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202626/10

Purchase Specification क्या है: आइटम, जाँच, टेम्पलेट

ड्रॉइंग और स्पेसिफिकेशनअपडेट: 26/10/202658 मिनट में पढ़ें

मान लीजिए आप सप्लायर कंपनी में काम करते हैं और किसी जापानी EPC कंपनी का RFQ (कोटेशन की माँग) आया है। साथ में 40 पेज का kobai shiyosho है, उसका अपना रिवीज़न नंबर वाला कॉमन स्पेसिफ़िकेशन है, और रेफ़रेंस ड्रॉइंग की लिस्ट है। या आप गुरुग्राम, मानेसर या नीमराना के किसी जापानी प्लांट में हैं, और हेड ऑफ़िस ने कहा है कि कंपनी के टेम्पलेट से लोकल पंप वेंडर को purchase specification भेजो।

दोनों हालात में दो बातें जाननी पड़ती हैं: यह दस्तावेज़ किस काम के लिए है, और दोनों तरफ़ से क्या जाँचना है।

Purchase specification (kobai shiyosho, इसे konyu shiyosho भी कहते हैं) खरीदने वाले (buyer) का लिखा हुआ दस्तावेज़ है। इसमें लिखा होता है कि मशीन को क्या करना है और उसके साथ क्या-क्या आना है: परफ़ॉर्मेंस, बनावट, स्कोप ऑफ़ सप्लाई, इंस्पेक्शन, और सप्लायर को कौन-से दस्तावेज़ जमा करने हैं। सप्लायर इसी के आधार पर कोटेशन देता है, और ऑर्डर के बाद डिज़ाइन और मैन्युफ़ैक्चरिंग का आधार भी यही बनता है। अच्छा स्पेक सिर्फ़ मॉडल चुनने में मदद नहीं करता। उससे सब कोटेशन एक ही शर्तों पर मिलाए जा सकते हैं, और डिलीवरी के दिन तय हो जाता है कि मशीन पास है या नहीं।

इस गाइड में एक काल्पनिक सर्कुलेटिंग पंप P-101 के उदाहरण से स्पेक का मक़सद, उसमें लिखने के आइटम, और खरीदार व सप्लायर दोनों की जाँचें समझाई गई हैं। आख़िर में requirement register, deviation list का फ़ॉर्मेट और जापानी पक्ष को भेजने लायक सवाल दिए हैं।

विषय-सूची
  1. Purchase Specification (Kobai Shiyosho) क्या है?
  2. Purchase Specification किस काम आता है
  3. क्या-क्या लिखें: Purchase Specification चेकलिस्ट
  4. जब आपको Purchase Specification मिले (सप्लायर की तरफ़)
  5. जब आप Purchase Specification लिखें (खरीदार की तरफ़)
  6. माँग से इंस्पेक्शन और बदलाव के नियंत्रण तक
  7. टेम्पलेट: Requirement Register, Deviation List और सवाल
  8. यह गाइड कहाँ लागू नहीं होती
  9. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
  10. स्रोत (Sources)

Purchase Specification (Kobai Shiyosho) क्या है?

फ़्लो, टेम्परेचर और प्रेशर जैसी बेसिक शर्तों के अलावा स्पेक में यह भी लिखा जाता है कि मशीन किस तरह इस्तेमाल होगी। मटीरियल, लागू स्टैंडर्ड, लगाने की जगह का माहौल, पेंट, इंसुलेशन, एक्सेसरी, स्पेयर पार्ट, इंस्पेक्शन और वारंटी भी जुड़ें, तो सप्लायर के पास अपना तकनीकी फ़ैसला लेने की पूरी बुनियाद होती है।

सिर्फ़ "कूलिंग वॉटर के लिए एक पंप" लिख देना काफ़ी नहीं है। इससे पता नहीं चलता कि कितना फ़्लो, कितना हेड, लिक्विड का टेम्परेचर, बिजली सप्लाई और कनेक्शन साइज़ क्या चाहिए। जब खरीदार सर्विस और ऑपरेटिंग शर्तें नंबर और ड्रॉइंग में देता है, तभी सप्लायर सही मॉडल और ज़रूरी एक्सेसरी चुन पाता है।

कई जापानी कंपनियों में डिज़ाइन विभाग स्पेक लिखता है और पर्चेज़ विभाग उसे RFQ के साथ बाहर भेजता है। यह बँटवारा हर संगठन में अलग होता है। भेजने से पहले ऑपरेशन, मेंटेनेंस, क्वालिटी और सेफ्टी वाले भी अपनी माँगें जोड़ते हैं।

कई मशीनों पर एक-जैसी लगने वाली माँगें अक्सर कॉमन स्पेसिफ़िकेशन (common specification) में रखी जाती हैं, और हर मशीन की अपनी शर्तें इंडिविजुअल स्पेसिफ़िकेशन (individual specification) में। मुख्य दस्तावेज़ में हर रेफ़रेंस ड्रॉइंग और स्टैंडर्ड का नंबर और रिवीज़न लिखा होना चाहिए, ताकि सप्लायर को पता रहे कि उसे कौन-से दस्तावेज़ पढ़ने हैं। जापान का भूमि, अवसंरचना, परिवहन और पर्यटन मंत्रालय (MLIT) अपने मैकेनिकल वर्क्स के कॉमन स्पेसिफ़िकेशन में यही तरीका अपनाता है: कॉमन माँगें, प्रोजेक्ट की ख़ास माँगें और कॉन्ट्रैक्ट ड्रॉइंग अलग रखता है। सरकारी काम के स्पेक प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट पर अपने-आप लागू नहीं होते। कॉन्ट्रैक्ट में उन्हें अपनाने की बात लिखनी पड़ती है।

अगर सप्लायर कोई माँग जैसी लिखी है वैसी पूरी नहीं कर सकता, तो वह आइटम, वजह और विकल्प लिखकर देता है। ये अपवाद डेविएशन लिस्ट (deviation list) में जाते हैं। जापान में इसे कभी-कभी debikura भी कहते हैं। इससे स्पेक से हर फ़र्क़ ऑर्डर से पहले सामने आ जाता है।

Purchase, Quotation और Delivery Specification में फ़र्क़

Purchase specification खरीदार की माँग है। Quotation specification (mitsumori shiyosho) सप्लायर का प्रस्ताव है, यानी वह जो मशीन ऑफ़र कर रहा है उसका स्पेक। कोटेशन में कीमत और व्यापारिक शर्तें होती हैं, और quotation specification बताता है कि उस कीमत में सप्लायर असल में क्या देगा।

ऑर्डर के बाद डिलीवरी स्पेसिफ़िकेशन (nonyu shiyosho) और अप्रूवल ड्रॉइंग (shonin-zu) में साइज़, इंटरफ़ेस और बनावट पक्के होते हैं। ज़रूरी अप्रूवल मिलने के बाद मैन्युफ़ैक्चरिंग, इंस्पेक्शन और डिलीवरी होती है। दस्तावेज़ों के नाम और जमा करने का समय कंपनी-कंपनी अलग होता है, इसलिए document submission list में लिखें कि कौन-सा दस्तावेज़ किस अप्रूवल स्टेज पर कब देना है। ऑर्डर के बाद वाले हिस्से के लिए डिलीवरी स्पेसिफ़िकेशन और अप्रूवल ड्रॉइंग पर हमारी गाइड देखें।

चित्र 1: एक माँग, तीन स्पेसिफ़िकेशन में कैसे आगे बढ़ती है

पंप P-101 के लिए ड्यूटी पॉइंट, स्कोप ऑफ़ सप्लाई और इंटरफ़ेस हर स्टेज पर अलग-अलग जाँचे जाते हैं, जब तक स्पेक तय न हो जाए।

खरीदार की माँगसप्लायर का जवाबतय हुई बातेंखरीद स्पेक20 m³/h, 30 m हेडमटीरियल, एक्सेसरीटेस्ट, दस्तावेज़कोटेशन स्पेकमॉडल, परफ़ॉर्मेंसस्कोप, डेविएशनकीमत, लीड टाइमडिलीवरी स्पेक, ड्रॉइंगतय मॉडलसाइज़, कनेक्शनतय टेस्ट शर्तेंकोटेशन का प्रस्ताव, मंज़ूर स्पेक नहीं होता

20 m³/h और 30 m मानी हुई वैल्यू हैं, जो दस्तावेज़ों का आपसी मिलान समझाने के लिए ली गई हैं। शेड्यूल की बारीकियाँ और मैन्युफ़ैक्चरिंग शुरू करने की शर्तें हर प्रोजेक्ट के कॉन्ट्रैक्ट और अप्रूवल प्रक्रिया से तय होती हैं।

सब सप्लायर को एक ही purchase specification भेजने का मतलब यह नहीं कि सारे कोटेशन एक ही आधार पर हैं। हर सप्लायर का स्टैंडर्ड स्कोप और एक्सक्लूज़न पढ़ें। मिलान करते समय तीन चीज़ें अलग रखें: आपने क्या माँगा, उसने क्या प्रस्ताव दिया, और आख़िर में क्या तय हुआ।

Purchase Specification किस काम आता है

यह स्पेक मशीन की माँगों को आगे हर स्टेज तक पहुँचाता है, ताकि कोटेशन, डिज़ाइन, मैन्युफ़ैक्चरिंग, ऑपरेशन और मेंटेनेंस सब एक ही माँगों पर चलें। इसके पाँच काम हैं।

कोटेशन एक ही आधार पर मिलाना

कई सप्लायर से कोटेशन लें तो जिन शर्तों पर मिलान हो रहा है, वे एक-जैसी होनी चाहिए। बेस प्राइस कम हो, फिर भी अगर ज़रूरी इंस्ट्रूमेंट या टेस्ट "एक्स्ट्रा" में आएँ, तो कुल खर्च ज़्यादा बैठ सकता है।

सबको एक ही रिवीज़न का वही स्पेक भेजें और पूरे ज़रूरी स्कोप का कोटेशन माँगें। पहले तकनीकी मेल (compliance) देखें। फिर एक्सेसरी, ट्रांसपोर्ट, witness test (खरीदार की मौजूदगी में टेस्ट), इंस्टॉलेशन सुपरविज़न जैसे खर्च एक ही कॉलम में लाइन-दर-लाइन मिलाएँ।

चित्र 2: बेस प्राइस नहीं, एक ही स्कोप की तुलना करें

माँगें पूरी करने के लिए ज़रूरी खर्च जोड़ने पर रैंकिंग पलट सकती है।

काल्पनिक उदाहरण, टैक्स छोड़करसप्लायर Aसप्लायर B
बेस मशीन¥900,000¥1,000,000
ज़रूरी एक्सेसरी (एक्स्ट्रा)¥150,000बेस प्राइस में शामिल
साइट तक डिलीवरी¥50,000¥50,000
एक ही स्कोप का कुल¥1,100,000¥1,050,000

ये बाज़ार के भाव या असली प्रोडक्ट नहीं हैं। चलाने का खर्च, परफ़ॉर्मेंस, पुराना रिकॉर्ड, सर्विस सपोर्ट और लीड टाइम कुल रकम से अलग परखे जाते हैं।

एक ही स्कोप पर तुलना (चित्र 2)
सप्लायर A = 900,000 + 150,000 + 50,000 = ¥1,100,000
सप्लायर B = 1,000,000 + 0 + 50,000 = ¥1,050,000
सारी रकम काल्पनिक हैं और टैक्स के बिना हैं। सप्लायर B ने एक्सेसरी बेस प्राइस में शामिल की है, इसलिए उसका एक्स्ट्रा 0 है।

तुलना के बीच में कोई शर्त बदलें तो बदलाव सब बिडर को एक ही रूप में भेजें। अगर नई शर्त सिर्फ़ एक सप्लायर ने कोट की है, तो कोई नहीं बता पाएगा कि उसका एक्स्ट्रा खर्च किस चीज़ का है, या तुलना की कीमतें किस आधार पर हैं। तकनीकी स्कोप बराबर करने का काम और कीमत पर मोलभाव अलग-अलग रखें।

अलग-अलग मशीनों में एकरूपता (Standardization)

प्लांट में कई सप्लायर की मशीनें पाइपिंग और वायरिंग से जुड़ती हैं। अगर हर यूनिट में कनेक्शन स्टैंडर्ड और चलाने का तरीका अलग हो, तो साइट पर जोड़ने, चलाने और मेंटेनेंस, तीनों में अतिरिक्त मेहनत लगती है।

पेंट सिस्टम, इंस्ट्रूमेंट सिग्नल और स्पेयर पार्ट की नीति जैसी चीज़ें एक-जैसी रखें तो पूरे प्लांट को संभालना आसान होता है। इसका मतलब यह नहीं कि हर यूनिट पर एक ही लुब्रिकेंट या मटीरियल थोप दिया जाए। हर यूनिट को अपनी ज़रूरत की परफ़ॉर्मेंस चाहिए, और उसे निर्माता की इजाज़त वाली सीमा में रहना होगा।

जो आइटम एक-जैसे रखने हैं और जो हर मॉडल के हिसाब से चुने जाएँगे, उन्हें अलग रखें। इससे माँगें समझना आसान होता है। सिर्फ़ "हमारे कंपनी स्टैंडर्ड के अनुसार" न लिखें। वह स्टैंडर्ड ही सप्लायर को दें, ताकि वह उसे पढ़ सके।

पुरानी गड़बड़ियों से सीख जोड़ना

पुरानी खराबियों और छूटी हुई चीज़ों को माँग बना दें तो वही गड़बड़ी दोबारा कम होती है। मान लीजिए किसी बदलने वाले पार्ट को कभी निकाला नहीं जा सका। तब वह तजुर्बा इंस्पेक्शन ओपनिंग, पार्ट बाहर खींचने की जगह (withdrawal space) और यूनिट के आसपास काम करने की जगह की माँग बन जाता है।

"मेंटेनेंस आसान होना चाहिए" जैसी लाइन सप्लायर को डिज़ाइन के लिए कुछ ठोस नहीं देती। लिखें कि क्या निकालना है, कहाँ से, और किस दिशा में। यही बात ड्रॉइंग रिव्यू की चेकलिस्ट में भी डालें।

माँग जितनी जल्दी बताई जाए, मैन्युफ़ैक्चरिंग के बाद दोबारा काम (rework) से बचना उतना आसान होता है। फिर भी किसी सुधार में लगने वाला मटीरियल, डिज़ाइन बदलाव और इंस्पेक्शन का खर्च कोट में आता है। यह मत मान लीजिए कि जल्दी बताने से सप्लायर वह मुफ़्त कर देगा।

स्कोप और ज़िम्मेदारी तय करना (Shosho)

Shosho यानी ज़िम्मेदारी का दायरा: कौन किस आइटम का डिज़ाइन, निर्माण, खरीद और इंस्टॉलेशन करेगा। मशीन के साथ-साथ पाइपिंग, वायरिंग, फ़ाउंडेशन और एक्सेसरी के कनेक्शन पॉइंट भी तय कर दें, तो दोहरा ऑर्डर और छूटी हुई चीज़ें पकड़ना आसान हो जाता है।

पंप के उदाहरण में सक्शन और डिस्चार्ज फ़्लैंज की फ़ेस, मोटर का टर्मिनल बॉक्स, और बेसप्लेट व फ़ाउंडेशन की सीमा, ये सब अलग-अलग आइटम की तरह लिखें। छोटी चीज़ों की ज़िम्मेदारी भी तय करें: कम्पैनियन फ़्लैंज (companion flange, जिसे mating flange भी कहते हैं), गैसकेट, बोल्ट और एंकर बोल्ट। कम्पैनियन फ़्लैंज और उसे कौन देगा, यह हमारी अलग गाइड में विस्तार से है।

चित्र 3: P-101 का स्कोप हर कनेक्शन पॉइंट पर बाँटें

पाइपिंग, बिजली और फ़ाउंडेशन अलग-अलग इंटरफ़ेस हैं। मशीन के चारों ओर डिब्बा बना देने से एक्सेसरी किसकी है, यह तय नहीं होता।

सक्शन की सीमाडिस्चार्ज की सीमाबिजली सप्लाई की तरफ़टर्मिनल बॉक्सपंपकॉमन बेसप्लेटफ़ाउंडेशन और इंस्टॉलेशन का दायरा अलग लिखेंफ़ाउंडेशन की तरफ़डॉटेड लाइन: सीमा का उदाहरण

यह उस केस का उदाहरण है जिसमें पंप, मोटर और बेसप्लेट सप्लायर के स्कोप में हैं। डॉटेड लाइनें हर इंटरफ़ेस पर स्कोप की सीमा दिखाती हैं। कम्पैनियन फ़्लैंज, फ़ास्नर, वायरिंग और फ़ाउंडेशन scope-of-supply टेबल में तय किए जाते हैं।

दो पार्ट इंटरफ़ेस पर जुड़ेंगे या नहीं, यह सिर्फ़ नॉमिनल साइज़ और प्रेशर क्लास पर नहीं टिका। फ़ेसिंग और बोल्ट-होल पैटर्न भी मायने रखते हैं। भारत में अक्सर ASME/ANSI फ़्लैंज चलते हैं, जबकि जापानी JIS फ़्लैंज का पैटर्न अलग हो सकता है, इसलिए नंबर और स्टैंडर्ड लिखकर सप्लायर से पक्का कर लें। JIS, ASME (ANSI) और JPI फ़्लैंज का फ़र्क़ अलग गाइड में समझाया गया है।

मीटिंग में जो ज़िम्मेदारी बँटे, उसे स्कोप टेबल या ड्रॉइंग में भी डालें। कोई आइटम सिर्फ़ एक पक्ष की ज़िम्मेदारी लिस्ट में न रहे। हर सीमा के दोनों तरफ़ के लोगों को वही पॉइंट एक-जैसा दिखना चाहिए।

ग़लतफ़हमी से बचना

हो सकता है खरीदार किसी चीज़ को स्टैंडर्ड एक्सेसरी माने, जबकि सप्लायर उसे ऑप्शन गिने। स्पेक में हर ज़रूरी आइटम का नाम साफ़ लिखें, और कोटेशन के स्कोप ऑफ़ सप्लाई में वह है या नहीं, यह आइटम-दर-आइटम मिलाएँ।

"स्टैंडर्ड आइटम, पूरा सेट" या "ज़रूरी सब कुछ शामिल" जैसे शब्दों का मतलब हर किसी के लिए अलग होता है, क्योंकि स्टैंडर्ड की समझ हर पक्ष की अपनी है। मात्रा, मॉडल, किससे जुड़ेगा और साइट का काम कौन करेगा, यह लिखें। तब छूटी चीज़ें और जोड़ी गई शर्तें ऑर्डर से पहले ही सुलझ जाती हैं।

एक ही माँग कई दस्तावेज़ों में कॉपी करने से अपडेट छूटने का ख़तरा भी रहता है। इक्विपमेंट नंबर और रिक्वायरमेंट नंबर एक-जैसे रखें, ताकि हर माँग को स्पेक, स्कोप टेबल, ड्रॉइंग और सवालों के जवाबों में ढूँढा जा सके।

उदाहरण के लिए, रिक्वायरमेंट नंबर P-101-07 एक ही आइटम को दें: कम्पैनियन फ़्लैंज का स्कोप ऑफ़ सप्लाई। सप्लायर के जवाब, डेविएशन के फ़ैसले और फ़ाइनल ड्रॉइंग की उसी फ़ील्ड में यही नंबर लगाएँ, तो सहमति तक का रास्ता दिख जाता है। जवाब में "शामिल" लिखा हो, तब भी मात्रा, मटीरियल और कौन-से फ़ास्नर शामिल हैं, यह पक्का करें। अगर जवाब वाला कॉलम और कोटेशन की आइटम-वार लिस्ट आपस में न मिलें, तो ऑर्डर की शर्तें पक्की करने से पहले तय करें कि कौन-सा मान्य होगा।

क्या-क्या लिखें: Purchase Specification चेकलिस्ट

कौन-से आइटम लिखने हैं, यह मशीन और उसके इस्तेमाल पर निर्भर करता है। नीचे की श्रेणियों से शुरू करें, और साथ ही तय करें कि कौन-सा दस्तावेज़ या टेस्ट यह दिखाएगा कि हर माँग पूरी हुई। इससे स्पेक जारी होने के बाद सवाल कम आते हैं।

चित्र 4: हर माँग के साथ वह सबूत जोड़ें जो आप जाँचेंगे

क्या लिखना है, और उसके साथ यह कि compliance तय करने के लिए आप क्या देखेंगे।

श्रेणीक्या लिखेंजाँचने का सबूत (उदाहरण)
स्कोप और ज़िम्मेदारीइक्विपमेंट नंबर, संख्या, एक्सेसरी, साइट का काम और सीमाएँScope-of-supply टेबल, इंटरफ़ेस ड्रॉइंग
डिज़ाइन और ऑपरेटिंग शर्तेंलिक्विड, टेम्परेचर, प्रेशर, फ़्लो, माहौल, बिजली सप्लाईDatasheet, परफ़ॉर्मेंस कर्व
कानून और स्टैंडर्डकिस पर लागू, स्टैंडर्ड नंबर और edition, आवेदन कौन करेगालागू होने की लिस्ट, जमा करने का प्लान
मटीरियल और बनावटलिक्विड से छूने वाले पार्ट, जोड़, दीवार की मोटाई, corrosion allowanceमटीरियल सर्टिफ़िकेट, कंस्ट्रक्शन ड्रॉइंग
एक्सेसरी और स्पेयर पार्टआइटम का नाम, काम, मात्रा, कब दिया जाएगाआइटम-वार सप्लाई लिस्ट
पेंट और इंसुलेशनपेंट सिस्टम, रंग, इंसुलेशन मटीरियल, मोटाई, कहाँ तकप्रोसीजर, काम के रिकॉर्ड
इंस्पेक्शन और टेस्टआइटम, तरीका, पास होने की शर्त, witness, रिकॉर्डइंस्पेक्शन प्रोसीजर, टेस्ट रिपोर्ट
जमा करने के दस्तावेज़किस्म, आख़िरी तारीख़, फ़ॉर्मेट, कितनी कॉपी, अप्रूवल की श्रेणीदस्तावेज़ लिस्ट, जमा करने का लॉग
डिलीवरी और सपोर्टपैकिंग, ट्रांसपोर्ट, इंस्टॉलेशन, कमीशनिंग सपोर्ट, वारंटीप्लान, कॉन्ट्रैक्ट की शर्तें

ये उदाहरण हैं, इन्हें हर प्रोजेक्ट के हिसाब से ढालें। किसी दूसरी यूनिट के टेम्पलेट से गैर-ज़रूरी इंस्पेक्शन या स्टैंडर्ड कॉपी न करें।

टेम्परेचर और प्रेशर के लिए नॉर्मल ऑपरेटिंग, अधिकतम और न्यूनतम, और डिज़ाइन वैल्यू अलग-अलग लिखें। यह भी लिखें कि प्रेशर gauge है या absolute, टेम्परेचर आसपास की हवा का है या प्रोसेस लिक्विड का, और फ़्लो किस ऑपरेटिंग हालत का है। इन परिभाषाओं से चयन का आधार साफ़ हो जाता है।

सिर्फ़ लिक्विड का नाम काफ़ी नहीं है। कंसंट्रेशन, डेंसिटी, विस्कॉसिटी, ठोस कण या दूसरी मिलावट, और corrosiveness, सब मॉडल के चयन पर असर डालते हैं। अगर पानी के लिए बनी मशीन से कोई दूसरा लिक्विड चलाना है, तो मटीरियल, ज़रूरी पावर और सील व बेयरिंग की उपयुक्तता अलग-अलग सवाल मानकर जाँचें।

कौन-से कानून लागू होंगे, यह मशीन की किस्म और उसके लगने की जगह पर निर्भर करता है। जापान में लगने वाली मशीन पर मशीन के प्रकार के अनुसार जापानी कानून लग सकते हैं, जैसे Industrial Safety and Health Act और Ordinance on Safety of Boilers and Pressure Vessels, High Pressure Gas Safety Act, और Electricity Business Act। भारत की फ़ैक्टरी में लगने वाली मशीन पर आम तौर पर Factories Act 1948 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code 2020 (OSH Code) के नियम देखे जाते हैं। प्रेशर वाली चीज़ों पर pressure vessel और boiler के अलग नियम भी आ सकते हैं। कौन-सा नियम आपकी फ़ैक्टरी पर और आपके राज्य में किस रूप में लागू है, यह यहाँ नहीं बताया गया। इसे कंपनी के EHS या legal विभाग से पक्का करें।

मशीन और सुविधा किस श्रेणी में आती है, यह तय करें। हर आवेदन, इंस्पेक्शन और ज़रूरी दस्तावेज़ उस पक्ष को सौंपें जिसकी वह ज़िम्मेदारी है, और नतीजा स्पेक में दर्ज करें।

कानून की माँगों को उन स्टैंडर्ड (JIS, IS या कोई और) से अलग रखें जिन्हें कॉन्ट्रैक्ट में अपनाया गया है। सिर्फ़ "सभी लागू कानून और स्टैंडर्ड के अनुसार" लिखकर न रुकें। हर एक की लिस्ट बनाएँ: वह किस पर लागू है, कौन-सा edition है, और कौन-से पॉइंट जाँचने हैं। BIS के IS स्टैंडर्ड और जापानी JIS का मिलता-जुलता होना मानकर न चलें। जिस स्टैंडर्ड का नाम लें, उसका नंबर और edition लिखें, और फ़र्क़ सप्लायर से पूछ लें।

स्पेयर पार्ट में सिर्फ़ "एक साल का सप्लाई" लिखने से यह तय नहीं होता कि कितने घंटे चलेगा और कितने समय में पार्ट बदलेंगे। कमीशनिंग के स्पेयर, नियमित बदलने वाले पार्ट और खराबी के समय के critical स्पेयर अलग करें। हर एक का आइटम नाम, मात्रा, स्टोरेज शर्त और डिलीवरी का समय जाँचें।

यह भी लिखें कि कॉमन स्पेसिफ़िकेशन और इंडिविजुअल स्पेसिफ़िकेशन में टकराव हो तो कौन-सा दस्तावेज़ मान्य होगा। MLIT के प्रकाशित स्पेक में प्राथमिकता का क्रम और गड़बड़ी जाँचने की प्रक्रिया दी गई है। प्राइवेट प्रोजेक्ट में भी अपना दस्तावेज़-क्रम लिख देना काम आता है। इक्विपमेंट के कनेक्शन और कंट्रोल दिखाने वाली रेफ़रेंस ड्रॉइंग साथ लगाएँ, और मक़सद के हिसाब से सही ड्रॉइंग इस्तेमाल करें, ताकि पाइपिंग की सीमा और सिग्नल ग़लत न पढ़े जाएँ।

जब आपको Purchase Specification मिले (सप्लायर की तरफ़)

सप्लायर के तौर पर आप माँगों को अपने प्रोडक्ट और अपनी निर्माण क्षमता से मिलाते हैं। तकनीकी compliance, कीमत पर असर, डिलीवरी और जमा किए जाने वाले दस्तावेज़ अलग-अलग सवाल मानकर जाँचें। इससे जवाब में कुछ छूटने की संभावना कम रहती है।

पहचानें कि आपकी मशीन पर क्या लागू है

सबसे पहले देखें कि पूरा सेट मिला है या नहीं: स्पेक और हर अटैचमेंट। सिर्फ़ कॉमन स्पेक से आपकी यूनिट का टेम्परेचर या संख्या पता नहीं चलती। इसलिए दस्तावेज़ नंबर, रिवीज़न, पेज की गिनती और अटैचमेंट लिस्ट मिलाएँ।

फिर हर क्लॉज़ को "लागू", "लागू नहीं" या "सवाल बाक़ी" में बाँटें। पूरे प्लांट के लिए लिखे कॉमन स्पेक में ऐसे क्लॉज़ होंगे जो आपकी मशीन पर नहीं लगते। उन्हें खाली न छोड़ें। लिखें कि "लागू नहीं" क्यों माना।

फ़ैसला सिर्फ़ सेल्स वाले पर न छोड़ें। माँगें डिज़ाइन, मैन्युफ़ैक्चरिंग, इंस्पेक्शन और सर्विस विभाग को भेजें। मटीरियल सर्टिफ़िकेट, witness test और साइट सपोर्ट में से हर एक के लिए संबंधित विभाग पक्का करे कि वह कैसे होगा और कितने मैन-आवर लगेंगे।

अगर खरीदार का शेड्यूल आपके स्टैंडर्ड शेड्यूल से अलग है, तो देखें कि अप्रूवल का इंतज़ार मैन्युफ़ैक्चरिंग पर कैसे असर डालेगा। ज़रूरी इनपुट डेटा और जवाब की आख़िरी तारीख़ पहले ही पूछ लें, तो अपने कोटेशन की मान्यताएँ साफ़ लिख सकेंगे। जापानी खरीदार इंक्वायरी का चरण कैसे चलाते हैं, इसके लिए जापानी निर्माता को RFQ और hikiai प्रक्रिया वाली गाइड देखें।

तय करें कि आप क्या पूरा कर सकते हैं

हर लागू माँग पर अपना जवाब एक श्रेणी में रखें: स्टैंडर्ड में पूरा, एक्स्ट्रा खर्च पर पूरा, विकल्प का प्रस्ताव, या पूरा नहीं हो सकता। परफ़ॉर्मेंस पूरी करना एक जाँच है, और तय मटीरियल व इंस्पेक्शन तरीके से बना पाना दूसरी जाँच है।

अगर कोई माँग पूरी करने में खर्च या समय बढ़ता है, तो यह कोटेशन में दिखाएँ। जब आप अलग डिज़ाइन या अलग टेस्ट प्रस्तावित करें जो माँग का मक़सद पूरा करता हो, तो समझाएँ कि आप उसे बराबर क्यों मानते हैं और कौन-सा फ़र्क़ बचा रहता है।

हर क्लॉज़ ठीक वैसा ही पूरा करना ज़रूरी नहीं, बशर्ते हर फ़र्क़ साफ़ लिखा और तय हो। जो नहीं करना है, वह यह कि "खरीदार डेविएशन मान ही लेगा" सोचकर चुपचाप कोई माँग छोड़ देना। कानून और सेफ्टी की माँगें छूट के लिए मोलभाव की चीज़ नहीं हैं। या तो ऐसा कॉन्फ़िगरेशन ऑफ़र करें जो उन्हें पूरा करे, या तय करें कि यह काम ले सकते हैं या नहीं।

अगर खरीदार आपके स्टैंडर्ड स्पेक में बदलाव मान लेता है, तो quotation specification और deviation list, दोनों अपडेट करें। सिर्फ़ कीमत बदलकर तकनीकी जवाब पुराना छोड़ दें, तो ऑर्डर के समय दोनों पक्षों की समझ फिर अलग हो जाएगी।

डेविएशन की लिस्ट बनाएँ और खरीदार से तय करें

हर डेविएशन के लिए क्लॉज़ नंबर और माँग लिखें। फिर बताएँ कि आप उसे क्यों पूरा नहीं कर सकते और उसकी जगह क्या प्रस्ताव है। परफ़ॉर्मेंस, खर्च, डिलीवरी और आसपास की मशीनों पर असर भी लिखें, ताकि खरीदार के पास फ़ैसले के लिए ज़रूरी जानकारी हो।

"क्योंकि यह हमारा स्टैंडर्ड है" से खरीदार को पता नहीं चलता कि सीमा तकनीकी है या खर्च का चुनाव। अलग से समझाएँ: क्या आप अपने स्टैंडर्ड के बाहर कर सकते हैं, किन शर्तों पर, और विकल्प में क्या फ़र्क़ है।

जवाब वाले कॉलम में स्टेटस दर्ज करें (मान लिया, मूल माँग क़ायम, शर्त के साथ मान लिया, या चर्चा जारी), और किसने कब फ़ैसला लिया। लिस्ट जमा कर देना और डेविएशन मंज़ूर हो जाना, एक बात नहीं है। हर खुले आइटम पर एक ज़िम्मेदार और फ़ैसले की आख़िरी तारीख़ रखें। हर सहमति को quotation specification, ऑर्डर की शर्तों और डिलीवरी दस्तावेज़ों में डालें, ताकि कुछ भी लिस्ट से टकराए नहीं।

जब आप Purchase Specification लिखें (खरीदार की तरफ़)

खरीदार के तौर पर जाँचें कि हर माँग सही है, सप्लायर को समझ आएगी, और बाद में परखी जा सकती है। इसे अकेले डिज़ाइनर पर न छोड़ें। स्पेक जारी करने से पहले ऑपरेशन, मेंटेनेंस और पर्चेज़ को शामिल करें, ताकि कमियाँ पहले ही पकड़ी जाएँ।

नंबर और इंटरफ़ेस जाँचें

फ़्लो, टेम्परेचर, प्रेशर जैसी वैल्यू उनके पीछे की कैलकुलेशन शीट और इक्विपमेंट लिस्ट से मिलाएँ। यूनिट या आधार अलग हो तो वही नंबर कुछ और मतलब रखता है। इसलिए सिर्फ़ कॉपी किए नंबर नहीं, उनकी परिभाषाएँ भी मिलाएँ।

इक्विपमेंट नंबर, संख्या, standby की सोच और बिजली सप्लाई की शर्तें पूरे प्लांट के डिज़ाइन पर असर डालती हैं। एक और दो पंप में गड़बड़ी हुई, तो सिर्फ़ कीमत नहीं बदलती। लेआउट, पाइपिंग, कंट्रोल और मेंटेनेंस के दौरान प्लांट चलाने का तरीका भी बदल जाता है।

इंटरफ़ेस के लिए ड्रॉइंग के कोऑर्डिनेट और दिशा, कनेक्शन साइज़, प्रेशर क्लास और फ़ाउंडेशन की जगह, सब जुड़े हुए पक्षों के साथ मिलाएँ। सप्लायर की इक्विपमेंट ड्रॉइंग को पाइपिंग, इलेक्ट्रिकल और सिविल ड्रॉइंग से जोड़ें, ताकि एक तरफ़ की ड्रॉइंग दूसरी से ज़्यादा नई न रह जाए।

अगर कोई वैल्यू अभी पक्की नहीं है, तो उसे अस्थायी (provisional) लिखें और बताएँ कि कब पक्की होगी। तय करें कि तब तक चयन या निर्माण कितना आगे बढ़ सकता है और बदलाव का क्या असर होगा। इससे अस्थायी वैल्यू को पक्की मान लेने से बचाव होता है।

पुरानी सीख को आगे ले जाएँ

टेम्पलेट में सालों का तजुर्बा जमा होता है, पर ज़रूरी नहीं कि उसमें ताज़ा गड़बड़ियाँ भी हों। ऑपरेटिंग लॉग और खराबी की रिपोर्ट देखें और पूछें कि इस सर्विस में भी वही वजह आ सकती है या नहीं।

सुधार को सिर्फ़ लक्षण नहीं, वजह और ज़रूरी फ़ंक्शन के रूप में लिखें। जैसे कहीं पानी जमा हुआ था, तो सिर्फ़ "पानी नहीं जमना चाहिए" न लिखें। ड्रेन का रास्ता और उसकी जाँच का तरीका लिखें।

दूसरे मॉडलों के सारे सुधार जोड़ देने से ऐसी बनावट और टेस्ट आ सकते हैं जिनकी ज़रूरत नहीं। हर सुधार के लिए रिकॉर्ड करें कि वह इस लिक्विड, माहौल और चलाने के तरीके पर क्यों लागू होता है। फिर मेंटेनेंस और सप्लायर, दोनों से पक्का करवाएँ कि वह ठीक है।

ज़रूरी माँगों के लिए, उस घटना का नंबर और माँग की वजह अपने अंदरूनी रिकॉर्ड में जोड़ें। जो जानकारी कंपनी से बाहर नहीं जा सकती, उसका सार दिया जा सकता है। सप्लायर को डिज़ाइन की शर्तें और compliance जाँचने का तरीका चाहिए।

आख़िरी ग्राहक की माँगें शामिल करें

जब आप अपने ग्राहक (जैसे प्लांट के मालिक) की किसी माँग पर हाँ कह चुके हों, तो उसे माँगों की लिस्ट से purchase specification के किसी क्लॉज़ तक पहुँचाएँ। जो माँग सिर्फ़ मीटिंग मिनट्स में लिखी है, वह सप्लायर तक पहुँचाए बिना मशीन में नहीं आएगी।

ग्राहक की माँगों में "ज़रूरी" और "हो तो अच्छा" मिले होते हैं। इसलिए प्राथमिकता के हिसाब से छाँटें और लिखें कि फ़ैसला कौन करेगा। कोई माँग पूरी करना मुश्किल निकले तो उसके विकल्प, और खर्च व डिलीवरी पर असर, ऑर्डर से पहले तय कर लें।

तय रंग, इंस्पेक्शन ओपनिंग की दिशा या बदलने वाले पार्ट की समानता, ये सब किसी एक यूनिट के डिज़ाइन पर असर डालते हैं। ग्राहक की माँगें सिर्फ़ सूची में न डालें। जाँचें कि वे इंटरफ़ेस या सेफ्टी की शर्तों से टकराती तो नहीं। रिकॉर्ड रखें कि कौन-सी माँग मानी गई, कौन-सी नहीं, और कौन-सी पर चर्चा जारी है। तब साफ़ रहता है कि फ़ाइनल स्पेक में कौन-सी सहमतियाँ हैं, और वही बहस दोबारा नहीं खोलनी पड़ती।

माँग से इंस्पेक्शन और बदलाव के नियंत्रण तक

ऊपर की बातें तब काम की बनती हैं जब हर माँग इस तरह लिखी हो कि उसे परखा जा सके। P-101 के लिए इसका मतलब है: "ठीक-ठाक परफ़ॉर्मेंस" और "स्टैंडर्ड एक्सेसरी" की जगह ड्यूटी पॉइंट, स्कोप और हर एक को साबित करने वाला दस्तावेज़ लिखना।

अगर रेटेड पॉइंट 20 m³/h पर 30 m टोटल हेड है, तो परफ़ॉर्मेंस उसी जोड़ी पर जाँची जाती है। इसका मतलब यह नहीं कि अधिकतम फ़्लो और अधिकतम हेड अलग-अलग पूरे हों। दोनों को एक ही ऑपरेटिंग पॉइंट की शर्त की तरह लिखें। साथ में लिक्विड के गुण, टेम्परेचर की रेंज, सक्शन की शर्तें और यह भी जोड़ें कि पंप लगातार चलेगा या नहीं। ये शर्तें छोड़कर मॉडल चुना जाए, तो कैटलॉग की क्षमता होने पर भी वह असली सर्विस के लिए सही न बैठे।

परफ़ॉर्मेंस पास करने के लिए पहले से तय करें: टेस्ट का तरीका, कहाँ-कहाँ नापना है, टॉलरेंस, और कौन-सा स्टैंडर्ड व ग्रेड लागू होगा। माँग वाले कॉलम में सिर्फ़ नंबर लिख देना काफ़ी नहीं है। यह भी तय करें कि किन शर्तों पर बनी कौन-सी टेस्ट रिपोर्ट उसे साबित करेगी।

चित्र 5: साइज़ की माँग को ड्रॉइंग और इंस्पेक्शन रिकॉर्ड से जोड़ें

फ़्लैंज सिर्फ़ बाहरी व्यास (outside diameter) से पास नहीं होता। होल और फ़ेसिंग भी तय के अनुसार जाँचें।

तय बाहरी व्यास Dहोल की गिनती, साइज़, पिच भी जाँचेंड्रॉइंग नं., रिवीज़न, रिकॉर्डआइटममाँगनापा गयाODड्रॉइंग सेदर्जफ़ेसिंगतयजाँचाबोल्ट होलड्रॉइंग सेदर्ज

यह साइज़ जाँच का सिर्फ़ कॉन्सेप्ट चित्र है, किसी ख़ास JIS फ़्लैंज के साइज़ नहीं। फ़ेसिंग, साइज़, टॉलरेंस और इंस्पेक्शन का तरीका हर प्रोजेक्ट की ड्रॉइंग में तय करें।

इंस्पेक्शन टेबल पर पंप केसिंग, फ़्लैंज, कैलिपर और इंस्पेक्शन रिकॉर्ड
AI से बनी तस्वीर: साइज़ की जाँच में काम आने वाले पार्ट, रिकॉर्ड और औज़ार।

फ़ैक्टरी में witness टेस्ट के लिए तय करें: कौन-से आइटम खरीदार की मौजूदगी में होंगे, कितने दिन पहले सूचना देनी है, कौन-सा प्रोसीजर जमा होगा, और नतीजे कैसे दर्ज होंगे। सिर्फ़ "witness हाँ/ना" इंस्पेक्शन प्लान नहीं है। पहले से तय करें कि खरीदार न आ पाए तो क्या होगा। जो शर्तें सिर्फ़ साइट पर जाँची जा सकती हैं, उन्हें फ़ैक्टरी में जाँची जाने वाली शर्तों से अलग रखें। साइट की पाइपिंग और बिजली के साथ पूरा रन (integrated run) और अकेली यूनिट का परफ़ॉर्मेंस टेस्ट एक चीज़ नहीं हैं। इस चरण को हमारी FAT और SAT चेकलिस्ट में देखें।

डिलीवरी पर असली यूनिट का इक्विपमेंट नंबर और मॉडल, एक्सेसरी की मात्रा, दस्तावेज़ों के रिवीज़न और टेस्ट रिपोर्ट मिलाएँ। जो दस्तावेज़ नहीं आए या जो सुधार बाक़ी हैं, उन्हें ज़िम्मेदार और पूरा होने की तारीख़ के साथ लॉग करें। रिसीविंग रिकॉर्ड में हर जाँची गई रिक्वायरमेंट का नंबर, नतीजा और उसे साबित करने वाली टेस्ट रिपोर्ट का नंबर लिखें। पास करने की वजह पता चल सके, तो यह रिकॉर्ड बाद में मेंटेनेंस के सवालों में और वही यूनिट दोबारा मँगाने में काम आता है।

अगर कोई nonconformity (कमी) मिले, तो तय करें कि क्या होगा (repair, बदलना, दोबारा इंस्पेक्शन) और बंद होने की पुष्टि कौन करेगा। अगर हैंडओवर के बाद भी कोई आइटम खुला रहेगा, तो उसे कैसे संभालना है, यह भी तय करके दर्ज करें।

स्पेक में हर बदलाव के लिए दर्ज करें: वजह, बदलाव से पहले और बाद, किस पर असर, खर्च, डिलीवरी और फ़ैसले की तारीख़। ईमेल में एक नया नंबर भेज देने से काम पूरा नहीं होता। जिस भी ड्रॉइंग और लिस्ट पर असर पड़ता है, उसमें बदलाव तक पहुँचें।

चित्र 6: स्पेक के बदलाव को चार दस्तावेज़ों तक वापस ले जाएँ

कनेक्शन साइज़ बदलना भी सिर्फ़ मशीन की ड्रॉइंग बदलने से पूरा नहीं होता।

बदलाव की माँग: कनेक्शन साइज़रिक्वायरमेंट नंबर, वजह और मंज़ूर करने वाले को दर्ज करें
मशीन और पाइपिंग ड्रॉइंगकम्पैनियन फ़्लैंज, पाइपिंग में प्रेशर ड्रॉप, लेआउट
स्कोप ऑफ़ सप्लाई और कीमतएक्सेसरी, मटीरियल, अतिरिक्त काम
निर्माण और डिलीवरी शेड्यूलपहले से मँगाए पार्ट, rework, बाक़ी अप्रूवल
इंस्पेक्शन और पूरा होने के दस्तावेज़जाँचे जाने वाले साइज़, प्रोसीजर, फ़ाइनल रिवीज़न एक-जैसे

बदलाव तय होने के बाद असर वाले दस्तावेज़ों को रिवाइज़ करें, उनके मौजूदा रिवीज़न का हिसाब रखें, और डिस्ट्रीब्यूशन लिस्ट के सब लोगों को भेजें, ताकि कोई पुरानी कॉपी पर काम न करता रहे।

जब स्पेक, कोटेशन, सहमति की लिस्ट और रिवीज़न का इतिहास आपस में जुड़े हों, तो स्टाफ़ बदलने पर भी फ़ैसले आगे चलते रहते हैं।

टेम्पलेट: Requirement Register, Deviation List और सवाल

नीचे के फ़ॉर्मेट ऊपर की बातों को कॉपी करने लायक रूप में रखते हैं। पंक्तियाँ P-101 के काल्पनिक उदाहरण हैं, कॉलम अपनी कंपनी के दस्तावेज़ों के हिसाब से बदल लें।

Requirement Register (खरीदार के लिए)

Req. नं.माँगस्पेक क्लॉज़ / रिवीज़नसप्लायर का जवाबसबूतस्टेटस
P-101-01रेटेड पॉइंट 20 m³/h पर 30 m टोटल हेड, एक ही ऑपरेटिंग पॉइंटIndividual spec 3.1 / Rev. Bस्टैंडर्ड में पूरापरफ़ॉर्मेंस कर्व; शॉप टेस्ट रिपोर्टटेस्ट तक खुला
P-101-07सक्शन और डिस्चार्ज के कम्पैनियन फ़्लैंज, गैसकेट और बोल्ट: सप्लायर के स्कोप मेंIndividual spec 5.2 / Rev. Bशामिल (मात्रा और मटीरियल पक्का करना है)आइटम-वार सप्लाई लिस्टसवाल भेजा
P-101-12केसिंग का मटीरियल तय के अनुसारIndividual spec 4.1 / Rev. Bविकल्प का प्रस्ताव (Deviation D-03)मटीरियल सर्टिफ़िकेटचर्चा जारी
काल्पनिक उदाहरण। हर पंक्ति में एक माँग है, और वही नंबर ड्रॉइंग और टेस्ट रिकॉर्ड तक उस आइटम के साथ चलता है।

Deviation List (सप्लायर के लिए)

कॉलमक्या भरें
Deviation नं.D-01, D-02, … (रिवीज़न बदलने पर नंबर वही रखें)
स्पेक दस्तावेज़, क्लॉज़, रिवीज़नमाँग ठीक कहाँ लिखी है
जैसी लिखी है वैसी माँगक्लॉज़ को वैसा ही या सार में लिखें
सप्लायर का प्रस्तावउसकी जगह आप क्या देंगे
वजहतकनीकी सीमा या खर्च का चुनाव, साफ़ लिखें (सिर्फ़ "हमारा स्टैंडर्ड" नहीं)
असरपरफ़ॉर्मेंस, खर्च, डिलीवरी, आसपास की मशीनें
खरीदार का फ़ैसलामान लिया / मूल माँग क़ायम / शर्त के साथ मान लिया / चर्चा जारी
किसने तय किया, तारीख़फ़ैसला लेने वाले का नाम और तारीख़
कहाँ दर्ज हुआQuotation spec का रिवीज़न, ऑर्डर की शर्तें, delivery spec का रिवीज़न
जिस लिस्ट में कोई फ़ैसला भरा न हो, वह प्रस्ताव है, मंज़ूरी नहीं।

जापानी खरीदार को भेजने लायक सवाल (सप्लायर की तरफ़ से)

इंक्वायरी मिलते ही ये सवाल भेज दें, तो बाद की गलतफ़हमियाँ कम होती हैं।

  • कृपया इस इंक्वायरी के पूरे दस्तावेज़ सेट की पुष्टि करें: स्पेक नंबर, रिवीज़न और अटैचमेंट।
  • कॉमन स्पेसिफ़िकेशन और इंडिविजुअल स्पेसिफ़िकेशन में टकराव हो तो कौन-सा दस्तावेज़ मान्य होगा?
  • प्रेशर gauge में हैं या absolute में, और फ़्लो की वैल्यू किस ऑपरेटिंग हालत की हैं?
  • कौन-सी वैल्यू अस्थायी हैं, और वे कब पक्की होंगी?
  • हर इंटरफ़ेस पर कम्पैनियन फ़्लैंज, गैसकेट, बोल्ट और एंकर बोल्ट कौन देगा?
  • इस मशीन पर कौन-से कानून लागू होंगे, और कौन-से आवेदन और दस्तावेज़ हमारे स्कोप में हैं?
  • आप कौन-से टेस्ट खुद देखेंगे (witness), कितने दिन पहले सूचना चाहिए, और न आ पाएँ तो क्या होगा?
  • कृपया document submission list की पुष्टि करें: आख़िरी तारीख़ें, फ़ॉर्मेट, कॉपी की संख्या और किन दस्तावेज़ों पर अप्रूवल चाहिए।
  • हमारी deviation list का जवाब आप कैसे और कब तक देंगे?

जारी करने से पहले की चेकलिस्ट (खरीदार की तरफ़)

  • सारी वैल्यू कैलकुलेशन शीट और इक्विपमेंट लिस्ट से मिलाई गईं, यूनिट और आधार तय हैं
  • इक्विपमेंट नंबर, संख्या, standby की सोच और बिजली सप्लाई की पुष्टि हुई
  • इंटरफ़ेस पाइपिंग, इलेक्ट्रिकल और सिविल ड्रॉइंग से मिलाए गए
  • अस्थायी वैल्यू पर निशान है और पक्की होने की तारीख़ लिखी है
  • हर ज़रूरी एक्सेसरी का नाम, मात्रा और स्कोप लिखा है, "स्टैंडर्ड आइटम, पूरा सेट" जैसा कुछ नहीं
  • रेफ़रेंस स्टैंडर्ड और ड्रॉइंग नंबर और रिवीज़न के साथ लिस्ट में हैं
  • कानून की माँगें कॉन्ट्रैक्ट के स्टैंडर्ड से अलग लिखी हैं
  • हर मुख्य माँग के लिए पास करने का तरीका (टेस्ट, प्रोसीजर, रिकॉर्ड) तय है
  • पुरानी सीख और आख़िरी ग्राहक की माँगें क्लॉज़ तक जोड़ी गई हैं
  • किसी दूसरी यूनिट के टेम्पलेट से आए क्लॉज़, जो यहाँ लागू नहीं होते, हटा दिए गए हैं

यह गाइड कहाँ लागू नहीं होती

  • नाम और क्रम अलग हो सकते हैं। कुछ कंपनियाँ kobai shiyosho की जगह konyu shiyosho कहती हैं, और बाद के दस्तावेज़ों के नाम और समय कंपनी और उद्योग के हिसाब से अलग होते हैं। अपने कॉन्ट्रैक्ट की दस्तावेज़ लिस्ट मानें।
  • कौन लिखता है, यह अलग हो सकता है। डिज़ाइन लिखे और पर्चेज़ भेजे, यह आम बँटवारा है, हर जगह ऐसा नहीं।
  • सरकारी काम के स्पेक सिर्फ़ उदाहरण हैं। MLIT का कॉमन स्पेसिफ़िकेशन सरकारी काम के लिए है। प्राइवेट कॉन्ट्रैक्ट उसे तभी मानता है जब कॉन्ट्रैक्ट में लिखा हो।
  • कानून मशीन और जगह पर निर्भर करते हैं। ऊपर जिन जापानी कानूनों के नाम आए, वे जापान में लगने वाली मशीन के उदाहरण हैं। भारत की फ़ैक्टरी के लिए Factories Act 1948, OSH Code 2020 और प्रेशर संबंधी नियमों में से क्या और किस राज्य में लागू है, यह हर प्रोजेक्ट में संबंधित अनुमति वालों और अपने EHS या legal विभाग के साथ तय करें।
  • स्पेक पूरा कॉन्ट्रैक्ट नहीं है। जापान में Fair Transactions Act (संशोधित Subcontract Act, 1 जनवरी 2026 से लागू) लेन-देन की किस्म और पक्षों की पूँजी या कर्मचारी संख्या के आधार पर लागू होता है। जो लेन-देन उसके दायरे में आते हैं, उनमें खरीदार पर ऑर्डर की शर्तें बताने और रिकॉर्ड रखने की अलग ज़िम्मेदारी है। सिर्फ़ purchase specification से उसकी हर बात पूरी नहीं होती।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Purchase specification पहले बनता है या quotation specification?

आम तौर पर purchase specification पहले। खरीदार पहले अपनी माँगें बताता है, और सप्लायर अपने चुने मॉडल के साथ quotation specification में जवाब देता है। शुरुआती अनौपचारिक तकनीकी बातचीत पहले हो भी जाए, तब भी ऑर्डर की शर्तें लिखकर तय होनी चाहिए।

क्या purchase specification का टेम्पलेट जैसा है वैसा इस्तेमाल कर सकते हैं?

नहीं। टेम्पलेट को आइटमों की शुरुआती लिस्ट मानें, और फिर मशीन और इस प्रोजेक्ट की ऑपरेटिंग शर्तों के हिसाब से ढालें। जो क्लॉज़ लागू नहीं होते और पुरानी ड्रॉइंग दस्तावेज़ में रह जाएँ, तो ग़लतफ़हमी होती है। इसलिए ताज़ा रिवीज़न और हर क्लॉज़ का दायरा जाँचें।

क्या सप्लायर के स्टैंडर्ड डिज़ाइन पर आने से कीमत कम होगी?

खर्च या लीड टाइम सुधर सकता है, पर पहले यह देखें कि माँग पूरी होती है या नहीं। परफ़ॉर्मेंस, मटीरियल, स्कोप और इंस्पेक्शन पर असर दिखाएँ, खरीदार की सहमति लें, और फिर कोटेशन की शर्तें अपडेट करें।

क्या deviation जमा करते ही मंज़ूर हो जाता है?

नहीं। Deviation जमा करना सिर्फ़ फ़र्क़ सामने रखना है। फ़ैसला, शर्तें, किसने तय किया और तारीख़ दर्ज करें। फिर उस सहमति को स्पेक और ऑर्डर की शर्तों में डालें।

क्या delivery specification जाँच लेने के बाद purchase specification का काम ख़त्म हो जाता है?

नहीं। हर माँग को ड्रॉइंग रिव्यू, निर्माण, इंस्पेक्शन और डिलीवरी तक ट्रैक करें। जब तक आख़िरी सहमति असली मशीन और पूरे होने के दस्तावेज़ों से न मिल जाए, खुले आइटम और बदलाव का इतिहास ढूँढने लायक रखें।

स्रोत (Sources)

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संपादक के बारे में

MONOSCOPE संपादकीय टीमFOUNDER & EDITOR

प्लांट उपकरण निर्माता और प्लांट इंजीनियरिंग कंपनी में लगभग दस साल तक उपकरणों के प्रस्ताव, डिज़ाइन और कमीशनिंग का काम करने के बाद डिजिटल मार्केटिंग में आए। आज B2B निर्माताओं को वेब कंसल्टिंग देते हैं, ताकि वे अपने उत्पाद और तकनीक आसानी से समझा सकें। जापान के राष्ट्रीय लाइसेंस Energy Manager और तृतीय श्रेणी चीफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर धारक।

2017 से एक इंजीनियरिंग ब्लॉग (500 से ज़्यादा लेख) और लगभग 20,000 सब्सक्राइबर वाला जापानी YouTube चैनल चलाते हैं। हर गाइड जापानी शॉप फ़्लोर के नज़रिए से लिखा जाता है और उद्धृत मानकों से मिलाकर जाँचा जाता है।

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