जर्मनी, कोरिया, ताइवान, भारत की मैन्युफैक्चरिंग और जापान

आपकी फ़ैक्टरी में जापान की मशीन लगी हो, या कोई पार्ट जापानी सप्लायर से आता हो, तो एक सवाल उठता है। जापान बाक़ी देशों के सामने कहाँ खड़ा है? जर्मनी, दक्षिण कोरिया और ताइवान के नाम अक्सर साथ आते हैं, और भारत का सवाल हमारे अपने काम से जुड़ा है।
छोटा जवाब यह है: जर्मनी कार और मशीनों में जापान का सीधा मुक़ाबले वाला देश है। दक्षिण कोरिया और ताइवान जापानी मटीरियल और उपकरणों के बड़े ग्राहक हैं। भारत में जापानी कंपनियाँ यहीं फ़ैक्टरी लगाकर बढ़ते बाज़ार में बेचती हैं। इस गाइड में चारों देशों की तुलना है और जापान से उनका रिश्ता है। आख़िर में सवालों की चेकलिस्ट और संदेश का एक नमूना है, जिसे आप जापानी सप्लायर के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।
विषय-सूची
- चारों देश एक नज़र में
- हर देश की मैन्युफैक्चरिंग कितनी बड़ी है?
- जर्मनी: Mittelstand की कंपनियाँ और जापान का सीधा मुक़ाबला
- दक्षिण कोरिया: chaebol, मेमोरी चिप और जापानी मटीरियल
- ताइवान: foundry मॉडल और कुमामोटो में JASM
- भारत: Make in India, PLI और जापानी ऑटो कंपनियाँ
- मुक़ाबला या साझेदारी? चारों देशों से जापान का व्यापार
- जापान से सोर्स करते समय इसका क्या मतलब है
- चेकलिस्ट: जापानी सप्लायर से पूछने वाले सवाल
- इस तुलना की सीमाएँ
- सार
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- स्रोत
चारों देश एक नज़र में
चारों देशों की अर्थव्यवस्था में मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा हिस्सा है, पर कमाई का तरीक़ा हर देश में अलग है। नीचे की figure में दिखता है कि हर देश में कौन आगे है, क्या बनता है और जापान से रिश्ता कैसा है।
कौन कमाता है और किस चीज़ से कमाता है, यह हर देश में अलग है।
व्यापार की दिशा जापान के वित्त मंत्रालय के व्यापार आँकड़ों (2024) से ली गई है। रिश्तों की बात इस लेख के उदाहरणों का सार है। कंपनियों के नाम सिर्फ़ उदाहरण हैं।
हर देश की मैन्युफैक्चरिंग कितनी बड़ी है?
2024 में मैन्युफैक्चरिंग value added (उत्पादन से बनी नई कुल कीमत) जर्मनी में 843.7 बिलियन डॉलर और जापान में 788.5 बिलियन डॉलर थी (World Bank)। दक्षिण कोरिया और भारत एक-दूसरे के क़रीब थे, दोनों करीब 500 बिलियन डॉलर से थोड़े कम।
जर्मनी और जापान का आकार क़रीब-क़रीब बराबर है, और दक्षिण कोरिया और भारत का भी। GDP में सबसे बड़ा हिस्सा दक्षिण कोरिया का है।
World Bank, World Development Indicators: मैन्युफैक्चरिंग value added (मौजूदा डॉलर में) और GDP में हिस्सा, 2024। चीन सिर्फ़ तुलना के लिए दिखाया गया है। ताइवान World Bank के डेटा में नहीं है।
ये आँकड़े डॉलर में बदले हुए हैं, इसलिए रैंकिंग को सँभलकर पढ़ें।
2020 में जापान काफ़ी आगे था। उसका आँकड़ा करीब 1.03 ट्रिलियन डॉलर था, जबकि जर्मनी का 730.2 बिलियन डॉलर। उसके बाद का उलटफेर ज़्यादातर कमज़ोर येन की वजह से है, क्योंकि डॉलर में बदलने पर जापान का आँकड़ा घट जाता है। रैंकिंग सिर्फ़ उस साल के exchange rate की तस्वीर है। उससे यह नहीं पता चलता कि कौन-सी इंडस्ट्री कितनी मज़बूत है।
GDP में हिस्से की कहानी अलग है। 26.6% के साथ दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्था figure के बाक़ी देशों से ज़्यादा मैन्युफैक्चरिंग पर टिकी है।
जर्मनी: Mittelstand की कंपनियाँ और जापान का सीधा मुक़ाबला

इंडस्ट्री का ढाँचा और ताक़त
जर्मनी की मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट के लिए बनी है। 2025 में जर्मन एक्सपोर्ट में मोटर वाहन और उनके पार्ट्स का हिस्सा 16.2% था, जो सबसे बड़ी श्रेणी है। मशीनरी 13.8% के साथ दूसरे नंबर पर रही (Destatis, जर्मनी का सांख्यिकी विभाग)।
इस एक्सपोर्ट के पीछे Mittelstand है, यानी जर्मनी की छोटी और मझोली कंपनियों (SME) का आधार। 2024 में जर्मनी की 99.2% कंपनियाँ SME थीं (करीब 35.2 लाख कंपनियाँ), और 54.4% कामगार उनमें काम करते थे (IfM Bonn)।
कहा जाता है कि इनमें से कई कंपनियाँ किसी एक पार्ट या मशीन में दुनिया की अव्वल कंपनियों में आती हैं। यह जापान की "niche-top" कंपनियों जैसा है, यानी ऐसी कंपनियाँ जो किसी छोटे दायरे में पूरी दुनिया में आगे हैं। बड़ी कंपनियाँ तैयार माल बनाती हैं और उनके पीछे खास काम में माहिर छोटे सप्लायरों की परतें होती हैं।
उदाहरण कंपनियाँ और नीति
जाने-पहचाने नाम ये हैं: कारों में Volkswagen और BMW, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में Siemens, पार्ट्स में Bosch और केमिकल में BASF।
नीति की तरफ़ जर्मनी Industrie 4.0 के लिए जाना जाता है। इसमें फ़ैक्टरी की मशीनों और उपकरणों को नेटवर्क से जोड़कर उत्पादन को स्मार्ट बनाने की योजना है। इसे पहली बार 2011 में Hannover Messe (औद्योगिक व्यापार मेला) में पेश किया गया था।
2013 में IT, मशीनरी और इलेक्ट्रिकल की इंडस्ट्री एसोसिएशनों ने इसे आगे बढ़ाने के लिए एक साझा मंच बनाया। जर्मनी का तरीक़ा आम तौर पर ऐसा ही है: राष्ट्रीय योजना को इंडस्ट्री एसोसिएशनें उठाती हैं और फैलाती हैं।
तैयार माल का एक्सपोर्ट, और उसके पीछे की SME कंपनियाँ और इंडस्ट्री एसोसिएशनें, सब साथ चलते हैं।
जापान से रिश्ता
जापान की नज़र से जर्मनी कार और मशीनरी में सीधा मुक़ाबले वाला देश है। फ़ैक्टरी ऑटोमेशन और मशीन टूल्स में भी जापानी और जर्मन सप्लायर अक्सर एक ही ग्राहकों के पीछे होते हैं।
जापान के वित्त मंत्रालय के मुताबिक़ 2024 में जापान ने जर्मनी को 2.63 ट्रिलियन येन (करीब 17.4 बिलियन डॉलर) का माल भेजा और 3.22 ट्रिलियन येन (करीब 21.3 बिलियन डॉलर) का मँगाया। चारों देशों में सिर्फ़ जर्मनी के साथ जापान का व्यापार घाटे में है।
ख़रीद वालों के लिए: अगर आप जापानी और जर्मन मशीन टूल या ऑटोमेशन पैकेज की तुलना कर रहे हैं, तो आमतौर पर दो सप्लायर एक ही ग्राहकों के लिए मुक़ाबला कर रहे होते हैं। स्पेसिफ़िकेशन, लोकल सर्विस और lead time की आमने-सामने तुलना करना फ़ायदे का रहता है।
दक्षिण कोरिया: chaebol, मेमोरी चिप और जापानी मटीरियल
चिप से एक्सपोर्ट कैसे चलता है
2024 में दक्षिण कोरिया की GDP में मैन्युफैक्चरिंग का हिस्सा 26.6% था, जो जापान या जर्मनी से ज़्यादा है। सबसे केंद्र में सेमीकंडक्टर हैं: 2024 में चिप एक्सपोर्ट रिकॉर्ड 141.9 बिलियन डॉलर पर पहुँचा (Ministry of Trade, Industry and Energy)।
इस बढ़त के पीछे HBM (AI सर्वर में लगने वाली high-bandwidth memory) जैसे महँगे प्रोडक्ट थे। उस साल कोरिया के कुल 683.8 बिलियन डॉलर के एक्सपोर्ट का करीब पाँचवाँ हिस्सा चिप का था। इसका दूसरा पहलू यह है कि चिप की कीमतें पूरे एक्सपोर्ट का हाल बदल सकती हैं।
उदाहरण कंपनियाँ और नीति
मुख्य नाम ये हैं: सेमीकंडक्टर में Samsung Electronics और SK hynix, कारों में Hyundai Motor, बैटरी में LG Energy Solution और शिपबिल्डिंग में HD Hyundai।
मुख्य इंडस्ट्री chaebol चलाते हैं, यानी परिवारों के नियंत्रण वाले बड़े बिज़नेस ग्रुप। उनकी ताक़त यह मानी जाती है कि वे बड़ा निवेश जल्दी तय कर लेते हैं। कमज़ोरी यह है कि एक्सपोर्ट कुछ गिनी-चुनी कंपनियों और प्रोडक्ट लाइनों पर टिक जाता है।
Samsung Electronics कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माण में भी है। लेकिन अक्टूबर–दिसंबर 2025 में उसका global foundry share 7.1% था (TrendForce), जो ताइवान की TSMC से बहुत पीछे है।
जापान से रिश्ता और 2019 के एक्सपोर्ट कंट्रोल
कोरिया की चिप फ़ैक्टरियों में बहुत-सा जापानी मटीरियल और जापानी मैन्युफैक्चरिंग उपकरण इस्तेमाल होता है। 2024 में जापान ने दक्षिण कोरिया को 7.03 ट्रिलियन येन (करीब 46.4 बिलियन डॉलर) का माल भेजा, जो चारों देशों में सबसे ज़्यादा है (वित्त मंत्रालय)।
यह निर्भरता जुलाई 2019 में खुलकर सामने आई। जापान सरकार ने तीन मटीरियल के लिए दक्षिण कोरिया को एक्सपोर्ट की प्रक्रिया सख़्त कर दी: hydrogen fluoride, photoresist (सर्किट का पैटर्न छापने वाला रोशनी-संवेदी मटीरियल) और fluorinated polyimide। पहले एक्सपोर्टर एक आसान bulk license से काम चलाते थे, पर अब उन्हें हर बार individual license लेना पड़ता था।
जापान ने मार्च 2023 में समीक्षा का ऐलान किया और तीनों आइटम पहले वाली प्रक्रिया में लौट गए। जापान कोरिया को मटीरियल देने वाला अहम सप्लायर भी है और मेमोरी चिप और बैटरी में उसका प्रतिद्वंद्वी भी। जापान और कोरिया की मैन्युफैक्चरिंग का रिश्ता इसी दोहरेपन से तय होता है।
जापानी मटीरियल और उपकरण कोरिया की मेमोरी fab में जाते हैं, और वहाँ से चिप दुनिया भर के डिवाइस तक पहुँचते हैं।
मुख्य प्रवाह का सरल रूप। तीनों आइटम जापान के METI (अर्थव्यवस्था, व्यापार और उद्योग मंत्रालय) के 2019 के उपायों के दायरे में थे।
ख़रीद वालों के लिए: 2019 का मामला दिखाता है कि सप्लायर और प्रोडक्ट वही रहें, तब भी सरकार के फ़ैसले से जापानी मटीरियल की एक्सपोर्ट प्रक्रिया बदल सकती है। अगर कोई मटीरियल आपकी लाइन के लिए बहुत ज़रूरी है, तो सप्लायर से पूछें कि वह जापान के export control में किस श्रेणी में आता है।
ताइवान: foundry मॉडल और कुमामोटो में JASM

foundry मॉडल कैसे चलता है
ताइवान की मैन्युफैक्चरिंग का केंद्र सेमीकंडक्टर foundry है, यानी ऐसा कारोबार जो दूसरी कंपनियों के डिज़ाइन किए चिप बनाकर देता है। जिन fabless डिज़ाइन कंपनियों की अपनी फ़ैक्टरी नहीं होती, वे foundry को ऑर्डर देती हैं और foundry उनके लिए बड़ी मात्रा में चिप बनाता है।
foundry अपने ब्रांड के नाम से चिप नहीं बेचता, इसलिए वह कई कंपनियों से ऑर्डर ले सकता है। ग्राहकों से मुक़ाबला न करना इसकी एक वजह मानी जाती है कि इतना कॉन्ट्रैक्ट काम ताइवान आता है।
डिज़ाइन, निर्माण और back-end का काम अलग-अलग कंपनियाँ करती हैं। निर्माण के केंद्र में ताइवान है।
Share TrendForce के मुताबिक़, टॉप 10 foundry की कमाई के आधार पर।
वेफ़र को तैयार चिप बनाने वाले back-end चरणों पर अलग से बात होनी चाहिए।
उदाहरण कंपनियाँ और बढ़त
अक्टूबर–दिसंबर 2025 में TSMC का global foundry share 70.4% था, जो Samsung Electronics से बहुत आगे है (TrendForce)। ताइवान में UMC (कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माण), MediaTek (चिप डिज़ाइन) और Hon Hai Precision Industry भी हैं, जिसे Foxconn के नाम से जाना जाता है (इलेक्ट्रॉनिक्स असेंबली)।
AI की माँग ने ताइवान की पूरी अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाया। जनवरी–सितंबर 2025 में 7.15% की real GDP growth में मैन्युफैक्चरिंग ने 4.89 percentage points जोड़े (DGBAS, ताइवान की सांख्यिकी एजेंसी)।
यानी बढ़त का करीब 70% हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग से आया। कोरिया की तरह यहाँ भी अर्थव्यवस्था चिप और इलेक्ट्रॉनिक्स के उतार-चढ़ाव के साथ ऊपर-नीचे होती है।
जापान से रिश्ता
2024 में जापान का ताइवान को एक्सपोर्ट 6.87 ट्रिलियन येन (करीब 45.4 बिलियन डॉलर) रहा, जो पिछले साल से 14.2% ज़्यादा है (वित्त मंत्रालय)। मुख्य आइटम मशीनरी और इलेक्ट्रिकल उपकरण, base metals और केमिकल हैं (ताइवान का वित्त मंत्रालय, JETRO)।
अब दोनों देश मिलकर चिप भी बनाते हैं। TSMC की सहायक कंपनी JASM ने जापान के कुमामोटो प्रांत के किकुयो शहर में fab बनाई और फ़रवरी 2024 में उसका उद्घाटन समारोह हुआ। Sony Semiconductor Solutions, Denso और Toyota Motor भी उसके शेयरहोल्डर हैं।
जून 2022 में METI ने इस fab के लिए 476 बिलियन येन तक की सब्सिडी मंज़ूर की। JASM ने दिसंबर 2024 में कुमामोटो प्रांत को बताया कि 12/16 nm और 22/28 nm logic प्रोसेस पर mass production शुरू हो गया है।
यह प्रोजेक्ट ताइवान की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को जापानी ग्राहकों और मटीरियल से जोड़ता है।
ख़रीद वालों के लिए: जापानी मटीरियल और उपकरण सप्लायर कोरिया और ताइवान, दोनों की fab को बेचते हैं। ऐसे किसी सप्लायर को परखते समय पूछें कि वह पहले से किन fab और किन इलाक़ों में माल दे रहा है, और किन प्लांट से।
भारत: Make in India, PLI और जापानी ऑटो कंपनियाँ

इंडस्ट्री का ढाँचा और ताक़त
भारत की मैन्युफैक्चरिंग value added 2015 में 327.8 बिलियन डॉलर थी और 2024 में 494.1 बिलियन डॉलर हो गई, यानी करीब 1.5 गुना (World Bank)।
लेकिन GDP में इसका हिस्सा 2015 के 15.6% से घटकर 2024 में 13.1% रह गया। मैन्युफैक्चरिंग बढ़ी है, पर बाक़ी अर्थव्यवस्था जितनी तेज़ी से नहीं।
Make in India और PLI
भारत सरकार ने सितंबर 2014 में Make in India शुरू किया, ताकि देश में फ़ैक्टरियाँ आएँ। इसके मुख्य औज़ारों में Production Linked Incentive (PLI) स्कीम है, जो देश में उत्पादन या बिक्री बढ़ने के हिसाब से इंसेंटिव देती है।
PLI 14 सेक्टर पर लागू है और कुल बजट ₹1.97 लाख करोड़ का है (1.97 ट्रिलियन रुपये, भारत के PIB के इस्तेमाल किए रेट पर करीब 24 बिलियन डॉलर)। इन 14 सेक्टर में ये शामिल हैं:
- स्मार्टफ़ोन और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, टेलीकॉम उपकरण
- दवाइयाँ और उनका कच्चा माल, मेडिकल डिवाइस
- ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट, advanced बैटरी
- सोलर PV मॉड्यूल, specialty steel, white goods
- खाद्य उत्पाद, टेक्सटाइल, ड्रोन
नीचे की figure में भारत के नीतिगत क़दम और वहाँ जापानी कंपनियों के काम एक साथ रखे गए हैं।
नीति फ़ैक्टरियों को खींचती है, और जापानी कंपनियाँ कारों को केंद्र में रखकर लोकल उत्पादन बढ़ा रही हैं।
स्रोत: PIB (Press Information Bureau, भारत सरकार), World Bank, JETRO, भारत में जापान का दूतावास। भारत का वित्त वर्ष अप्रैल से मार्च चलता है।
जापान से रिश्ता
भारत की प्रमुख कार कंपनियों में Tata Motors, Mahindra & Mahindra और जापान की Suzuki की सहायक Maruti Suzuki हैं। वित्त वर्ष 2024 (अप्रैल 2024–मार्च 2025) में भारत की 43 लाख पैसेंजर कार बिक्री में Maruti Suzuki का हिस्सा 40.9% रहा, जो सबसे ऊपर है। भारत ऐसा बाज़ार है जहाँ एक जापानी कंपनी नंबर वन है।
अक्टूबर 2024 तक भारत में 1,434 जापानी कंपनियों के 5,205 बिज़नेस लोकेशन थे, और इन कंपनियों में से करीब आधी (49.4%) मैन्युफैक्चरर हैं। ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियाँ अपने कार-कंपनी ग्राहकों के पीछे-पीछे यहाँ आती रहती हैं।
2024 में जापान का भारत को एक्सपोर्ट 2.60 ट्रिलियन येन (करीब 17.2 बिलियन डॉलर) रहा। यह पिछले साल से 16.5% ज़्यादा है और चारों देशों में सबसे तेज़ बढ़त है (वित्त मंत्रालय)।
भारत में काम करने वालों के लिए: देश में 5,000 से ज़्यादा जापानी बिज़नेस लोकेशन हैं, इसलिए हो सकता है कि आपके सप्लायर का यहाँ पहले से प्लांट या दफ़्तर हो। पूछें कि कोई पार्ट यहीं बनता है या जापान या किसी तीसरे देश से आता है, क्योंकि इससे lead time, करेंसी और ड्यूटी बदल जाती है।
मुक़ाबला या साझेदारी? चारों देशों से जापान का व्यापार
जापान का हर देश से रिश्ता तीन आसान कसौटियों पर बाँटकर समझना आसान होता है:
- प्रोडक्ट का मेल: अगर दोनों तरफ़ एक ही ग्राहकों को एक ही तैयार माल बेचते हैं, तो मुक़ाबला है।
- मटीरियल और उपकरण की सप्लाई: अगर जापान दूसरे देश की फ़ैक्टरियों को मटीरियल या उपकरण देता है, तो साझेदारी है।
- लोकल बाज़ार: अगर जापानी कंपनियाँ दूसरे देश के अंदर बनाती और बेचती हैं, तो रिश्ता साझेदारी के क़रीब है।
नीचे के आँकड़े व्यापार की दिशा दिखाते हैं। डॉलर की कीमतें 2024 के औसत रेट, यानी करीब 151.5 येन प्रति डॉलर, पर मोटा-मोटा हिसाब हैं। exchange rate बदलने पर ये भी बदलेंगी।
दक्षिण कोरिया, ताइवान और भारत के साथ जापान फ़ायदे में है, और सिर्फ़ जर्मनी के साथ घाटे में।
(≈ 17.4 बिलियन डॉलर)
(≈ 46.4 बिलियन डॉलर)
(≈ 45.4 बिलियन डॉलर)
(≈ 17.2 बिलियन डॉलर)
(≈ 21.3 बिलियन डॉलर)
(≈ 31.4 बिलियन डॉलर)
(≈ 30.5 बिलियन डॉलर)
(≈ 6.4 बिलियन डॉलर)
(≈ -3.9 बिलियन डॉलर)
(≈ +15.0 बिलियन डॉलर)
(≈ +14.8 बिलियन डॉलर)
(≈ +10.8 बिलियन डॉलर)
जापान का वित्त मंत्रालय, 2024 के व्यापार आँकड़े (एक्सपोर्ट final, इंपोर्ट preliminary)। कुल आँकड़ों में सारा माल शामिल है, सिर्फ़ मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट नहीं। डॉलर की कीमतें 2024 के औसत करीब 151.5 येन/डॉलर (Federal Reserve) पर बदली गई हैं और अनुमानित हैं।
व्यापार की मात्रा से यह नहीं नापा जा सकता कि दो देश कितना मुक़ाबला करते हैं या कितना मिलकर काम करते हैं। figure को पृष्ठभूमि की तरह देखें, स्कोरकार्ड की तरह नहीं।
मिसाल के लिए, दक्षिण कोरिया को मटीरियल का एक्सपोर्ट साझेदारी है। फिर भी जापानी कंपनियाँ उन्हीं कोरियाई कंपनियों से मेमोरी और बैटरी में मुक़ाबला करती हैं। ज़्यादातर रिश्तों में दोनों बातें साथ होती हैं।
एक ही देश एक क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी और दूसरे में ग्राहक हो सकता है।
मुक़ाबलाकार और मशीनरी। दोनों दुनिया भर के एक ही ग्राहकों को एक ही तैयार माल बेचते हैं
साझेदारीपार्ट्स और मशीनरी का दो-तरफ़ा व्यापार। जापान साल में करीब 3 ट्रिलियन येन का माल मँगाता है
मुक़ाबलामेमोरी, बैटरी, शिपबिल्डिंग, जहाँ प्रोडक्ट मिलते-जुलते हैं
साझेदारीकोरियाई fab के लिए चिप मटीरियल और मैन्युफैक्चरिंग उपकरण
मुक़ाबलामेल कम है, क्योंकि foundry अपने ग्राहकों के प्रोडक्ट बनाता है
साझेदारीमटीरियल और उपकरण की सप्लाई, और कुमामोटो में साझा उत्पादन
मुक़ाबलाभारतीय बाज़ार में Tata और Mahindra जैसी लोकल कार कंपनियों से
साझेदारीलोकल उत्पादन और सप्लायर प्लांट, ऐसे बाज़ार में जो बढ़ता ही जा रहा है
वर्गीकरण ऊपर की तीन कसौटियों पर आधारित है। असल कारोबारी रिश्ते कंपनी-कंपनी में अलग होते हैं।
जापान से सोर्स करते समय इसका क्या मतलब है

मटीरियल और उपकरण: नीति के जोखिम को ध्यान में रखें
जब कोरिया और ताइवान में चिप का उत्पादन बढ़ता है, तो जापानी मटीरियल और उपकरण की माँग भी बढ़ती है। लेकिन ये प्रोडक्ट किन देशों और किन fab तक पहुँच सकते हैं, यह सरकारी नीति और export control पर भी टिका है।
जापान और कोरिया के 2019 के मामले से दिखता है कि सरकारों के आपसी रिश्ते व्यापार की प्रक्रिया बदल सकते हैं। इसलिए जापानी सप्लायरों के पास अपनी बिक्री एक ही देश में न रखने की वजह है। ख़रीदने वाले पर भी यही बात लागू होती है, यानी सप्लाई का एक ही रास्ता न रखना बेहतर है।
तैयार उपकरण: जापान और जर्मनी असली विकल्प हैं
जर्मनी बड़ी कंपनियों और खास काम वाली SME की परतों के ज़रिए एक्सपोर्ट करता है, और जापान की कुछ इंडस्ट्री का ढाँचा भी ऐसा ही है। कार, मशीन टूल्स और फ़ैक्टरी ऑटोमेशन में जापानी और जर्मन सप्लायर अक्सर एक ही ग्राहकों के लिए मुक़ाबला करते हैं।
भारत: बाज़ार भी और उत्पादन का अड्डा भी
भारत में बड़ा बाज़ार है, सरकारी इंसेंटिव हैं और जापानी कंपनियों के लोकेशन बढ़ रहे हैं। फिर भी मैन्युफैक्चरिंग अभी GDP का करीब 13% ही है, और लोकल पार्ट्स सप्लायरों और कुशल कामगारों का आधार शायद अभी बन ही रहा है।
भारत में बेचने के लिए बना प्लांट और भारत से एक्सपोर्ट करने के लिए बना प्लांट, दोनों के फ़ैसले अलग होते हैं। अपने जापानी सप्लायर से पूछें कि उसका भारतीय प्लांट इन दोनों में से किसके लिए है, फिर उसके हिसाब से योजना बनाएँ।
चेकलिस्ट: जापानी सप्लायर से पूछने वाले सवाल
जब आपकी फ़ैक्टरी में जापानी सप्लायर का कोई मटीरियल, उपकरण या ऑटो पार्ट आना हो, तो ये सवाल अपनी ख़रीद टीम या जापानी मैनेजर तक पहुँचाएँ। ख़ासकर तब जब कोरियाई, ताइवानी या जर्मन विकल्प भी साथ में देखे जा रहे हों।
- कहाँ बनता है: यह आइटम किस प्लांट में बनता है: जापान, भारत, दक्षिण-पूर्व एशिया या कहीं और? शिपिंग डॉक्यूमेंट में country of origin क्या लिखा होगा?
- Export control: क्या यह आइटम जापान के export control नियमों (Foreign Exchange and Foreign Trade Act) के तहत आता है? अगर हाँ, तो हमारे देश भेजने के लिए कौन-सा लाइसेंस चाहिए और lead time पर क्या असर होगा?
- बैकअप सप्लाई: अगर एक रास्ता रुक जाए, तो क्या दूसरा प्लांट या क्वालिफ़ाइड वैकल्पिक स्रोत है?
- पहले के ग्राहक: क्या सप्लायर यह ग्रेड पहले से कोरिया, ताइवान या भारत की fab या प्लांट को भेज रहा है? क्या वह गोपनीयता तोड़े बिना कुछ reference applications बता सकता है?
- लोकल सपोर्ट: क्या हमारे देश में उसकी लोकल कंपनी, गोदाम या सर्विस इंजीनियर है? क्वालिटी की शिकायत कौन देखेगा?
- करेंसी: कोटेशन येन में है, डॉलर में या रुपये में? exchange rate का जोखिम कौन उठाएगा, और कीमत कितने समय के लिए तय है?
- लोकल इंसेंटिव: अगर हमारा प्रोजेक्ट भारत की PLI जैसी किसी स्कीम में आता है, तो क्या इस पार्ट का भारत में बनना हमारे लिए मायने रखता है? स्कीम के नियम अपनी compliance टीम से पक्के कर लें।
अगर आप पहली बार सप्लायर को लिख रहे हैं, तो नीचे का नमूना ये सारे सवाल एक ही संदेश में रख देता है। चौकोर कोष्ठक वाली जगहों में अपनी जानकारी भरें। जापानी सप्लायर को भेजने के लिए इसे अंग्रेज़ी में बदलवा लें।
विषय: [देश] में सप्लाई के लिए [प्रोडक्ट का नाम / पार्ट नंबर] के बारे में पूछताछ
आदरणीय [नाम],
हम [कंपनी का नाम] हैं, [शहर, देश] में [मैन्युफैक्चरर / डिस्ट्रीब्यूटर]। हम [इस्तेमाल] के लिए [प्रोडक्ट का नाम / पार्ट नंबर] देख रहे हैं। अनुमानित मात्रा [महीने / साल] में [मात्रा] है और शुरुआत [महीना, साल] से होगी।
कृपया नीचे की बातें बताएँ:
- यह आइटम किस प्लांट में बनेगा, और शिपिंग डॉक्यूमेंट में country of origin क्या होगा?
- क्या यह आइटम जापान के export control के दायरे में आता है? अगर हाँ, तो [देश] भेजने के लिए कौन-सा लाइसेंस चाहिए और lead time पर उसका क्या असर होगा?
- सामान्य lead time और न्यूनतम ऑर्डर मात्रा क्या है, और क्या बैकअप उत्पादन साइट है?
- क्या [देश] में आपका दफ़्तर, डिस्ट्रीब्यूटर या सर्विस इंजीनियर हैं?
- कोटेशन किस करेंसी में होगा, और कीमत कितने समय तक मान्य रहेगी?
कृपया datasheet और जो reference applications आप बता सकें, वे भी भेज दें।
धन्यवाद,
[आपका नाम]
[पद, कंपनी, संपर्क की जानकारी]
इस तुलना की सीमाएँ
- डॉलर के आँकड़े exchange rate पर टिके हैं। येन के कमज़ोर या मज़बूत होने से असल उत्पादन बदले बिना भी रैंकिंग और इस लेख के डॉलर के आँकड़े बदल सकते हैं।
- व्यापार के कुल आँकड़ों में सारा माल शामिल है, सिर्फ़ मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट नहीं। उनसे किसी एक कंपनी की हैसियत का पता नहीं चलता।
- मुक़ाबला/साझेदारी का वर्गीकरण एक सरलीकरण है। कोई कंपनी एक प्रोडक्ट लाइन में मुक़ाबला और दूसरी में सहयोग कर सकती है।
- Export control के नियम और इंसेंटिव स्कीमें बदलती रहती हैं। भरोसा करने से पहले सप्लायर और संबंधित अधिकारियों से मौजूदा नियम जाँच लें।
- ताइवान World Bank के डेटा में नहीं है, इसलिए यहाँ उसके आकार की सीधी तुलना बाक़ी देशों से नहीं हो सकती।
सार
- 2024 में मैन्युफैक्चरिंग value added जर्मनी में 843.7 बिलियन डॉलर और जापान में 788.5 बिलियन डॉलर थी। डॉलर वाली रैंकिंग exchange rate के साथ बदलती है।
- जर्मनी की ताक़त Mittelstand के सहारे कार और मशीनरी का एक्सपोर्ट है। तैयार माल में वह जापान से मुक़ाबला करता है।
- दक्षिण कोरिया की चिप इंडस्ट्री बड़े ग्रुप चलाते हैं और वह जापानी मटीरियल और उपकरण का बड़ा ख़रीदार भी है। 2019 के export control ने दिखाया कि नीति उस सप्लाई पर कैसे असर डाल सकती है।
- ताइवान की TSMC के पास foundry बाज़ार का करीब 70% है, और अब वह कुमामोटो में जापानी साझेदारों के साथ चिप बनाती है।
- भारत नीति के ज़रिए अभी फ़ैक्टरियाँ खींच रहा है, और Maruti Suzuki के पास पैसेंजर कार बाज़ार का करीब 40% है।
- जापानी सप्लायर चुनने से पहले उत्पादन साइट, export control की स्थिति, बैकअप सप्लाई, लोकल सपोर्ट और कोटेशन की करेंसी पक्की कर लें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
foundry और fabless कंपनी में क्या फ़र्क़ है?
Fabless कंपनी चिप डिज़ाइन करती है पर उसकी अपनी फ़ैक्टरी नहीं होती। Foundry वह कंपनी है जो दूसरों के डिज़ाइन किए चिप बनाकर देती है। ताइवान की TSMC सबसे जानी-मानी foundry है, और इस बँटवारे से डिज़ाइन और निर्माण अलग-अलग कंपनियाँ संभाल सकती हैं।
Mittelstand क्या है?
Mittelstand जर्मनी में छोटी और मझोली कंपनियों (SME) का नाम है। 2024 में जर्मनी की 99.2% कंपनियाँ इसी श्रेणी में थीं। इनमें से कई किसी खास पार्ट या मशीन में दुनिया में आगे हैं, जैसे जापान की "niche-top" कंपनियाँ।
भारत में PLI का मतलब क्या है?
PLI यानी Production Linked Incentive। यह स्कीम देश में उत्पादन या बिक्री बढ़ने के हिसाब से इंसेंटिव देती है, और इसमें 14 सेक्टर के लिए बजट रखा गया है, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट और दवाइयाँ शामिल हैं।
2019 के export control में दक्षिण कोरिया के लिए जापान के कौन-से मटीरियल आए थे?
उनमें hydrogen fluoride, photoresist और fluorinated polyimide आए, जो चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले तीन मटीरियल हैं। जापान ने जुलाई 2019 से individual export license ज़रूरी किए, मार्च 2023 में समीक्षा का ऐलान किया और इन आइटम को पहले वाली प्रक्रिया में लौटा दिया।
मैन्युफैक्चरिंग में देशों की रैंकिंग हर साल क्यों बदलती है?
Value added की तुलना अमेरिकी डॉलर में होती है, इसलिए exchange rate बदलने से रैंकिंग उलट-पुलट हो सकती है। जब येन कमज़ोर होता है, तो डॉलर में जापान का आँकड़ा घट जाता है। इसलिए किसी भी रैंकिंग को उस साल के exchange rate की तस्वीर समझें।
स्रोत
- मैन्युफैक्चरिंग value added और GDP में हिस्सा: World Bank, "Manufacturing, value added (current US$)", "Manufacturing, value added (% of GDP)"
- देश के हिसाब से जापान का व्यापार: जापान का वित्त मंत्रालय, 2024 के व्यापार आँकड़े (जापानी में)
- 2024 की येन–डॉलर औसत दर: Federal Reserve via FRED, Japanese Yen to U.S. Dollar Spot Exchange Rate (annual)
- जर्मनी की एक्सपोर्ट श्रेणियाँ: Destatis, "Trading goods"
- जर्मनी की SME: IfM Bonn, "Macro-economic significance of SMEs: Germany"
- Industrie 4.0: acatech, "Industrie 4.0", DFKI, "Ten Years of INDUSTRIE 4.0"
- कोरिया का एक्सपोर्ट और चिप एक्सपोर्ट: The Korea Times, 1 जनवरी 2025 (Ministry of Trade, Industry and Energy का डेटा)
- दक्षिण कोरिया पर जापान के export control: JETRO Business News, जुलाई 2019 (जापानी में), The Korea Times, 16 मार्च 2023, Bloomberg, 23 मार्च 2023
- Foundry का बाज़ार हिस्सा: TrendForce, 12 मार्च 2026
- ताइवान की आर्थिक बढ़त और मैन्युफैक्चरिंग: Taipei Times, 12 जनवरी 2026 (DGBAS का डेटा)
- जापान–ताइवान व्यापार के आइटम: JETRO, "Taiwan: Basic Economic Indicators" (जापानी में)
- JASM के लिए सब्सिडी: METI, approved specified semiconductor production facility plans (जापानी में)
- JASM का उद्घाटन और शेयरहोल्डर: TSMC, "TSMC Celebrates the Opening of JASM in Kumamoto, Japan" (24 फ़रवरी 2024)
- JASM में mass production की शुरुआत: DIGITIMES, 27 दिसंबर 2024, TechNode, 19 दिसंबर 2024
- Make in India और PLI के 14 सेक्टर: PIB, "10 Years of Make in India", PIB, नवंबर 2024
- भारत का पैसेंजर कार बाज़ार: JETRO Area Report, 19 जून 2025 (जापानी में; SIAM डेटा)
- भारत में जापानी कंपनियाँ: भारत में जापान का दूतावास और JETRO, List of Japanese Companies in India (अक्टूबर 2024), JETRO Area Report, 10 मार्च 2026 (जापानी में)
मूल जापानी लेखयह गाइड जापान के पाठकों के लिए लिखे गए MONOSCOPE के एक लेख पर आधारित है: ドイツ・韓国・台湾・インドの製造業を比較|得意分野と日本との関係


