापते हैं, पर वे केमिकल रिएक्शन से बने रंग को पढ़कर किसी ख़ास तत्व की मात्रा निकालते हैं।
Scattered light (बिखरी हुई रोशनी)
Scattered-light मीटर उस रोशनी को नापता है जिसे कणों ने मोड़ दिया है, और इसके लिए एक तय कोण पर डिटेक्टर लगाता है। आम side-scatter डिज़ाइन में आने वाली किरण से 90° पर रोशनी पकड़ी जाती है।
लगभग साफ़ पानी में हर नया कण बिखरी रोशनी बढ़ाता है और यह आसानी से पकड़ में आता है, इसलिए कम टर्बिडिटी के लिए यही तरीक़ा चलता है। यह आर-पार रोशनी की छोटी-सी कमी पढ़ने से अलग क़िस्म का सिग्नल है।
बिखरी रोशनी का मतलब आईने जैसा किसी एक दिशा में लौटना नहीं है। कण कई दिशाओं में रोशनी भेजते हैं, और मीटर कौन-सा कोण चुनता है, इससे तय होता है कि वह कण के साइज़ वग़ैरह पर कैसे जवाब देगा।
टर्बिडिटी बढ़ने पर नापने वाले हिस्से तक कम रोशनी पहुँचती है, और बिखरी रोशनी भी डिटेक्टर तक जाते-जाते कमज़ोर हो जाती है। तब टर्बिडिटी और पकड़ी गई रोशनी का रिश्ता सीधा अनुपात नहीं रहता।
रीडिंग फ़ुल-स्केल से नीचे है, इससे यह साबित नहीं होता कि नाप सही है। multiple scattering समेत सिस्टम का जवाब परखें, और मीटर के स्पेक या टेस्ट विधि के हिसाब से dilution करें।
Near-infrared रोशनी कुछ हालात में दिखने वाले रंग का असर घटा देती है। फिर भी कणों के सोखने और गुणों का फ़र्क़ बना रहता है, इसलिए जिस पानी को नापना है, उसके असली सैंपलों पर मीटर आज़मा लें।
चित्र 3: बगल की बिखरी रोशनी और सीधी आर-पार रोशनी के लिए अलग डिटेक्टर
S को 90° पर और T को किरण की सीध में नापा जाता है। Ratio वाले मीटर दोनों का इस्तेमाल करते हैं।
Ratio तरीक़ा (बिखरी और आर-पार रोशनी का अनुपात)
Ratio मीटर (जापान में इसे "toka sanran-kou houshiki" कहते हैं) आर-पार रोशनी और बिखरी रोशनी, दोनों नापता है और उनका अनुपात इस्तेमाल करता है। अगर लैंप की चमक या सैंपल का रंग दोनों सिग्नल पर बराबर असर डालता है, तो अनुपात लेने से उस असर का बड़ा हिस्सा कट जाता है।
इसका मतलब यह नहीं कि ratio तरीक़ा हर सैंपल के लिए सबसे सटीक है। कण, सैंपल का रंग, ज़रूरी रेंज और अगर कोई जाँच-विधि तय है तो उसे देखकर तरीक़ा चुनें। ASTM D7315 और USGS ऐसे डिज़ाइनों की रीडिंग अलग यूनिट में लिखते हैं, जैसे NTRU (सफ़ेद रोशनी) और FNRU (near-infrared)।
एक सीधा उदाहरण: बिखरी रोशनी का सिग्नल 20 और आर-पार रोशनी का सिग्नल 80 हो तो अनुपात 0.25 आता है। लैंप मद्धम होकर दोनों 0.8 गुना हो जाएँ, तो सिग्नल 16 और 64 हो जाते हैं, पर अनुपात 0.25 ही रहता है।
अब मान लें सिर्फ़ बिखरी रोशनी वाली तरफ़ 4 का बबल सिग्नल जुड़ गया। अनुपात 24 ÷ 80 = 0.30 हो जाता है। यानी अनुपात हर गड़बड़ी ठीक नहीं करता, सिर्फ़ उन्हीं की भरपाई करता है जो दोनों सिग्नल पर बराबर असर डालती हैं।
असली मीटर अपने optics के ढाँचे और करेक्शन के तरीक़ों के साथ कैलिब्रेट होते हैं। यह न मानें कि एक सीधे S/T फ़ॉर्मूले का मतलब है कि हर मॉडल उसी रेंज में उतनी ही सटीकता से नापेगा। हर मॉडल का परफ़ॉर्मेंस अलग से देखें।
Integrating sphere और surface scatter
Integrating sphere वाला मीटर सैंपल से निकली रोशनी को एक गोले के अंदर इकट्ठा करता है, जिसकी भीतरी दीवार रोशनी को हर तरफ़ बिखेरकर लौटाती है। एक कोण वाले scatter मीटर के मुक़ाबले यह कई दिशाओं की रोशनी समेटता है।
यह बिखरी रोशनी और कुल आर-पार रोशनी के अनुपात जैसी मात्राओं से टर्बिडिटी निकालता है। सिद्धांत समझना हो तो यह देखें कि मीटर रोशनी के किन हिस्सों को अलग करके पकड़ता है। सिर्फ़ गोला लगा होना काफ़ी जानकारी नहीं है।
चित्र 4: Integrating sphere रोशनी को बिखेरकर इकट्ठा करता है
सैंपल से निकली रोशनी गोले में टकराकर घूमती है और डिटेक्टर तक पहुँचती है। यह रोशनी के रास्ते का सिर्फ़ समझाने वाला क्रॉस-सेक्शन है।
Surface-scatter मीटर पानी की सतह के पास बिखरी रोशनी को पकड़ता है, आम तौर पर ऊपर से। जिन डिज़ाइनों में optics सैंपल में डूबी नहीं होती, उनमें पानी से छूने वाली सेल-विंडो के गंदे होने की दिक़्क़त नहीं आती।
फिर भी सतह पर झाग या तैरता कचरा रीडिंग पर असर डालता है। Yokogawa का बबल पर तकनीकी नोट ऐसी सिग्नल प्रोसेसिंग बताता है जो बीच-बीच में आने वाले बबल दबाती है, और यह भी कि वह किन शर्तों में लगती है।
Optics सैंपल को न छुए, इसका मतलब यह नहीं कि पूरे मीटर को मेंटेनेंस नहीं चाहिए। सैंपल का फ़्लो, पानी का लेवल और ड्रेन स्थिर रखें, और नापने वाली सतह पर झाग जमने न दें।
नापने का तरीक़ा कैसे चुनें
पहले मक़सद और ज़रूरी टर्बिडिटी रेंज तय करें। पीने के पानी की जाँच, कच्चे पानी की निगरानी, प्रोसेस के पानी का कंट्रोल और बहुत गँदले वेस्टवॉटर की निगरानी, सबकी परफ़ॉर्मेंस की ज़रूरतें और सीमाएँ अलग हैं।
अगर किसी क़ानून या कॉन्ट्रैक्ट ने विधि तय कर रखी है, तो उस विधि का पालन ही शुरुआती बिंदु है। ज़्यादा रेंज वाला मीटर भी अलग विधि पर चलता हो, तो उसकी वैल्यू को बराबर का कम्प्लायंस नतीजा नहीं माना जा सकता।
प्रोसेस की निगरानी में सिर्फ़ सामान्य चलन में नहीं, स्टार्टअप और गड़बड़ी के समय भी देखें कि पानी कितना गँदला होता है। सामान्य वैल्यू के हिसाब से रखी गई तंग रेंज यह दर्ज नहीं कर पाएगी कि गड़बड़ी कितनी बड़ी थी।
मीटर बदलते समय कुछ समय पुराने और नए मीटर को एक ही सैंपल पर चलाएँ, ताकि डेटा की निरंतरता जाँची जा सके। सिर्फ़ स्टैंडर्ड पर मेल खाना काफ़ी नहीं है। बारिश या कच्चा माल बदलने जैसे समय भी दर्ज करें, जब कण ख़ुद बदलते हैं।
तुलना में फ़र्क़ आए, तो पुरानी कंट्रोल वैल्यू आगे ले जाने से पहले यह देखें कि वे किस विधि पर बनी थीं। "प्रोसेस बदला है" और "मीटर का जवाब अलग है" को अलग करने से अलार्म की ग़लत सेटिंग आगे नहीं जाती।
स्पेसिफ़िकेशन में सिर्फ़ टर्बिडिटी की ऊपरी-निचली सीमा काफ़ी नहीं है। ये भी लिखें:
- कैलिब्रेशन का स्टैंडर्ड और optical विधि
- नापने की जगह पर पानी का तापमान और प्रेशर
- आउटपुट की स्केलिंग (4–20 mA के दोनों सिरों का मतलब)
- मेंटेनेंस के दौरान आउटपुट कैसे बर्ताव करे
ये सब स्पेक में हों, तो डिलीवरी से लेकर साथ-साथ तुलना तक सब एक ही शर्तों पर चलता है।
तरीक़ों की तुलना
टेबल में दिखाया है कि हर तरीक़ा कौन-सी रोशनी पढ़ता है और किन शर्तों को जाँचना है।
| तरीक़ा | कौन-सी रोशनी पढ़ता है | आम इस्तेमाल | जाँचने की शर्तें |
|---|---|---|---|
| Visual | स्टैंडर्ड और सैंपल का दिखना | तय प्रक्रिया से तुलना वाले टेस्ट | रोशनी, बैकग्राउंड, देखने की शर्तें |
| Transmitted light | सीधी आर-पार रोशनी का घटना | मध्यम से ज़्यादा टर्बिडिटी की निगरानी | रंग, विंडो की गंदगी, path length |
| Scattered light | तय कोण पर बिखरी रोशनी | कम टर्बिडिटी समेत माप | Wavelength, डिटेक्टर का कोण, multiple scattering |
| Integrating sphere | गोले में इकट्ठा हुई आर-पार और बिखरी रोशनी | तय विधि से सैंपल की माप | गोला, optics, कैलिब्रेशन की शर्तें |
| Ratio (बिखरी/आर-पार) | बिखरी और आर-पार रोशनी का अनुपात | रंग का असर घटाकर निगरानी | वे गड़बड़ियाँ जो दोनों सिग्नल पर बराबर असर नहीं डालतीं |
| Surface scatter | पानी की सतह के पास बिखरी रोशनी | पानी से छूने वाली विंडो के बिना लगातार माप | झाग, तैरता कचरा, फ़्लो, पानी का लेवल |
सैंपल के हिसाब से तरीक़ा चुनें:
- कम टर्बिडिटी: ज़ीरो की स्थिरता, बाहरी रोशनी रोकना और साफ़ सेल ज़रूरी हैं। सिर्फ़ डिस्प्ले का सबसे छोटा डिजिट न देखें। यह देखें कि आपकी टारगेट वैल्यू के आसपास रीडिंग कितनी हिलती है।
- ज़्यादा टर्बिडिटी: रोशनी कितनी दूर तक जा पाती है, डिटेक्टर की जगह और कण कितनी तेज़ी से बैठते हैं, ये सब मायने रखते हैं। निगरानी के डिज़ाइन में तय करें कि ओवर-रेंज पर आउटपुट ऊपरी सीमा पर टिके या फ़ॉल्ट सिग्नल दे।
- रंगीन पानी: कण बढ़ने और घुले रंग बढ़ने को अलग-अलग परखें। करेक्शन वाले तरीक़े में भी रंग या कण बदलने पर जवाब बदलता है, इसलिए सामान्य और गड़बड़ी वाले, दोनों तरह के पानी पर आज़माएँ।
- तेल की बूँदें या flocs: मिलाने की तेज़ी से सैंपल की हालत बदल सकती है। टेस्ट की शर्तें दर्ज करें, और सैंपल लेने से नापने तक हैंडलिंग एक-सी रखें।
ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर की सैंपल लाइन का डिज़ाइन

ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर सिर्फ़ वही पानी नापता है जो उसके सेंसर तक पहुँचता है। अगर सैंपल लाइन में कण बैठ जाएँ या चिपक जाएँ, तो मीटर को प्रोसेस के पानी से अलग पानी दिखता है।
सैंपलिंग की जगह ऐसी चुनें जहाँ प्रोसेस का प्रतिनिधि पानी बहता हो। टैंक के कोने और आउटलेट पाइप में कण अलग तरह से चलते हैं। इसलिए सिर्फ़ लगाने की आसानी न देखें, dead zone और कण बैठने की जगह भी जाँचें।
लंबी और पतली सैंपल लाइन देरी बढ़ाती है, और कणों को बैठने या चिपकने के ज़्यादा मौक़े देती है। लंबाई, पाइप का व्यास और फ़्लो साथ में तय करें, और धोने तथा चोक जाँचने का रास्ता भी रखें।
चित्र 5: सैंपल लाइन में कणों को असली रखना और बबल हटाना, दोनों ज़रूरी हैं
प्रोसेस के टैप से ड्रेन तक पूरे रास्ते को एक ही नापने का सिस्टम मानें। कण बैठना, बबल और रुका हुआ पानी, सब रीडिंग पर असर डालते हैं।
यह सिर्फ़ समझाने वाला लेआउट है। असली मीटर की फ़्लो और प्रेशर रेंज का पालन करें। बबल सेपरेटर ऐसा बनाएँ कि उसमें कण न बैठें।
प्रेशर घटने पर घुली गैस बाहर आती है, या पंप और फ़िटिंग से हवा खिंच जाती है। इनसे बने बबल रोशनी बिखेरते हैं। कणों की मात्रा बढ़े बिना भी रीडिंग अचानक उछल सकती है।
बबल हटाने के लिए फ़्लो और प्रेशर स्थिर रखें, और मीटर के लिए बना सेपरेटर इस्तेमाल करें। पर सैंपल को ज़्यादा देर रुका छोड़ने से कण भी बैठ जाते हैं, और जो टर्बिडिटी नापनी थी वही बदल जाती है।
ज़्यादा फ़्लो हमेशा बेहतर नहीं है। बहुत तेज़ बहाव बबल बनाता है और पानी की सतह अस्थिर कर देता है। फ़्लो और प्रेशर सेंसर की बताई रेंज में रखें, और उसी सेटिंग पर सप्लाई स्थिर होने तक एडजस्ट करें।
सैंपल लाइन की देरी अलार्म के जवाब को भी धीमा करती है। अगर लाइन और सेल में बहुत पानी भरा रहता है, तो सेंसर तेज़ होने पर भी प्रोसेस का बदलाव दिखने में समय लगता है।
लैब रिज़ल्ट और ऑनलाइन रीडिंग की तुलना करते समय एक ही समय पर लिए गए सैंपल का जोड़ा बनाएँ। सैंपलिंग पॉइंट से सेल तक की देरी भी गिनें। नहीं तो बदलाव के दौरान दो अलग पानी की रीडिंग देखकर आप उसे "मीटर की गलती" कह देंगे।
टर्बिडिटी मीटर का कैलिब्रेशन: formazin, StablCal और दूसरे स्टैंडर्ड
कैलिब्रेशन का मतलब है मीटर के जवाब को एक तय स्टैंडर्ड से मिलाना। यह मीटर को तब तक घुमाना नहीं है जब तक सैंपल पर मनचाही वैल्यू न दिखे। हर बार स्टैंडर्ड की क़िस्म, वैल्यू और lot नंबर दर्ज करें।
- साफ़ करके शुरू करें। Optics और सैंपल का रास्ता साफ़ करें, फिर बताए गए ज़ीरो पानी पर रीडिंग टिकने दें। गंदी विंडो के साथ ज़ीरो सेट किया, तो वह गंदगी भी रेफ़रेंस का हिस्सा बन जाती है।
- बताए गए स्टैंडर्ड से span करें। निर्माता या विधि जो स्टैंडर्ड सॉल्यूशन या standard plate बताए, वही इस्तेमाल करें। आम विकल्प हैं formazin, stabilized formazin (जैसे Hach StablCal) और polystyrene जैसे कण वाले स्टैंडर्ड। जापान की नल-जल निगरानी की विधि में लगातार माप के लिए standard plate से कैलिब्रेशन भी मान्य है। भरोसा करने से पहले पक्का करें कि plate स्टैंडर्ड सॉल्यूशन से मेल खाती है।
- अपनी कंट्रोल वैल्यू के आसपास जाँचें। ज़ीरो और ऊँची वैल्यू, दो बिंदुओं पर मेल खाना यह साबित नहीं करता कि बीच में भी मीटर काम का है। जिन वैल्यू पर आप असल में कंट्रोल करते हैं, उनके आसपास जवाब जाँचें।
- पहले और बाद की रीडिंग दर्ज करें। सफ़ाई से पहले और बाद की, तथा कैलिब्रेशन से पहले और बाद की रीडिंग अलग-अलग लिखें। इससे पता चलता है कि सिर्फ़ सफ़ाई से रीडिंग ठीक हुई या ज़ीरो और sensitivity भी खिसक गई थी। मेंटेनेंस का अंतराल तय करने में यह काम आता है।
स्टैंडर्ड को dilute करना
dilution से स्टैंडर्ड की सीरीज़ बनाते समय स्टॉक की वैल्यू, ली गई मात्रा और अंतिम आयतन को जोड़कर देखें। अंतिम आयतन वह कुल मात्रा है जो पानी डालकर निशान (mark) तक पूरी करने पर मिलती है।
चित्र 6: 100 डिग्री के स्टॉक से 10 डिग्री का स्टैंडर्ड बनाना
10 mL स्टॉक लें और कुल 100 mL तक पूरा करें, तो 10 डिग्री मिलती है। असल में बताया गया स्टैंडर्ड और प्रक्रिया ही अपनाएँ।
10 mL स्टॉक में 100 mL पानी डालने पर कुल लगभग 110 mL बनता है, 100 mL नहीं। निशान तक पूरा करना और तय मात्रा में पानी मिलाना, ये दो अलग काम हैं।
स्टोरेज में जो सस्पेंशन नीचे बैठ गया हो, उसकी सिर्फ़ ऊपरी परत लेने से वैल्यू गलत आएगी। बताया गया मिलाने का तरीक़ा और एक्सपायरी तारीख़ मानें, और कंटेनर या औज़ार से बाहर के कण अंदर न जाने दें।
कच्चे रीएजेंट से formazin बनाने में ख़तरनाक केमिकल लगते हैं। इनमें से एक, hydrazine sulfate, बहुत ज़हरीला है, और formazin में भी इसकी बची हुई मात्रा हो सकती है। इसे आम मेंटेनेंस नोट्स देखकर न बनाएँ। तय टेस्ट विधि, safety data sheet (SDS) और अपनी साइट की केमिकल हैंडलिंग प्रक्रिया मानें। भारत में ख़तरनाक पदार्थों से जुड़ी बातें Factories Act 1948 और 2020 की OSH Code में आती हैं। अपने राज्य में कौन-सा नियम किस रूप में लागू है, यह सेफ़्टी विभाग से पूछें।
4–20 mA स्केलिंग और अलार्म का डिज़ाइन
मीटर जब अपनी वैल्यू कंट्रोल सिस्टम को भेजता है, तब डिस्प्ले की रेंज और भेजी जाने वाली रेंज मिलनी चाहिए। 4–20 mA में मीटर और लेने वाला सिस्टम, दोनों को एक राय होनी चाहिए कि हर सिरा किस टर्बिडिटी का मतलब रखता है।
एक काल्पनिक केस लें: 0–20 डिग्री को 4–20 mA पर स्केल किया है, तो 12 mA बीच की वैल्यू यानी 10 डिग्री है। अगर लेने वाली तरफ़ अब भी 0–100 सेट है, तो वही 12 mA वहाँ 50 दिखेगा।
यूनिट का लेबल भी देखें। अगर ट्रांसमीटर formazin डिग्री में आउटपुट देता है और कंट्रोल सिस्टम का टैग NTU लिखा है, तो संख्या सही लग सकती है पर आधार अलग है। सिग्नल सही होने से यह साबित नहीं होता कि सैंपलिंग या optics सही हैं, इसलिए सैंपल की तरफ़ और सिग्नल की तरफ़ अलग-अलग जाँचें।
अलार्म सेट करते समय ये बिंदु देखें:
- रेंज: सिर्फ़ सामान्य वैल्यू नहीं, स्टार्टअप और गड़बड़ी के स्तर भी कवर करें।
- ओवर-रेंज और फ़ॉल्ट सिग्नल: पूछें कि आउटपुट ऊपरी सीमा पर टिकता है या फ़ॉल्ट करंट पर चला जाता है। कुछ ट्रांसमीटर NAMUR NE 43 के सिग्नल लेवल इस्तेमाल करते हैं, पर असली करंट डिवाइस और उसकी सेटिंग पर निर्भर है, इसलिए सप्लायर से पक्का करें।
- Averaging और बबल रिजेक्शन: फ़िल्टर जितना तेज़ होगा, छोटे स्पाइक उतने छिपेंगे, लेकिन असली बदलाव भी देर से दिखेगा। अलार्म किस काम के लिए है, उसके हिसाब से जवाब का समय और झूठे अलार्म की रोकथाम तय करें।
- मेंटेनेंस की स्थिति: टर्बिडिटी के साथ मीटर की गड़बड़ी और सफ़ाई की स्थिति भी रिकॉर्ड करें। अगर कंट्रोल सिस्टम में सामान्य रीडिंग और मेंटेनेंस के समय की रीडिंग एक जैसी दर्ज होंगी, तो बाद में कोई पानी की क्वालिटी का बदलाव ग़लत पढ़ेगा।
- तात्कालिक (instantaneous) वैल्यू: टर्बिडिटी उस पल के पानी की हालत बताती है। उसे समय पर जोड़ने से कणों का वज़न नहीं मिलता। प्रदूषण की कुल मात्रा चाहिए तो फ़्लो और कंसंट्रेशन की सही परिभाषा तय करें।
लक्षण से टर्बिडिटी रीडिंग की गड़बड़ी ढूँढना
लक्षण से संभावित कारण की ओर चलें। बबल, गंदगी, स्टैंडर्ड और सैंपल लाइन, आम तौर पर इन्हीं जगहों पर पहले देखा जाता है।
| लक्षण | पहले क्या देखें | नोट |
|---|---|---|
| छोटे-छोटे स्पाइक | बबल, बड़े कणों का गुज़रना, बाहरी रोशनी | अगर स्पाइक प्रोसेस के फ़्लो या प्रेशर बदलने के साथ आएँ, तो सैंपल लाइन पर शक करें। |
| धीरे-धीरे खिसकना (drift) | विंडो की गंदगी या जमाव, स्टैंडर्ड की हालत, रोशनी के सोर्स का पुराना होना | सफ़ाई से पहले की रीडिंग लिख लें, ताकि ज़ीरो और span एक साथ रीसेट करके कारण न खो दें। |
| सिर्फ़ सफ़ाई के तुरंत बाद कम | सेल में बचा धोने का पानी, जो सैंपल को पतला कर रहा है | सैंपल वापस कब लगा और टिकने में कितना समय लगा, लिखें। सफ़ाई वाले समय को अलग चिह्नित करें। |
| लैब रिज़ल्ट से एक तय अनुपात में अलग | स्टैंडर्ड का आधार, optical विधि, आउटपुट रेंज की सेटिंग | sensitivity बदलने से पहले पक्का करें कि दोनों तरफ़ एक ही मात्रा नापी जा रही है। |
| एक ही सैंपल पर रीडिंग दोहराई नहीं जाती | कण बैठना, flocculation, सेल की दिशा, बबल | मिलाने की प्रक्रिया और नापने से पहले का इंतज़ार तय कर दें। |
| प्रोसेस बदलने के बाद रिश्ता टूटना | कणों के गुण या रंग बदल गए | मीटर ख़राब है, यह न मान लें। असली सैंपलों पर टर्बिडिटी और ज़रूरी दूसरे पैरामीटर दोबारा नापें। |
चेकलिस्ट: जापानी टर्बिडिटी मीटर का स्पेक जाँचना
जापान से डेटाशीट, P&ID या ऑपरेटिंग डेटा मिले, तो इस सूची से मिलान करें।
- यूनिट: 度 (डिग्री), NTU, FNU, FTU या FAU, और क्या लेबल असली optics को दिखाता है
- स्टैंडर्ड: kaolin, formazin, stabilized formazin, polystyrene जैसे कण या standard plate
- Optics: transmitted, 90° scatter, ratio, integrating sphere या surface scatter; रोशनी का सोर्स (सफ़ेद या near-infrared)
- विधि का रेफ़रेंस: JIS K 0102-1, JIS K 0801, जापान की नल-जल जाँच विधि, EPA 180.1, ISO 7027-1 या भारत में IS 3025 (Part 10)
- रेंज: सामान्य, स्टार्टअप और गड़बड़ी के स्तर तक
- आउटपुट: 4–20 mA के सिरे, ओवर-रेंज का बर्ताव, फ़ॉल्ट करंट और मेंटेनेंस के दौरान का बर्ताव
- कंट्रोल सिस्टम: लेने वाली तरफ़ वही रेंज और वही यूनिट लेबल
- अलार्म: सेटपॉइंट, वे किस विधि पर बने थे, और averaging या बबल-रिजेक्शन की सेटिंग
- सैंपल लाइन: सैंपलिंग पॉइंट, फ़्लो और प्रेशर की रेंज, बबल सेपरेटर, देरी का समय, ड्रेन
- कैलिब्रेशन: स्टैंडर्ड की वैल्यू, कितने समय में, कंट्रोल वैल्यू के आसपास जाँच और रिकॉर्ड का फ़ॉर्मेट
- SS डिस्प्ले (अगर है): correlation का समीकरण, उसके पीछे के सैंपल और उसकी मान्य रेंज
जापानी सप्लायर से पूछने के सवाल
ये सवाल उपकरण भेजे जाने से पहले पूछें, या किसी अलार्म सेटपॉइंट को अपने सिस्टम में डालने से पहले।
- टर्बिडिटी की वैल्यू किस स्टैंडर्ड पर आधारित है: kaolin, formazin या polystyrene?
- मीटर में कौन-सा नापने का सिद्धांत और रोशनी का सोर्स है? क्या वह JIS K 0801, ISO 7027-1 या किसी और विधि पर बना है?
- क्या मीटर NTU या FNU में दिखा और भेज सकता है? अगर हाँ, तो क्या इससे optics बदलती है या सिर्फ़ लेबल?
- 4 mA और 20 mA किस टर्बिडिटी वैल्यू के हैं? ओवर-रेंज और फ़ॉल्ट पर मीटर कितना करंट देता है?
- सफ़ाई और कैलिब्रेशन के दौरान आउटपुट क्या करता है (hold, आख़िरी वैल्यू या लाइव)?
- आप कौन-सा स्टैंडर्ड और कौन-से कैलिब्रेशन पॉइंट सुझाते हैं, और कितने अंतराल पर?
- अलार्म सेटपॉइंट कैसे तय हुए, और वे किस विधि और यूनिट पर आधारित थे?
- अगर मीटर SS को mg/L में दिखाता है, तो correlation किन सैंपलों पर और किस रेंज में बना है?
सप्लायर को ईमेल का नमूना
जापानी सप्लायर से बातचीत आम तौर पर अंग्रेज़ी में होती है, इसलिए नमूना अंग्रेज़ी में है। इसे अपने हिसाब से बदलें और ब्रैकेट वाली जगहें अपनी जानकारी से भरें।
Subject: Turbidity meter [tag no.] – units, calibration, and 4–20 mA scaling
Dear [Name],
We are integrating the turbidity meter [model / tag no.] into our control system, and our plant reports turbidity in [NTU / FNU]. Could you please confirm the following?
1. The standard behind the "度" value (kaolin, formazin, or polystyrene) and the measurement principle and light source.
2. Whether the meter can output in NTU or FNU, and whether this changes the optics or only the display label.
3. The turbidity values at 4 mA and 20 mA, and the output current when over range, in fault, and during maintenance.
4. The recommended calibration standard, calibration points, and frequency.
5. The basis for the alarm setpoint of [value] 度.Thank you for your help.
Best regards,
[Your name]
[Company]
इस गाइड की सीमाएँ
- EPA 180.1 और ISO 7027-1 की optics की शर्तें सार्वजनिक सोर्स और निर्माताओं के दस्तावेज़ों से सारांश में ली गई हैं। कम्प्लायंस या डिज़ाइन के लिए स्टैंडर्ड का ताज़ा टेक्स्ट देखें।
- नियम के तहत होने वाली जाँच उसी विधि से करनी होती है जो नियामक मंज़ूर करे (जैसे भारत में IS 10500 और उसके साथ बताई विधियाँ, या जापान की नल-जल जाँच विधि)। आपकी साइट पर कौन-सी विधि लगेगी, यह यह गाइड तय नहीं करती।
- JIS K 0801 का ताज़ा एडिशन और शर्तें हमने पक्की नहीं कीं। सप्लायर से पूछें।
- IS 3025 (Part 10) का हमने 1984 का एडिशन देखा है। BIS पर उसका मौजूदा स्टेटस और कोई नया एडिशन अलग से जाँचें।
- हल किए गए उदाहरणों के सारे समीकरण और संख्याएँ (SS correlation, S/T अनुपात, 4–20 mA केस) काल्पनिक हैं।
- टर्बिडिटी अकेली घुले हुए तत्वों के बारे में कुछ नहीं बताती। कूलिंग वाटर और बॉयलर वाटर के लिए cycles of concentration और ब्लोडाउन कंट्रोल जैसे अपने पैरामीटर चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
जापान की 1 टर्बिडिटी डिग्री कितने NTU के बराबर है?
कोई ऐसा तय कन्वर्ज़न नहीं है जो हर तरह के पानी पर चले। रीडिंग तभी मिलाएँ जब स्टैंडर्ड और optics एक जैसी हों। एक ही मीटर पर डिस्प्ले का लेबल बदलना और अलग रोशनी या अलग डिटेक्टर कोण वाले मीटर से बदलना, दो अलग बातें हैं।
क्या NTU और FNU एक ही हैं?
संख्या के हिसाब से हाँ: ISO 7027-1 के अनुसार एक ही scattered-light विधि के अंदर इन्हें बराबर माना जाता है। असली सैंपलों पर ज़रूरी नहीं। NTU सफ़ेद रोशनी वाले मीटर से आता है और FNU near-infrared मीटर से, और कण का साइज़ या रंग दोनों की रीडिंग अलग कर सकता है।
क्या टर्बिडिटी का mg/L और TSS का mg/L एक ही है?
नहीं। kaolin आधार पर mg/L में लिखी टर्बिडिटी और तौलकर निकाला गया तैरते ठोस का वज़न, दो अलग मात्राएँ हैं। टर्बिडिटी से TSS का अनुमान चाहिए तो अपने ही सैंपलों पर बना correlation इस्तेमाल करें और उसकी मान्य रेंज में रहें।
ऑनलाइन टर्बिडिटी मीटर अचानक ऊँचा क्यों पढ़ने लगता है?
कणों का सचमुच बढ़ना एक कारण है। इसके अलावा आम कारण हैं बबल, तैरता कचरा, बाहरी रोशनी और सैंपल लाइन में बदलाव। स्पाइक को उसी समय के प्रोसेस डेटा से मिलाएँ और दोबारा नापें, ताकि पानी का बदलाव और नापने की गड़बड़ी अलग हो सकें।
कैलिब्रेशन ठीक है फिर भी फ़ील्ड की रीडिंग अलग क्यों है?
स्टैंडर्ड पर मेल खाने से यह तय नहीं होता कि असली कणों और रंग पर भी जवाब वही होगा, क्योंकि यह तरीक़े पर निर्भर है। सैंपलिंग का समय और कणों का बैठना भी असर डालते हैं। तुलना से पहले एक ही सैंपल को एक जैसी शर्तों पर नापें।
सोर्स
- जापान में टर्बिडिटी की यूनिट (kaolin और formazin डिग्री, 1 mg/L kaolin की परिभाषा, EPA की optics शर्तें): Yokogawa, "Turbidity definitions and units" (जापानी)
- NTU और FNU की optics, यूनिट के नाम, रंग का असर, नियम की विधियाँ: US EPA, "Field Turbidity Measurements" operating procedure
- यूनिट की सूची (NTU, FNU, FAU, FNRU, FBU) और इलाक़ों में चलन: Thermo Fisher Scientific, "Turbidity Units – A Cloudy Issue"
- USGS की रिपोर्टिंग यूनिट: USGS Office of Water Quality Technical Memorandum 2004.03
- EPA Method 180.1 की रेंज और optics: NEMI, EPA-NERL 180.1 method summary; Health Canada, Guideline Technical Document – Turbidity
- ISO 7027-1 का दायरा, NTU/FNU की बराबरी, रेंज: ISO 7027-1:2016; Standard Norge, ISO 7027-1:2016
- ISO 7027 की wavelength और डिटेक्टर कोण (secondary): Hanna Instruments, HI88713 ISO turbidity meter
- प्राकृतिक पानी में NTU और FNU: US Bureau of Reclamation / California DWR memo on NTU and FNU; Campbell Scientific, turbidity units FAQ (जापानी)
- जापान के नल-जल की टर्बिडिटी का स्टैंडर्ड: Ministry of the Environment, Japan, drinking water quality standards (जापानी)
- जापान की नल-जल जाँच की विधियाँ: Notification No. 261, water quality test methods (जापानी)
- भारत: IS 10500:2012 की टर्बिडिटी सीमा (1 / 5 NTU): IS 10500:2012 सारांश (infralens.in); Auriga Research, IS 10500 guide
- भारत: IS 3025 (Part 10) टर्बिडिटी की nephelometric विधि: IS 3025-10 (1984), BIS
- JIS K 0102 सीरीज़: JEMAI, merger and division of the JIS K 0102 series (जापानी); Japanese Standards Association, JIS K 0102-1:2021 (जापानी); JIS K 0102-1 Amendment 1:2023 (जापानी)
- Ratio तरीक़ा: HORIBA, light transmission and scattering method (जापानी); Yokogawa, technical information on transmitted-scattered light turbidimeters (जापानी)
- Surface-scatter मीटर और बबल: Yokogawa, bubble countermeasures for surface-scatter turbidimeters (जापानी)
- टर्बिडिटी बनाम SS और SS कन्वर्ज़न: Yokogawa, difference between turbidity and SS (जापानी); Kasahara Chemical Instruments, SS conversion using sample correlation (जापानी)
- StablCal और formazin के ख़तरे: Hach, StablCal turbidity standard; Hach Method 10258
- NAMUR NE 43 के सिग्नल लेवल: Test & Measurement Tips, "What's the difference between live zero and dead zero?"
मूल जापानी लेखयह गाइड जापान के पाठकों के लिए लिखे गए MONOSCOPE के एक लेख पर आधारित है: 濁度とは?度・NTU・FNUの違いと測定原理、選び方・校正の実務


