Ex d बनाम Ex e: जापान के एक्सप्लोज़न-प्रूफ निशान और TIIS

सोचिए, जापान से एक पंप स्किड आता है और मोटर की नेमप्लेट पर d2G4 लिखा है। उसी स्किड के दूसरे यूनिट पर Ex db IIB T4 Gb और जापानी सर्टिफ़िकेट नंबर है। या आप दूसरी तरफ़ हैं: जापानी कस्टमर को Ex eb वाला जंक्शन बॉक्स चाहिए, और आपसे कहा गया है कि आपका IECEx सर्टिफ़िकेट "जापान के लिए काफ़ी नहीं है"।
दोनों हालात में तीन बातें जाननी हैं: d और e अक्षर का मतलब क्या है, जापान में एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट का सर्टिफ़िकेशन कैसे होता है, और मशीन ख़तरे वाली जगह में लगाने से पहले क्या पूछना है।
छोटे में: इन्क्रीज़्ड सेफ्टी (Ex e) में बनावट ऐसी रखी जाती है कि इक्विपमेंट में चिंगारी या गर्म जगह बने ही नहीं। फ़्लेमप्रूफ (Ex d) में गैस डिब्बे के अंदर घुस सकती है, पर अंदर धमाका हो तो भी डिब्बा उसे अंदर ही सह लेता है और आग बाहर की गैस तक नहीं पहुँचती। उत्तरी अमेरिका के कोड जिसे "explosionproof" कहते हैं, वह इसके क़रीब है, पर बिल्कुल वही नहीं।
यह गाइड दोनों को समझाती है, जापानी और IEC निशान पढ़ना सिखाती है, और जितना हम जाँच पाए उतना ज़ोन, IECEx, ATEX और भारत की व्यवस्था से जोड़ती है। अंत में चेकलिस्ट और जापानी सप्लायर को भेजने लायक ईमेल का नमूना है।
Safety note: यह लेख सिर्फ़ बुनियादी बातें और जाँचने की चीज़ें बताता है। यह इक्विपमेंट चुनने की प्रक्रिया नहीं है। ख़तरे वाली जगह का वर्गीकरण (area classification) और इक्विपमेंट का चुनाव क्वालिफ़ाइड इंजीनियर तय करें, और सर्टिफ़िकेशन बॉडी व आपकी साइट पर लागू नियमों से पक्का करें।
विषय-सूची
- Ex d बनाम Ex e: एक नज़र में
- एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन की बुनियाद
- जापान में एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट का सर्टिफ़िकेशन कैसे होता है
- IEC Ex निशान कैसे पढ़ें
- इन्क्रीज़्ड सेफ्टी (Ex e) क्या है?
- फ़्लेमप्रूफ (Ex d) क्या है?
- Ex d बनाम Ex e: आमने-सामने तुलना
- ख़तरे वाली जगह के हिसाब से चुनाव: ज़ोन 0, 1 और 2
- जापान की व्यवस्था का IECEx, ATEX और भारत से रिश्ता
- स्पेसिफ़िकेशन और मेंटेनेंस की जाँच
- चेकलिस्ट: Ex इक्विपमेंट को जापान और अपनी साइट के बीच भेजते समय
- इस गाइड की सीमाएँ
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
- स्रोत
Ex d बनाम Ex e: एक नज़र में
दोनों किस्में उन जगहों के लिए हैं जहाँ ज्वलनशील गैस या भाप हवा में मिलकर धमाके लायक मिश्रण बना सकती है। दोनों आग लगने से रोकती हैं, पर अलग-अलग तरीक़े से। इसी फ़र्क से तय होता है कि चुनाव और मेंटेनेंस में इक्विपमेंट का कौन-सा हिस्सा ख़ास ध्यान माँगता है।
- Ex e (इन्क्रीज़्ड सेफ्टी, anzen-zo boubaku): ऐसे इक्विपमेंट के लिए जो सामान्य चलने में चिंगारी, आर्क या आग लगा सकने वाली गर्मी नहीं बनाता। पक्के कसे टर्मिनल, इन्सुलेशन की दूरी और तापमान की सीमा इसे ऐसा बनाए रखते हैं।
- Ex d (फ़्लेमप्रूफ, taiatsu boubaku): डिब्बा अंदर का धमाका सह लेता है, और उसके जोड़ बाहर निकलती गैसों को बाहर के माहौल में आग लगाने नहीं देते। स्विच के कॉन्टैक्ट जैसे हिस्से, जो सामान्य चलने में चिंगारी देते हैं, इसके अंदर रखे जा सकते हैं।
सिर्फ़ अक्षर देखकर यह तय नहीं होता कि इक्विपमेंट कहाँ लग सकता है। इसके लिए इक्विपमेंट प्रोटेक्शन लेवल (EPL), गैस ग्रुप, टेम्परेचर क्लास और जापान के लिए जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन का ब्योरा भी चाहिए। नीचे हर एक को देखेंगे।
एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन की बुनियाद
एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन का मक़सद है कि बिजली के इक्विपमेंट धमाके लायक माहौल में आग न लगा दें। जहाँ ज्वलनशील गैस या ज्वलनशील तरल की भाप हवा में मिलती है, वहाँ बिजली की चिंगारी या इक्विपमेंट की गर्म सतह आग का स्रोत बन सकती है।
ज्वलनशील चीज़ रखी होने भर से हर पल धमाके का ख़तरा नहीं होता। ख़तरा तब बनता है जब तीन बातें एक साथ हों: जलने लायक गाढ़ेपन का मिश्रण, ऑक्सीजन, और आग लगाने भर की ऊर्जा।
चित्र 1: भाप का निकलना और बिजली के इक्विपमेंट में आग का स्रोत
प्लांट दो उपाय साथ रखते हैं: हवा निकासी (ventilation) से धमाके लायक मिश्रण घटाना, और ऐसा इक्विपमेंट लगाना जो आग का स्रोत न बने।
यह गैस और भाप वाले एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन का सिर्फ़ समझाने वाला चित्र है। धमाका होगा या नहीं, यह गाढ़ेपन और आग लगाने वाली ऊर्जा पर भी निर्भर करता है।
प्लांट ख़तरा तीन तरह से घटाते हैं: हवा निकासी से गैस को पतला करना, इक्विपमेंट का तापमान सीमा में रखना, और ऐसा इक्विपमेंट इस्तेमाल करना जिसकी चिंगारी आसपास पर असर न डाल सके। Ex e और Ex d इक्विपमेंट के अपने स्तर पर आग रोकने के दो अलग तरीक़े हैं।
जापान में Ordinance on Industrial Safety and Health की धारा 280 उन जगहों की बात करती है जहाँ हवा निकासी वग़ैरह के बाद भी धमाके का ख़तरा बचा रहता है। वहाँ बुनियादी नियम यह है कि गैस की किस्म और ख़तरे के स्तर के हिसाब से एक्सप्लोज़न-प्रोटेक्टेड बनावट वाला बिजली का इक्विपमेंट लगाया जाए।
सिर्फ़ एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट ख़रीद लेने से काम पूरा नहीं होता। गैस निकलने की जगह (release source) और हवा निकासी का डिज़ाइन, इक्विपमेंट का चुनाव, और सही वायरिंग व मेंटेनेंस, ये सब एक ही प्लान का हिस्सा हैं।
गैस और भाप की ख़तरे वाली जगहों और निशानों की व्यवस्था, हवा में उड़ने वाली ज्वलनशील धूल से अलग है। यह लेख सिर्फ़ गैस और भाप के बारे में है, धूल वाले ज़ोन 20, 21, 22 के बारे में नहीं।
जापान में एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट का सर्टिफ़िकेशन कैसे होता है
जापान से बाहर के इंजीनियर सबसे ज़्यादा यहीं अटकते हैं। जापान वही IEC पर आधारित सोच इस्तेमाल करता है जो आप जानते हैं, पर उसका अपना क़ानूनी सर्टिफ़िकेशन स्टेप है। और पुराने इक्विपमेंट पर जापान का अपना निशान-सिस्टम मिलता है, जिसका अक्षर-दर-अक्षर अनुवाद नहीं हो सकता।
तकनीकी नियमों के दो सेट
जापान का क़ानूनी स्टैंडर्ड है denki kikai kigu boubaku kozo kikaku, यानी बिजली के इक्विपमेंट की एक्सप्लोज़न-प्रूफ बनावट का कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड, जो स्वास्थ्य, श्रम और कल्याण मंत्रालय (MHLW) जारी करता है। इसमें हर प्रोटेक्शन टाइप की बनावट और परफ़ॉर्मेंस तय है।
इसके साथ जापान में IEC 60079 सीरीज़ से मेल खाती तकनीकी गाइडलाइन भी हैं। इन्हें National Institute of Occupational Safety and Health, Japan (JNIOSH) छापता है। इन IEC-मेल वाली शर्तों पर जाँचे गए इक्विपमेंट पर Ex db या Ex eb जैसे IEC-स्टाइल निशान होते हैं। इसलिए एक ही जापानी प्लांट में आपको दोनों तरह के निशान मिल सकते हैं।
टाइप एग्ज़ामिनेशन और TIIS
जापान के Industrial Safety and Health Act के तहत एक्सप्लोज़न-प्रोटेक्टेड बिजली के इक्विपमेंट को जापान में इस्तेमाल से पहले keishiki kentei, यानी टाइप एग्ज़ामिनेशन पास करना होता है। इस इक्विपमेंट के लिए रजिस्टर्ड जाँच संस्था Technology Institution of Industrial Safety (TIIS) है। MHLW की एक सूची में इसका रजिस्ट्रेशन मार्च 2004 से दिखता है, और मौजूदा अवधि मार्च 2029 तक चलती है।
इक्विपमेंट एक देश से दूसरे देश जाए तो ये बातें मायने रखती हैं:
- इम्पोर्ट किए इक्विपमेंट को भी यह चाहिए। TIIS के अनुसार, किसी विदेशी संस्था ने सर्टिफ़ाई कर दिया हो तब भी जापान में इस्तेमाल से पहले जापानी जाँच पास करनी होती है।
- IECEx टेस्ट रिपोर्ट से टेस्टिंग घट सकती है, जाँच की जगह नहीं ले सकती। TIIS IECEx टेस्ट रिपोर्ट (ExTR) को पहले का टेस्ट डेटा मान सकता है, अगर वह उसी प्रोडक्ट की हो, किसी वैध IECEx सर्टिफ़िकेशन बॉडी से आई हो और उस पर IECEx पहचान नंबर हो। असली टेस्टिंग छोड़ने के लिए उसे मौजूदा जापानी गाइडलाइन पर भी खरा उतरना होगा और जापान के राष्ट्रीय अंतर (national differences) का डेटा भी देना होगा। सैंपल के तौर पर पूरा बना हुआ यूनिट फिर भी चाहिए।
- सर्टिफ़िकेट बारीक होते हैं और उनकी अवधि होती है। CML (ब्रिटेन की संस्था, जिसे MHLW ने जापानी सर्टिफ़िकेशन के लिए मान्यता दी थी) की 2017 की गाइड कहती है कि जापान टाइप, गैस ग्रुप, टेम्परेचर क्लास और Ex कोड के हर मेल के लिए अलग सर्टिफ़िकेट देता है। ATEX या IECEx में आम तौर पर पूरी प्रोडक्ट-रेंज का एक सर्टिफ़िकेट होता है। MHLW की सामग्री के अनुसार टाइप एग्ज़ामिनेशन सर्टिफ़िकेट तीन साल चलता है और फिर से जाँच कराकर रिन्यू करना पड़ता है।
- विदेशी संस्थाएँ हैं, पर मौजूदा सूची देखें। MHLW ने कुछ विदेशी संस्थाओं को जापानी सर्टिफ़िकेशन या टेस्ट डेटा के लिए मान्यता दी है (TIIS ने मार्च 2023 तक DEKRA Certification B.V. को designated foreign inspection agency बताया था)। यह मान्यता तय अवधि की होती है, इसलिए मौजूदा स्थिति MHLW या TIIS से पक्की करें।
IECEx, ATEX या उत्तरी अमेरिका का निशान और जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन का पास होना दो अलग बातें हैं। इम्पोर्ट किए इक्विपमेंट के लिए स्पेसिफ़िकेशन में जापानी सर्टिफ़िकेट नंबर और उसकी शर्तें लिखें, सिर्फ़ विदेशी सर्टिफ़िकेट का नाम काफ़ी नहीं है।
d2G4 जैसे पुराने जापानी निशान कैसे पढ़ें
जापानी कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड के हिसाब से बनी नेमप्लेट पर d2G4 जैसे छोटे कोड मिलते हैं। यहाँ d का मतलब फ़्लेमप्रूफ है, 2 bakuhatsu tokyu यानी एक्सप्लोज़न क्लास है, और G4 hakkado यानी इग्निशन क्लास है। तीनों मिलकर बताते हैं कि बनावट किस प्रोटेक्शन टाइप की है और इक्विपमेंट किन गैसों के लिए है।
G4 के 4 को नापा हुआ तापमान न समझें, और उसे IEC के टेम्परेचर क्लास T4 में न बदल दें। G जापान की इग्निशन क्लास है और T IEC की टेम्परेचर क्लास। ये दो अलग वर्गीकरण हैं, इसलिए हर एक को उसी दस्तावेज़ की टेबल से पढ़ें जो लागू है।
आम सॉल्वेंट एसीटोन से फ़र्क़ साफ़ दिखता है। जापानी वर्गीकरण के उदाहरण उसे एक्सप्लोज़न क्लास 1 और इग्निशन क्लास G1 में रखते हैं, जबकि IEC-मेल वाला सिस्टम उसे IIA और T1 में रखता है। पहले गैस का नाम देखकर उसकी क्लास निकालें, फिर देखें कि इक्विपमेंट का निशान उस गैस को कवर करता है या नहीं। दोनों सिस्टम के अक्षर मिलाकर अपना कोड कभी न बनाएँ।
इक्विपमेंट बदलते समय पुरानी नेमप्लेट का सिर्फ़ छोटा कोड ख़रीद-स्पेसिफ़िकेशन में उतार देने से शर्तें छूट जाती हैं। मॉडल, सर्टिफ़िकेट नंबर, टारगेट गैस और बिजली की सप्लाई भी लिख लें। तभी पुराने यूनिट की तुलना किसी दूसरे स्टैंडर्ड पर सर्टिफ़ाइड नए प्रोडक्ट से हो पाती है।
IEC Ex निशान कैसे पढ़ें
IEC 60079 सीरीज़ एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन की अंतरराष्ट्रीय बुनियाद है। एक आम निशान है Ex db IIB T4 Gb: Ex का मतलब एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन, db प्रोटेक्शन लेवल b वाला फ़्लेमप्रूफ, IIB गैस के लिए इक्विपमेंट ग्रुप, T4 टेम्परेचर क्लास, और Gb इक्विपमेंट प्रोटेक्शन लेवल।
चित्र 2: Ex निशान को अलग-अलग हिस्सों में पढ़ें: प्रोटेक्शन टाइप, गैस, तापमान और प्रोटेक्शन लेवल
यह समझाने के लिए एक उदाहरण है। सिर्फ़ d या e अक्षर देखकर इंस्टॉलेशन की जगह तय न करें।
निशान
लेवल db
इक्विपमेंट ग्रुप
135°C तक
प्रोटेक्शन लेवल
आसपास का तापमान (ambient), इस्तेमाल की ख़ास शर्तें और जापानी जाँच का ब्योरा अलग से देखें। Ex d IIB T5 जैसे पुराने निशान उस स्टैंडर्ड के संस्करण के हिसाब से पढ़े जाते हैं जिस पर इक्विपमेंट सर्टिफ़ाई हुआ था।
Group I खदानों के लिए है जहाँ मीथेन जैसी गैस (firedamp) का ख़तरा होता है। Group II बाक़ी सब धमाके वाले गैस माहौल के लिए है। IIA, IIB और IIC यह दिखाते हैं कि गैस में आग कितनी आसानी से लगती है और लौ पतले गैप से कैसे आगे बढ़ती है। ये गैस के गाढ़ेपन को नहीं बताते। हाइड्रोजन और एसिटिलीन IIC में आते हैं, और IIC वाला इक्विपमेंट IIA और IIB को भी कवर करता है।
T1 से T6 तक टेम्परेचर क्लास की ऊपरी सीमा 450, 300, 200, 135, 100 और 85°C है। नंबर जितना बड़ा, इक्विपमेंट की सतह का अधिकतम तापमान उतना कम। तब उसे कम आग-पकड़ने वाले तापमान (ignition temperature) की गैसों के लिए भी सोचा जा सकता है।
मिसाल के लिए T4 का इक्विपमेंट देखते समय उसकी 135°C की सीमा को गैस के ignition temperature से मिलाएँ। साथ ही आसपास के तापमान की रेंज भी पढ़ें, और गर्मियों का मौसम तथा पास के गर्म इक्विपमेंट की गर्मी भी गिनें।
सर्टिफ़िकेट नंबर के बाद या सर्टिफ़िकेट पर X हो तो इस्तेमाल की ख़ास शर्तें लागू होती हैं। इन शर्तों को, जैसे इंस्टॉल करने का तरीक़ा और आसपास के तापमान की सीमा, इंस्टॉलेशन स्पेसिफ़िकेशन में भी उतारें। सिर्फ़ नेमप्लेट पढ़ लेना जाँच का अंत नहीं है।
इन्क्रीज़्ड सेफ्टी (Ex e) क्या है?
इन्क्रीज़्ड सेफ्टी उस इक्विपमेंट पर लगती है जो सामान्य चलने में चिंगारी, आर्क या आग लगा सकने वाली गर्मी नहीं बनाता। जापान के टेक्नीशियन इसे छोटे में "anmashi" कहते हैं, और यह टर्मिनल बॉक्स और मोटर पर दिखता है।
ढीले न होने वाले टर्मिनल, काफ़ी इन्सुलेशन दूरी और तापमान बढ़ने की सीमा, इन सबसे आग का स्रोत बनना मुश्किल हो जाता है। सिर्फ़ मज़बूत डिब्बा और गैस्केट लगाने से इक्विपमेंट Ex e नहीं बन जाता। जापानी कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड इन्क्रीज़्ड सेफ्टी को ऐसे देखता है कि जो हिस्से सामान्य चलने में आग का स्रोत नहीं हैं, उनकी सुरक्षा और बढ़ाई जाए। इसमें इन्सुलेशन परफ़ॉर्मेंस, तापमान का बढ़ना और बाहर से टूट-फूट से बचाव शामिल हैं।
चित्र 3: Ex e टर्मिनल बॉक्स कनेक्शन, इन्सुलेशन और तापमान से आग रोकता है
डिज़ाइन में टर्मिनल ढीले नहीं पड़ते और इन्सुलेशन बिगड़ता नहीं, इसलिए चिंगारी और एक जगह की ज़्यादा गर्मी की गुंजाइश कम रहती है।
यह सिर्फ़ नमूना क्रॉस-सेक्शन है: भूरा कंडक्टर है, हल्का नीला इन्सुलेशन और स्लेटी केबल की बाहरी परत। केबल अपनी बाहरी परत समेत ग्लैंड से गुज़रता है, खुले कंडक्टर धातु की दीवार को नहीं छूते। यह बनाने का ड्रॉइंग या वायरिंग का निर्देश नहीं है। इन्क्रीज़्ड सेफ्टी इस बात पर टिकी नहीं है कि गैस पूरी तरह बाहर रहे।
टर्मिनल पर कॉन्टैक्ट ख़राब हो तो कॉन्टैक्ट रेज़िस्टेंस बढ़ता है और वहाँ की जगह अकेले गर्म हो सकती है। इन्सुलेशन की दूरी कम हो या सतह गंदी हो तो डिस्चार्ज हो सकता है। ये दिक़्क़तें आम टर्मिनल ब्लॉक में भी होती हैं।
Ex e इक्विपमेंट इन ख़तरों को पूरे यूनिट के डिज़ाइन और पार्ट्स से क़ाबू में रखता है। इंस्टॉल करने के बाद टर्मिनल ब्लॉक किसी दूसरे मॉडल से बदलना पड़े तो ऐसा पार्ट चुनें जो मूल प्रोटेक्शन को बनाए रखे।
IEC-मेल वाले नियमों में इन्क्रीज़्ड सेफ्टी के दो प्रोटेक्शन लेवल हैं: eb और ec। eb, EPL Gb से और ec, EPL Gc से मेल खाता है। इसलिए नाम से "इन्क्रीज़्ड सेफ्टी" होने का मतलब यह नहीं कि सब इक्विपमेंट एक ही जगहों के लिए मंज़ूर हैं।
Ex e मोटर को मेल खाता प्रोटेक्शन डिवाइस चाहिए
मोटर के लिए सामान्य चलने में कॉन्टैक्ट की चिंगारी न होना सिर्फ़ आधी बात है। लोड से बनने वाली गर्मी भी क़ाबू में रहनी चाहिए। मिसाल के लिए Oriental Motor के इन्क्रीज़्ड-सेफ्टी मोटर के कैटलॉग में कहा गया है कि प्रोटेक्शन डिवाइस locked-rotor current (रोटर जाम होने पर बहने वाली करंट) और locked-rotor की अनुमत अवधि से मेल खाता हो।
ठंडी हवा का रास्ता बंद हो, या आसपास का तापमान रेटेड रेंज से ऊपर चला जाए, तो भी मोटर अपनी चुनाव की शर्तों से बाहर चली जाती है। रिप्लेसमेंट मोटर का आउटपुट और स्पीड वही हों, तब भी उसका Ex निशान और चलाने की शर्तें अलग से मिलाएँ।
मोटर और प्रोटेक्शन डिवाइस अलग-अलग ख़रीदे जाएँ तो प्रोटेक्शन की सेटिंग दोनों के स्पेसिफ़िकेशन में लिखें। सिर्फ़ रेटेड करंट से न चुनें। मंज़ूर चलने की शर्तों में स्टार्ट होते समय और locked-rotor हालत में तापमान का बढ़ना भी शामिल है।
ओवरलोड प्रोटेक्शन ट्रिप हो जाए तो सिर्फ़ रीसेट दबाकर फिर चला देना ख़तरनाक है। देखें कि लोड की तरफ़ कुछ फँसा तो नहीं, मशीन जाम तो नहीं, या कूलिंग में दिक़्क़त तो नहीं। तापमान बढ़ने की वजह हटाकर ही दोबारा चलाएँ।
फ़्लेमप्रूफ (Ex d) क्या है?
फ़्लेमप्रूफ डिब्बे में गैस अंदर आ सकती है, और अंदर धमाका हो तो डिब्बा उसे बाहर के मिश्रण में आग लगाने नहीं देता। इसमें धमाके का दबाव सहने की मज़बूती और लौ को बाहर निकलने से रोकने वाले जोड़ साथ काम करते हैं।
सिर्फ़ मोटा धातु का डिब्बा इक्विपमेंट को Ex d नहीं बना देता। अंदर से बाहर जाने वाला हर रास्ता गिना जाता है: ढक्कन और बॉडी का जोड़, शाफ़्ट के छेद और केबल एंट्री।
चित्र 4: फ़्लेमप्रूफ डिब्बा दबाव सहता है और लौ को बाहर नहीं जाने देता
हर जोड़ का गैप और लंबाई लौ को बाहर निकलने से रोकते हैं। यह सिर्फ़ एयरटाइट होने से नहीं समझाया जा सकता।
सपाट जोड़ का गैप समझाने के लिए बढ़ाकर बनाया गया है। नीला आड़ा तीर जोड़ की पूरी लंबाई है, दाईं तरफ़ का खड़ा तीर गैप है, और भूरा तीर अंदर से बाहर जाती गर्म जली हुई गैसों का रास्ता है। असली अनुमत माप इक्विपमेंट ग्रुप, बनावट और सर्टिफ़िकेशन पर निर्भर करते हैं। इस चित्र से माप नहीं लिए जा सकते।
फ़्लेमप्रूफ डिज़ाइन में जोड़ से निकलने वाली गर्म जली हुई गैसें आसपास के मिश्रण में आग नहीं लगा पाएँ, यही असली शर्त है। जोड़ की लंबाई और गैप डिब्बे और टारगेट गैस के हिसाब से तय होते हैं, और निर्माता के डिज़ाइन व टेस्टिंग से जाँचे जाते हैं।
जोड़ की सतह पर खरोंच लगाना, कसने वाले बोल्ट कम कर देना, या दूसरा ढक्कन लगा देना, ये सब सुरक्षा बिगाड़ते हैं। पार्ट देखने में एक जैसे हों तब भी सिर्फ़ मंज़ूर कॉम्बिनेशन ही इस्तेमाल करें और कसने की तय शर्तें मानें।
मेंटेनेंस में ढक्कन खोलें तो जोड़ की सतह पर जंग, गंदगी और ख़राब हुए थ्रेड देखें। खरोंच को साइट पर घिसकर ठीक करने या गैप भरने के लिए कुछ जोड़ने की कोशिश न करें। मरम्मत निर्माता की मरम्मत-शर्तों के हिसाब से ही हो।
सामान्य चलने में कॉन्टैक्ट खोलने-बंद करने वाले स्विच फ़्लेमप्रूफ डिब्बे से बचाए जाने वाले इक्विपमेंट की आम मिसाल हैं। कॉन्टैक्ट का तंत्र आम लिमिट स्विच जैसा हो सकता है, पर आम इस्तेमाल का यूनिट वैसे का वैसा ख़तरे वाली जगह में नहीं लगाया जा सकता।
दो ग़लतफ़हमियों से बचें। पहली, Ex d का मतलब यह नहीं कि अंदर गैस कभी जा ही नहीं सकती। दूसरी, जापानी स्पेसिफ़िकेशन में taiatsu boubaku (फ़्लेमप्रूफ) और taiatsu shiyo अलग हैं; taiatsu shiyo का मतलब है पाइप के प्रोसेस प्रेशर के लिए रेटेड। दोनों शब्द "taiatsu" ("दबाव सहने वाला") से शुरू होते हैं, इसलिए पूरा शब्द पढ़ें।
Ex d बनाम Ex e: आमने-सामने तुलना
असली फ़र्क़ यह है कि डिज़ाइन आग के स्रोत को बनने से रोकता है, या अंदर के धमाके को बाहर पहुँचने से। वज़न या दाम से दोनों को अलग करने पर ग़लत चुनाव होता है, ख़ासकर मिले-जुले डिज़ाइन और छोटे डिवाइस में।
| बात | इन्क्रीज़्ड सेफ्टी | फ़्लेमप्रूफ |
|---|---|---|
| मुख्य कोड | e (IEC-मेल वाले में: eb, ec) | d (आम तौर पर db) |
| आग कैसे रोकता है | कनेक्शन, इन्सुलेशन और तापमान की सुरक्षा बढ़ाकर | अंदर का धमाका सहकर और उसे बाहर आग लगाने से रोककर |
| किस पर लगता है | उन हिस्सों पर जो सामान्य चलने में चिंगारी या आग लगाने लायक गर्मी नहीं बनाते | कॉन्टैक्ट जैसे आग के स्रोत भी अंदर रखे जा सकते हैं |
| मेंटेनेंस में ख़ास ध्यान | टर्मिनल, इन्सुलेशन, तापमान, सुरक्षा की बनावट | डिब्बा, जोड़, फ़ास्टनर, केबल एंट्री |
| कहाँ लग सकता है | eb/Gb और ec/Gc में फ़र्क़ करें; जापानी कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड वाला इक्विपमेंट अलग से देखें | प्रोटेक्शन लेवल (जैसे db/Gb) और सर्टिफ़िकेट का ब्योरा देखें |
| दाम और वज़न | बनावट, मटीरियल और स्पेसिफ़िकेशन पर निर्भर | डिब्बे और जोड़ की मशीनिंग से दाम और वज़न पर असर पड़ता है |
यह न मान लें कि Ex e हमेशा सस्ता होता है। दाम इक्विपमेंट की किस्म, क्षमता, मटीरियल और सर्टिफ़िकेशन के दायरे पर निर्भर करता है। पहले जगह, गैस और तापमान के हिसाब से लायक इक्विपमेंट छाँटें, फिर उनमें इक्विपमेंट, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस का ख़र्च मिलाएँ।
एक ही इक्विपमेंट में दोनों मिले हो सकते हैं। टर्मिनल वाला हिस्सा इन्क्रीज़्ड सेफ्टी का और चिंगारी देने वाले कॉन्टैक्ट फ़्लेमप्रूफ हिस्से में हो सकते हैं, ताकि हर हिस्से को उसके मिज़ाज के हिसाब से सुरक्षा मिले।
मिसाल के लिए IDEC का एक कंट्रोल स्टेशन है जिस पर Ex db eb IIC T6 Gb लिखा है, यानी फ़्लेमप्रूफ और इन्क्रीज़्ड सेफ्टी का मिला-जुला डिज़ाइन। एक नेमप्लेट पर d और e दोनों दिखना ग़लती नहीं है, इसका मतलब है कि इक्विपमेंट एक से ज़्यादा प्रोटेक्शन टाइप से बना है।
IP रेटिंग (पानी और धूल से बचाव) को एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन के कोड से अलग रखें। पानी न घुसने वाला आम डिब्बा चिंगारी, गर्म सतह या अंदर के धमाके का इलाज नहीं करता।
कंट्रोल सिग्नल एक ही हो, तब भी वायरिंग का तरीक़ा और प्रोटेक्शन टाइप अलग-अलग तय होते हैं।
ख़तरे वाली जगह के हिसाब से चुनाव: ज़ोन 0, 1 और 2
चुनाव प्रोटेक्शन टाइप के नाम से नहीं, उस जगह के हैज़र्डस एरिया वर्गीकरण से शुरू होता है जहाँ इक्विपमेंट लगना है। गैस या भाप कितनी बार और कितनी देर धमाके लायक माहौल बनाती है, इसके आधार पर जगह को ज़ोन 0, 1 या 2 में रखा जाता है।
जापानी दस्तावेज़ों में tokubetsu kiken kasho (ख़ास ख़तरे वाली जगह), dai-1-rui kiken kasho (क्लास 1 ख़तरे वाली जगह) और dai-2-rui kiken kasho (क्लास 2 ख़तरे वाली जगह) शब्द भी आते हैं। फ़ैक्ट्री में आप 0-shu, 1-shu और 2-shu सुनेंगे। इन्हें ज़ोन 0, 1, 2 से जोड़कर पढ़ें, और अपने प्रोजेक्ट के स्टैंडर्ड की शब्दावली इस्तेमाल करें।
ज़ोन 0
ज़ोन 0 में धमाके लायक माहौल लगातार, लंबे समय तक या बार-बार रहता है। ज्वलनशील तरल वाले बर्तन में तरल की सतह के ऊपर की जगह इसकी आम मिसाल है, पर असली वर्गीकरण चलाने की शर्तों पर भी निर्भर करता है।
सिर्फ़ यह कहने से कि टैंक "ज्वलनशील चीज़ से भरा है", पता नहीं चलता कि माहौल धमाके लायक है या नहीं। असली बात यह है कि जहाँ इक्विपमेंट रखा है, वहाँ भाप और हवा का मिश्रण कैसा है।
नियम के तौर पर ज़ोन 0 का इक्विपमेंट EPL Ga पर चुना जाता है। intrinsic safety का लेवल ia इसकी आम मिसाल है, पर एक प्रोटेक्शन टाइप का नाम रटने से ज़्यादा भरोसेमंद है पूरे इक्विपमेंट का प्रोटेक्शन लेवल पढ़ना।
Intrinsic safety में ऊर्जा सीमित रखी जाती है, ताकि तय सामान्य और ख़राबी वाली हालतों में चिंगारी और गर्मी आग न लगा सके। सिर्फ़ कम वोल्टेज से कोई आम सेंसर या इंस्ट्रुमेंट लूप intrinsically safe नहीं बन जाता।
ज़ोन 1
ज़ोन 1 में सामान्य चलने के दौरान कभी-कभार धमाके लायक माहौल बनने की संभावना रहती है। ज्वलनशील भाप छोड़ने वाले खुले मुँह के आसपास की जगहें इसमें आ सकती हैं। दायरा गैस छूटने की बारंबारता और हवा निकासी से तय होता है।
IEC-मेल वाले निशान में Gb इक्विपमेंट, जिनमें फ़्लेमप्रूफ db और इन्क्रीज़्ड सेफ्टी eb आते हैं, चुनाव के लायक हैं। हर Ex e इक्विपमेंट को सिर्फ़ ज़ोन 2 का मान लेने से Gb इक्विपमेंट और मिले-जुले डिज़ाइन ग़लत संभल जाते हैं।
जापान के कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड की धारा 2 भी क्लास 1 ख़तरे वाली जगह में इस्तेमाल होने वाली बनावटों में इन्क्रीज़्ड सेफ्टी को गिनती है। फिर भी कुछ जापानी निर्माताओं के चुनाव-उदाहरणों में इन्क्रीज़्ड-सेफ्टी लाइट ज़ोन 1 में नहीं ली जाती।
नियम में लिखी सूची और हर डिवाइस की चुनाव-शर्तों को अलग रखें। फ़ैसला इक्विपमेंट की किस्म, आपके प्रोजेक्ट के स्टैंडर्ड और जापानी सर्टिफ़िकेट के ब्योरे पर करें। "ज़ोन 1 मतलब सिर्फ़ फ़्लेमप्रूफ" और "e वाला कोई भी इक्विपमेंट ज़ोन 1 में चलेगा", दोनों में से कोई नियम सही नहीं है।
मिसाल के लिए ज़ोन 1 में टर्मिनल बॉक्स बदलना हो तो बॉक्स की अपनी Gb उपयुक्तता और उससे जुड़े इक्विपमेंट की शर्तें अलग-अलग जाँचें। बॉक्स उपयुक्त है, इसका मतलब यह नहीं कि उसमें कोई भी रिले जोड़ा जा सकता है।
ज़ोन 2
ज़ोन 2 में सामान्य चलने में धमाके लायक माहौल बनने की संभावना नहीं होती, और बने भी तो थोड़ी देर ही रहता है। लीकेज और हवा निकासी की ख़राबी भी गिनें। सिर्फ़ सामान्य हालत देखकर आम इक्विपमेंट न चुनें।
IEC-मेल वाले निशान में Gc इक्विपमेंट चुनाव के लायक है, और ऊँचे लेवल के Gb और Ga इक्विपमेंट भी सोचे जा सकते हैं। इन्क्रीज़्ड सेफ्टी ec और non-sparking जैसी किस्में भी विकल्प हैं, पर गैस ग्रुप और टेम्परेचर क्लास का मेल फिर भी ज़रूरी है।
चित्र 5: ख़तरे वाली जगह गैस छूटने की जगह और हवा निकासी से तय होती है; EPL उसी से मिलाए जाते हैं
बर्तन के अंदर और उसके खुले मुँह के बाहर धमाके लायक माहौल बनने की शर्तें अलग होती हैं।
| जगह | नियम के तौर पर EPL | इस लेख में दिए उदाहरण |
|---|---|---|
| ज़ोन 0 | Ga | Intrinsic safety ia आदि |
| ज़ोन 1 | Ga, Gb | फ़्लेमप्रूफ db, इन्क्रीज़्ड सेफ्टी eb आदि |
| ज़ोन 2 | Ga, Gb, Gc | ऊपर के सब, और इन्क्रीज़्ड सेफ्टी ec आदि |
यह सिर्फ़ जगहों का आपसी रिश्ता दिखाने वाला चित्र है। इन आकारों या दूरियों को असली प्लांट पर लागू न करें। असली ख़तरे वाली जगह गैस छूटने की शर्तों, मटीरियल के गुणों और हवा निकासी पर निर्भर है, और जापानी सर्टिफ़िकेट की शर्तें भी जाँचनी होती हैं।
एक ही कमरे में गैस छूटने की जगह के पास और उससे दूर की जगहें अलग-अलग ज़ोन में आ सकती हैं। गैस का भारीपन, छूटने की दिशा, हवा निकासी, और गड्ढों या रुकावटों में गैस का जमा होना, ये सब दायरे पर असर डालते हैं।
टैंक, सिलिंडर या दरवाज़े जैसे इक्विपमेंट के नाम देखकर आप मशीनी ढंग से ज़ोन नहीं बाँट सकते। इक्विपमेंट की जगह और ऊँचाई को ख़तरे वाली जगह के वर्गीकरण ड्रॉइंग पर रखकर देखें, और सीमा के पास की और कनेक्शन की जगहें ध्यान से पढ़ें।
जापान की व्यवस्था का IECEx, ATEX और भारत से रिश्ता
जापान के IEC-मेल वाले नियम IEC 60079 पर चलते हैं, इसलिए ज़ोन और EPL की सोच IECEx और ATEX से मेल खाती है। सर्टिफ़िकेट मेल नहीं खाते। हर बाज़ार का अपना क़ानूनी स्वीकृति-स्टेप है, और अमेरिका का एरिया वर्गीकरण भी अलग तरह का है।
| ज़ोन (IEC / जापान) | EPL (IEC 60079) | ATEX इक्विपमेंट कैटेगरी (EU) |
|---|---|---|
| ज़ोन 0 | Ga | 1G |
| ज़ोन 1 | Gb | 2G |
| ज़ोन 2 | Gc | 3G |
अमेरिका के NEC में Class/Division वाला सिस्टम भी चलता है, जिसमें ज़ोन-सिस्टम के लिए इक्विपमेंट पर AEx लिखा होता है। यह ज़ोन से सीधा बराबर नहीं है। मोटे तौर पर Division 1 में ज़ोन 0 और 1 आते हैं और Division 2 ज़ोन 2 के क़रीब है। यह सिर्फ़ अंदाज़ा है। अमेरिकी प्रोजेक्ट हो तो मौजूदा NEC संस्करण और वहाँ की अथॉरिटी (AHJ) से पक्का करें।
भारत की तरफ़ से कुछ बातें। हमारी जानकारी के मुताबिक़ भारत में IEC 60079 पर आधारित IS/IEC 60079 सीरीज़ BIS के पास है, पर कौन-सा पार्ट और कौन-सा संस्करण आपकी साइट पर लागू है, यह BIS या अपने सप्लायर से देखें। पेट्रोलियम से जुड़ी जगहों पर PESO (Petroleum and Explosives Safety Organisation) Petroleum Rules, 2002 के तहत Ex इक्विपमेंट के अप्रूवल जारी करता है। आपकी साइट पर इसकी ज़रूरत है या नहीं, यह साइट से पक्का करें।
सुरक्षा के क़ानून में Factories Act 1948 में धमाके वाली या ज्वलनशील धूल, गैस वग़ैरह से बचाव की धारा है (अपनी कंपनी के EHS या लीगल से सटीक धारा और शब्द देखें)। 2020 का OSH Code भी इसी तरह की बातें समेटता है, पर राज्य-वार उसका लागू होना हम तय नहीं कर रहे। इसके लिए अपनी कंपनी के EHS या HR से पूछें।
व्यवहार में इसका मतलब यह है:
- जापानी इक्विपमेंट विदेश (जैसे भारत) जा रहा हो: जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन सर्टिफ़िकेट जापान की क़ानूनी मंज़ूरी है। यह न मानें कि उसे IECEx, ATEX या भारत की मंज़ूरी की तरह माना जाएगा। पूछें कि क्या उसी मॉडल के पास वह सर्टिफ़िकेशन भी है जो आपके देश में माँगा जाता है। भारत में PESO की ज़रूरत है या नहीं, यह साइट से पक्का करें।
- विदेशी इक्विपमेंट जापान जा रहा हो: IECEx या ATEX सर्टिफ़िकेशन से जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन की ज़रूरत ख़त्म नहीं होती। ऊपर बताई शर्तों पर IECEx टेस्ट रिपोर्ट टेस्ट डेटा के तौर पर काम आ सकती है।
- पुराने जापानी कोड: d2G4 जैसे निशान का IEC में अक्षर-दर-अक्षर कोई सीधा बराबर नहीं है। ख़ुद बदलने के बजाय निर्माता से पूछें कि आज की भाषा में इक्विपमेंट किन गैस ग्रुप और टेम्परेचर क्लास के लिए सर्टिफ़ाइड है।
स्पेसिफ़िकेशन और मेंटेनेंस की जाँच

सबसे पहले ख़तरे वाली जगह के वर्गीकरण में इस्तेमाल हुई गैस और चलाने की शर्तें स्पेसिफ़िकेशन में उतारें। बाद में कोई दूसरा सॉल्वेंट इस्तेमाल करना हो तो change management के स्तर पर देखें कि वही ज़ोन और टेम्परेचर क्लास अब भी चलती है या नहीं।
कोटेशन की तुलना करते समय हर निर्माता को एक ही ज़रूरतें दें। एक कोटेशन में जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन हो और दूसरे में सिर्फ़ विदेशी सर्टिफ़िकेशन, तो दाम के फ़र्क़ से यह पता नहीं चलता कि कौन-सा डिज़ाइन बेहतर है।
इक्विपमेंट की ऊँचाई बदलें, या कोई घेरा लगाकर हवा का बहाव बदल दें, तो फिर से वर्गीकरण ड्रॉइंग से मिलाएँ। सिर्फ़ लेआउट नहीं बदलता, छूटी हुई गैस के बहने या जमा होने का रास्ता भी बदल जाता है।
केबल ग्लैंड और इस्तेमाल न होने वाली एंट्री के ब्लैंकिंग प्लग भी सर्टिफ़ाइड असेंबली का हिस्सा हैं, सिर्फ़ इंस्ट्रुमेंट की बॉडी नहीं। थ्रेड मिलता है, यह सोचकर आम पार्ट लगा देने से मंज़ूर कॉम्बिनेशन टूट जाता है। इसलिए पार्ट का मॉडल नंबर तक मिलाएँ।
Intrinsically safe इंस्ट्रुमेंटेशन में फ़ील्ड इंस्ट्रुमेंट, उससे जुड़ा safety barrier और केबल, तीनों को एक सर्किट मानकर जाँचें। आम सिग्नल आइसोलेटर और एक्सप्लोज़न प्रोटेक्शन के लिए ऊर्जा सीमित करने को एक न समझें।
शील्ड की अर्थिंग और प्रोटेक्टिव अर्थिंग का मक़सद अलग है, इसलिए दोनों का डिज़ाइन अलग रखें। Ex सर्किट में इन कनेक्शनों के लिए इक्विपमेंट की इंस्टॉलेशन-शर्तें मानें।
मेंटेनेंस के समय निशान और असली मॉडल लिखें, साथ में डिब्बे की टूट-फूट और ग़ायब पार्ट भी दर्ज करें। जाँच के बिंदु प्रोटेक्शन टाइप के हिसाब से तय करें: Ex e के लिए टर्मिनल और तापमान, Ex d के लिए जोड़ और फ़ास्टनर।
टर्मिनल बॉक्स खोलने से पहले बिजली अलग करें, जमा हुई ऊर्जा (stored energy) संभालें और पक्का करें कि गैस का माहौल सुरक्षित है। इसे अपनी साइट की Ex वर्क प्रक्रिया में LOTO (Lockout/Tagout: ताला और टैग) के साथ शामिल करें।
बदलने के पार्ट चुनते समय सिर्फ़ ख़रीद का दाम न देखें। पार्ट मिलने में कितना समय लगता है और जाँच व बदलने के लिए मशीन कितनी देर बंद रखनी पड़ती है, यह भी तुलना में लें। टाइम-आधारित और कंडीशन-आधारित मेंटेनेंस की सोच जाँच के रिकॉर्ड बनाने में मदद करती है।
हैंडओवर के काग़ज़ात में सर्टिफ़िकेट, इंस्ट्रक्शन मैनुअल और पार्ट्स के मंज़ूर दायरे को साथ रखें। मॉडल और सर्टिफ़िकेट नंबर इक्विपमेंट रजिस्टर में दर्ज कर दें, तो सालों बाद भी चुनाव की शर्तें ढूँढी जा सकती हैं। वर्गीकरण ड्रॉइंग, स्पेसिफ़िकेशन और हर नेमप्लेट के आपसी जुड़ाव भी रखें। तब आगे अपग्रेड या पार्ट बदलते समय हर चुनाव की वजह आगे तक पहुँचती है।
चेकलिस्ट: Ex इक्विपमेंट को जापान और अपनी साइट के बीच भेजते समय
जब जापानी इक्विपमेंट आपके पास आए, जापानी प्लांट के लिए इक्विपमेंट का स्पेसिफ़िकेशन बने, या पुराना यूनिट बदलना हो, तब यह सूची काम आएगी।
- जगह और ख़तरे वाली जगह का वर्गीकरण (ज़ोन), और इसमें शामिल गैसें
- प्रोटेक्शन टाइप, इक्विपमेंट ग्रुप, टेम्परेचर क्लास और EPL
- जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन सर्टिफ़िकेट नंबर, मंज़ूर मॉडल और इस्तेमाल की ख़ास शर्तें (X)
- सर्टिफ़िकेट की वैधता की तारीख़ें (जापानी सर्टिफ़िकेट तीन साल चलते हैं)
- जिस देश में इक्विपमेंट लगेगा उसका सर्टिफ़िकेशन (IECEx, ATEX, NEC/AEx लिस्टिंग, PESO या कोई और स्थानीय मंज़ूरी)
- आसपास के तापमान की रेंज, बिजली की सप्लाई, लोड और प्रोटेक्शन डिवाइस की सेटिंग
- केबल एंट्री, ग्लैंड, ब्लैंकिंग प्लग, अर्थिंग और मेंटेनेंस का तरीक़ा
- पुराने जापानी निशान (जैसे d2G4) के लिए: निर्माता का बयान कि IEC में गैस ग्रुप और टेम्परेचर क्लास का बराबर क्या है, अगर कोई है
जापानी सप्लायर से पूछने के सवाल
- यह इक्विपमेंट किस स्टैंडर्ड पर सर्टिफ़ाइड है: जापानी कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड पर या IEC-मेल वाली गाइडलाइन पर?
- जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन सर्टिफ़िकेट का नंबर क्या है, और वह कब ख़त्म होता है?
- क्या सर्टिफ़िकेट में इस्तेमाल की ख़ास शर्तें (X) हैं? कृपया अंग्रेज़ी में भेजें।
- क्या इस मॉडल के पास IECEx, ATEX या कोई और सर्टिफ़िकेशन भी है? सर्टिफ़िकेट नंबर भेजें।
- क्या केबल ग्लैंड और ब्लैंकिंग प्लग सर्टिफ़ाइड असेंबली में शामिल हैं? उनके मॉडल नंबर क्या हैं?
- मोटर के लिए: कौन-सा प्रोटेक्शन डिवाइस और कौन-सी सेटिंग चाहिए (locked-rotor current और locked-rotor की अनुमत अवधि)?
ईमेल का नमूना
जापानी सप्लायर आम तौर पर अंग्रेज़ी में जवाब देते हैं, इसलिए नीचे का नमूना अंग्रेज़ी में है। [ ] वाली जगहों में अपनी जानकारी भरें।
Subject: Ex certification details for [equipment / model]
Dear [Name],
We plan to install [model] in a [Zone 1 / Zone 2] area at our [country] site. The gases involved are [gas names]. Before we finalize the order, please send the following:
1. The Ex marking and the Japanese type examination certificate number, with its expiry date
2. Any specific conditions of use (X) in English
3. Any IECEx, ATEX, or other certificates for the same model
4. Model numbers of the cable glands and blanking plugs in the certified assembly
5. For motors, the required protection device and settings
Our final selection will be confirmed by our engineering team and the local authority.
Best regards,
[Your name]
इस गाइड की सीमाएँ
- यह सिर्फ़ गैस और भाप के बारे में है, ज्वलनशील धूल के बारे में नहीं।
- सर्टिफ़िकेशन के नियम, मान्यता प्राप्त संस्थाएँ और कोड के संस्करण बदलते रहते हैं। TIIS, विदेशी संस्थाओं और NEC की बातें लिखते समय की नीचे दी सूची पर आधारित हैं। मौजूदा स्थिति पक्की करें।
- भारतीय स्टैंडर्ड (IS/IEC 60079), PESO और Factories Act की बातें हमारी जानकारी और सीमित स्रोतों पर आधारित हैं। इन्हें BIS, PESO और अपनी कंपनी के EHS से ज़रूर मिलाएँ।
- ज़ोन और Division का मेल सिर्फ़ मोटा अंदाज़ा है, बराबरी नहीं।
- किसी ज़ोन में कोई प्रोटेक्शन टाइप चलेगा या नहीं, यह आपकी कंपनी या प्रोजेक्ट के स्टैंडर्ड पर भी निर्भर है, जो नियमों से ज़्यादा सख़्त हो सकते हैं।
- ख़तरे वाली जगह का वर्गीकरण और इक्विपमेंट का चुनाव क्वालिफ़ाइड इंजीनियर, सर्टिफ़िकेशन बॉडी और स्थानीय अथॉरिटी तय करें। यहाँ लिखी कोई बात उनकी जगह नहीं लेती।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
क्या इन्क्रीज़्ड-सेफ्टी (Ex e) इक्विपमेंट ज़ोन 1 में लग सकता है?
eb निशान और EPL Gb वाला इक्विपमेंट ज़ोन 1 के विकल्पों में से एक है। इसे जापान के कंस्ट्रक्शन स्टैंडर्ड वाले e इक्विपमेंट जैसा न मानें। फ़ैसला इक्विपमेंट की किस्म, सर्टिफ़िकेट के ब्योरे और आपकी साइट के स्टैंडर्ड पर करें।
क्या फ़्लेमप्रूफ (Ex d) डिब्बे में कोई भी डिवाइस रखा जा सकता है?
नहीं। अंदर के डिवाइस की गर्मी, डिब्बे की कोई भी मशीनिंग, और टर्मिनल या केबल एंट्री में बदलाव, सब सुरक्षा पर असर डालते हैं। इसलिए सर्टिफ़ाइड मॉडल और मंज़ूर कॉन्फ़िगरेशन बनाए रखना होता है।
क्या IECEx सर्टिफ़िकेट से इक्विपमेंट जापान में चल सकता है?
नहीं। जापान में इस्तेमाल से पहले इक्विपमेंट को जापानी टाइप एग्ज़ामिनेशन पास करना होता है। IECEx टेस्ट रिपोर्ट (ExTR) टेस्ट डेटा के तौर पर दी जा सकती है, और TIIS की शर्तें पूरी हों तो टेस्टिंग घट सकती है।
क्या T4 का मतलब है कि इक्विपमेंट 135°C आसपास के तापमान पर चल सकता है?
नहीं। T4 इक्विपमेंट की सतह के अधिकतम तापमान की क्लास है, आसपास के तापमान की ऊपरी सीमा नहीं। आसपास का तापमान अलग रेटिंग है, और बाहर की गर्मी समेत इंस्टॉलेशन उसकी सीमा में रहना चाहिए।
क्या एक्सप्लोज़न-प्रूफ इक्विपमेंट हाइड्रोजन के लिए ठीक है?
तभी, जब वह सही इक्विपमेंट ग्रुप और शर्तों के लिए सर्टिफ़ाइड हो। हाइड्रोजन IIC में आती है। गैस और तापमान की शर्तें सर्टिफ़िकेट और निर्माता के स्पेसिफ़िकेशन से मिलाएँ।
स्रोत
- MHLW, construction standard for explosion-protected electrical equipment (जापानी में): प्रोटेक्शन टाइप की परिभाषाएँ, इग्निशन क्लास
- MHLW, Ordinance on Industrial Safety and Health, Article 280 (जापानी में): धमाके के ख़तरे वाली जगहों में बिजली का इक्विपमेंट
- JNIOSH, technical guideline for explosion-protected electrical installations, Part 1: General (जापानी में): निशान, EPL, टेम्परेचर क्लास
- JNIOSH, Part 5: Increased safety (जापानी में): eb, ec और बनावट की शर्तें
- JNIOSH, Part 2: Flameproof enclosures (जापानी में): डिब्बे और जोड़
- JNIOSH, user's guide to explosion-protected plant equipment (जापानी में): ख़तरे वाली जगहें, EPL, एसीटोन का वर्गीकरण
- TIIS, designated foreign inspection agency system and FAQ (जापानी में): इम्पोर्ट इक्विपमेंट का टाइप एग्ज़ामिनेशन, IECEx ExTR का इस्तेमाल
- MHLW, list of registered type examination bodies (जापानी में)
- MHLW, response on type examination certificate validity (जापानी में): तीन साल की वैधता और रिन्यूअल
- CML, Ex Equipment Certification Guide for Japan (2017): हर वैरिएंट के लिए सर्टिफ़िकेट
- IAEI Magazine, "Comparison of Division and Zone Systems": Division बनाम Zone, AEx निशान
- WEG, guide to explosive atmospheres: गैस ग्रुप, टेम्परेचर क्लास, ATEX कैटेगरी
- Panasonic, explosion-protected lighting (जापानी में): ख़तरे वाली जगह के हिसाब से लाइट का चुनाव
- Oriental Motor, increased-safety motor catalog (जापानी में): locked-rotor हालत के लिए प्रोटेक्शन डिवाइस
- IDEC, EC2B control station (जापानी में): फ़्लेमप्रूफ और इन्क्रीज़्ड सेफ्टी का मिला-जुला डिज़ाइन
- Example PESO approval under the Petroleum Rules, 2002 (Endress+Hauser)
मूल जापानी लेखयह गाइड जापान के पाठकों के लिए लिखे गए MONOSCOPE के एक लेख पर आधारित है: 安全増防爆と耐圧防爆の違いとは?e・dの記号と危険場所別の選び方


