TBM बनाम CBM: टाइम-बेस्ड और कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस में फ़र्क

अगर आप किसी जापानी कंपनी की फ़ैक्टरी में काम करते हैं, या आपकी मशीन जापान की बनी है, तो उसके मेंटेनेंस प्लान में ज़्यादातर काम तय समय पर लिखे मिलेंगे। जैसे "हर मार्च में ओवरहॉल" (मशीन खोलकर जाँचना और ठीक करना) या "5,000 घंटे चलने पर फ़िल्टर बदलना"। जापानी साथी इसे TBM, यानी टाइम-बेस्ड मेंटेनेंस कहते हैं।
उधर हेड ऑफ़िस कह सकता है कि "TBM से CBM पर जाओ" और हर मशीन पर sensor लगाओ। तब सवाल यह उठता है: किस पार्ट को तय समय पर बदलें, किसे नापते रहें, और किसे खराब होने तक चलने दें?
जापानी फ़ैक्टरियाँ तीन तरीके मिलाकर चलाती हैं: TBM, CBM (कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस) और BM (ब्रेकडाउन मेंटेनेंस, यानी खराब होने के बाद ठीक करना)। तरीका मशीन के हिसाब से चुना जाता है, और अक्सर मशीन के हर पार्ट के हिसाब से। सब कुछ तय समय पर बदलने से खर्च बढ़ता है, और बदलने का काम खुद भी failure ला सकता है।
इस गाइड में तीनों तरीकों की तुलना है, और यह भी कि सिर्फ़ तय समय पर बदलने से ज़्यादातर failure क्यों नहीं रुकते। आगे तरीका चुनने का क्रम, महत्व (criticality) के हिसाब से तरीके मिलाना, और मौजूदा प्लान को दोबारा देखने की चेकलिस्ट भी है।
विषय-सूची
- मेंटेनेंस के तीन तरीके: BM, TBM और CBM
- TBM और CBM में मुख्य फ़र्क
- तय समय पर पार्ट बदलना काफ़ी क्यों नहीं है
- CBM चलने की तीन शर्तें
- मेंटेनेंस का तरीका कैसे चुनें: चार सवाल, क्रम से
- महत्व और पार्ट के हिसाब से तरीके मिलाना
- मेंटेनेंस के तरीके दोबारा देखना: पाँच कदम और आम गलतियाँ
- जापानी मेंटेनेंस शब्द: जल्दी देखने की तालिका
- चेकलिस्ट: मेंटेनेंस का तरीका या अंतराल बदलने से पहले
- जापानी पक्ष से पूछने के सवाल
- इस गाइड की सीमाएँ
- सारांश
- FAQ
- स्रोत
मेंटेनेंस के तीन तरीके: BM, TBM और CBM
मेंटेनेंस के नाम कंपनी और इंडस्ट्री के हिसाब से बदल जाते हैं, इसलिए पहले जापानी स्टैंडर्ड देख लें। जापान का JIS Z 8115:2019 (dependability की शब्दावली, इसमें IEC 60050-192 के टर्म नंबर इस्तेमाल हुए हैं) मेंटेनेंस को प्रिवेंटिव मेंटेनेंस और कोरेक्टिव मेंटेनेंस में बाँटता है।
प्रिवेंटिव मेंटेनेंस (yobo hozen) वह है जो पार्ट के बिगाड़ का असर कम करने और failure की संभावना घटाने के लिए किया जाता है। इसके दो हिस्से हैं। तय शेड्यूल पर होने वाला jikan keikaku hozen (IEC में "scheduled maintenance") वही है जिसे फ़ैक्टरी में TBM कहते हैं। मशीन की असली हालत के आकलन पर होने वाला jotai kijun hozen CBM है।
कोरेक्टिव मेंटेनेंस को jigo hozen कहते हैं, और जापानी फ़ैक्टरियों में इसे आम तौर पर BM (ब्रेकडाउन मेंटेनेंस) बोलते हैं। इसमें failure या गड़बड़ी पकड़ में आने के बाद मशीन को ज़रूरी हालत में वापस लाया जाता है। जापानी फ़ैक्टरी में मेंटेनेंस टीम का पूरा काम और TPM से इसका रिश्ता अलग लेख का विषय है। यहाँ सिर्फ़ तीनों का फ़र्क और चुनने का तरीका है।
मेंटेनेंस पहले प्रिवेंटिव और कोरेक्टिव में बँटता है। TBM और CBM प्रिवेंटिव मेंटेनेंस के दो हिस्से हैं।
JIS Z 8115:2019 के टर्म और परिभाषाओं के आधार पर। जापानी फ़ैक्टरियों में TBM के लिए jikan kijun hozen और CBM के लिए jotai kanshi hozen जैसे नाम भी चलते हैं।
TBM के भी दो रूप हैं। कैलेंडर के अंतराल पर होने वाला periodic maintenance (teiki hozen), और मशीन के चलने के घंटे एक तय मान तक पहुँचने पर होने वाला age-based maintenance (keiji hozen)। "हर मार्च में ओवरहॉल" पहले का उदाहरण है, और "5,000 घंटे पर फ़िल्टर बदलना" दूसरे का।
तीनों में कोई तरीका दूसरे से बेहतर नहीं है। फ़र्क इसमें है कि काम शुरू करने का trigger क्या है: failure, घड़ी, या मशीन की हालत। हर तरीका अलग मशीनों पर ठीक बैठता है, और हर एक की अपनी कमज़ोरी है।
trigger, कहाँ ठीक बैठता है और कमज़ोरी, तीनों साथ रखकर देखें।
BM दो तरह से इस्तेमाल होता है। एक, अचानक हुए failure पर मौके पर ही काम करना। दूसरा, पहले से तय कर लेना कि यह मशीन खराब होने तक चलेगी। दूसरा तरीका लापरवाही नहीं है। यह खर्च और असर की तुलना करके चुना गया सही तरीका है, और इसे कब चुनें, यह आगे वाले हिस्से में है।
TBM और CBM में मुख्य फ़र्क

दोनों प्रिवेंटिव हैं, लेकिन काम कब करना है, यह तय करने का तरीका बिल्कुल अलग है। TBM कैलेंडर या hour meter देखता है। CBM मशीन की अपनी हालत नापता है।
फ़ैसला समय पर टिका है या हालत पर, इससे तैयारी और ताक़त-कमज़ोरी बदल जाती है।
दोनों प्रिवेंटिव मेंटेनेंस के ही रूप हैं। एक मशीन में अक्सर दोनों साथ इस्तेमाल होते हैं।
TBM: कैलेंडर या चलने के घंटों से तय
TBM का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि मेंटेनेंस का काम प्रोडक्शन प्लान में काफ़ी पहले डाला जा सकता है। लंबी छुट्टी में ओवरहॉल या हर महीने की शुरुआत में जाँच तय हो, तो मशीन बंद करने का दिन, लोग और पार्ट पहले से तैयार रहते हैं।
कमज़ोरी यह है कि अंतराल अक्सर "सुरक्षित तरफ़" खिसक जाता है। ऐसे में जिस पार्ट में अभी काफ़ी जान है, वह भी बदल जाता है, और पार्ट का खर्च और काम के घंटे बढ़ते हैं। और एक बार तय हुआ अंतराल सालों चलता रहता है, जबकि किसी को याद नहीं रहता कि वह क्यों चुना गया था।
CBM: नापी हुई हालत से तय
JIS Z 8115 CBM को ऐसा प्रिवेंटिव मेंटेनेंस बताता है जो मशीन की भौतिक हालत के आकलन पर आधारित हो। इसके नोट में लिखा है कि आकलन शेड्यूल के मुताबिक़ ऑपरेटर के देखने से भी हो सकता है, और sensor से condition monitoring से भी।
यानी रोज़ की जाँच (nichijo tenken) में ऑपरेटर अगर अजीब आवाज़ सुनता है या गर्मी छूकर देखता है, और गड़बड़ी हो तो मेंटेनेंस को बुलाता है, तो वह भी CBM है। महँगे sensor की शर्त नहीं है। असल बात यह है कि हालत नापने का तरीका हो, और साफ़ नियम हो कि "यह मान पार हुआ तो मशीन को सर्विस करो"। TPM वाली फ़ैक्टरियों में ऑपरेटर की यह रोज़ की जाँच jishu hozen (autonomous maintenance) का हिस्सा है।
CBM और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस (yochi hozen)
जापानी साथियों से आप अक्सर yochi hozen सुनेंगे, यानी प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस। लेकिन JIS Z 8115:2019 में जो शब्द परिभाषित है, वह कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस है। Yochi hozen का आम मतलब है, condition-monitoring के data से अंदाज़ा लगाना कि failure कब होगा, और उससे पहले कदम उठाना।
इसमें data लगातार जमा करके trend पढ़ा जाता है, इसलिए प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को CBM का आगे बढ़ा हुआ रूप समझना आसान है। रोज़ की जापानी बोलचाल में दोनों शब्द अक्सर मिल जाते हैं। इसलिए कोई "yochi hozen" कहे तो पूछ लें कि उसका मतलब trend से अंदाज़ा लगाना है या सिर्फ़ हालत की जाँच। पुरानी मशीनों से condition data कैसे लें, यह अलग लेख में है, और खर्च का हिसाब में।
तय समय पर पार्ट बदलना काफ़ी क्यों नहीं है

TBM मानकर चलता है कि हर पार्ट की एक उम्र होती है, और उम्र ख़त्म होने से पहले बदल दो तो वह खराब नहीं होगा। एयरलाइन इंडस्ट्री की स्टडी में दिखा कि इस सोच पर खरे उतरने वाले failure उम्मीद से बहुत कम हैं।
United Airlines (UAL) के F. Stanley Nowlan और Howard F. Heap ने विमान के पार्ट के failure को उम्र के हिसाब से छह पैटर्न में बाँटा। उनकी रिपोर्ट Reliability-Centered Maintenance 1978 में छपी थी।
NASA की Reliability-Centered Maintenance (RCM) गाइड के मुताबिक़ तीन स्टडी (UAL 1968, स्वीडन 1973, अमेरिकी नौसेना 1982) में उम्र से जुड़े बिना होने वाले random failure कुल का 77–92% निकले, और उम्र के साथ बढ़ने वाले पैटर्न सिर्फ़ 8–23%।
ज़्यादातर failure का उम्र से कोई लेना-देना नहीं होता, इसलिए सिर्फ़ समय पर बदलने से वे नहीं रुकते।
स्रोत: NASA, "Reliability-Centered Maintenance Guide for Facilities and Collateral Equipment" (2008)। ये स्टडी विमान और जहाज़ों की हैं। ये आँकड़े फ़ैक्टरी की मशीनों पर सीधे लागू नहीं होते।
बहुत कम पार्ट की उम्र समय से तय होती है
NASA की गाइड बताती है कि साफ़ wear-out वाला पैटर्न अकेले और सादे पार्ट में ज़्यादा दिखता है, जबकि जटिल मशीनों में तय "बूढ़ी उम्र" आम तौर पर नहीं दिखती। अगर आप पूरी मोटर, पंप या gear reducer को एक ही अंतराल पर रखते हैं, तो अंतराल छोटा करने से भी failure कम नहीं होंगे।
दूसरी तरफ़ V-बेल्ट, फ़िल्टर और ब्रेक लाइनिंग जैसे पार्ट, जो इस्तेमाल के हिसाब से लगातार घिसते हैं, उनमें TBM अच्छा चलता है। तरीका चुनने से पहले पहला सवाल यही पूछें: क्या यह पार्ट सच में इस्तेमाल के हिसाब से बिगड़ता है?
खोलना और बदलना खुद नए failure ला सकता है
यही गाइड बताती है कि कई बार तय समय का ओवरहॉल, ठीक चल रही मशीन में शुरुआती failure डालकर कुल failure rate को उलटा बढ़ा देता है। असेंबली की गलती, ढीला कसा बोल्ट और अंदर गंदगी जाना, मशीन जितनी बार खुलती है उतनी बार होने का मौका पाते हैं।
"जाँच के बाद मशीन और खराब चलने लगी" मेंटेनेंस टीम के लिए जानी-पहचानी शिकायत है। जिसे छूने की ज़रूरत नहीं, उसे न छूना, यह भी CBM का एक असली फ़ायदा है।
CBM चलने की तीन शर्तें
तो क्या हर मशीन CBM पर डाल दें? नहीं। CBM का फ़ायदा तभी मिलता है जब तीनों शर्तें पूरी हों। मेंटेनेंस में आम तौर पर इस्तेमाल होने वाला P-F curve यही तर्क दिखाता है।
CBM का सारा खेल P पॉइंट (बिगाड़ का पहला संकेत पकड़ में आना) से F पॉइंट (मशीन का काम बंद होना) के बीच के समय में है।
पकड़ने के तरीकों का क्रम इस बात का आम अंदाज़ा है कि कौन-सा तरीका संकेत सबसे पहले पकड़ता है (ISA की InTech पत्रिका के लेख के आधार पर)। P-F अंतराल कितना लंबा होगा, यह failure के प्रकार और पकड़ने के तरीके पर बहुत निर्भर करता है।
1. बिगाड़ का कोई नापने लायक संकेत दिखे
पहली शर्त: failure से पहले कोई नापने लायक बदलाव दिखना चाहिए। बेयरिंग में खरोंच वाइब्रेशन में दिखती है, बिजली का ढीला कनेक्शन गर्मी में, और बिगड़ा हुआ ल्यूब्रिकेंट तेल की गंदगी या बनावट में। हर failure का अपना संकेत होता है।
संकेत जितनी जल्दी पकड़ेंगे, कदम उठाने के लिए उतना ज़्यादा समय मिलेगा। इसीलिए तेल की जाँच और वाइब्रेशन नापना, इंद्रियों से की गई जाँच के मुकाबले गड़बड़ी पहले पकड़ लेते हैं।
2. संकेत और failure के बीच समय हो
दूसरी शर्त: P से F तक का समय, यानी P-F अंतराल, इतना लंबा हो कि जाँच हो सके, पार्ट मँगाया जा सके, मशीन रोकी जा सके और ठीक की जा सके। अगर P-F अंतराल छोटा है, तो महीने में एक बार की जाँच संकेत से चूक जाएगी और मशीन फिर भी फ़ेल हो जाएगी।
आम अंगूठे का नियम है कि जाँच का अंतराल P-F अंतराल के आधे से कम रखें, ताकि संकेत पकड़ने के एक से ज़्यादा मौके मिलें। अगर P-F अंतराल बहुत ही छोटा है, तो लगातार monitoring पर जाएँ या CBM के अलावा कोई और तरीका चुनें।
3. monitoring का खर्च वसूल हो
तीसरी शर्त: हिसाब बैठना चाहिए। sensor लगाने, data रखने और उसे परखने में लगे लोगों के घंटे जोड़ें। अगर यह खर्च उन नुकसानों और बदलने के खर्च से ज़्यादा है जो बचेंगे, तो CBM का मतलब नहीं बनता।
छोटी मोटरों पर, या जिन मशीनों की स्टैंडबाय मशीन मौजूद है, वहाँ भी लगातार monitoring फैला दें, तो monitoring का सिस्टम ही मेंटेनेंस पर बोझ बन सकता है। एडवांस monitoring पहले उन मशीनों पर लगाएँ जिन्हें खोना सबसे भारी पड़ेगा, और फिर क्रम से नीचे जाएँ।
मेंटेनेंस का तरीका कैसे चुनें: चार सवाल, क्रम से
ऊपर की बातों को हर मशीन या पार्ट के लिए एक प्रक्रिया में बदलें, तो यह क्रम बनता है। सवाल ऊपर से पूछते जाएँ। जहाँ पहली बार "हाँ" आए, वहीं तरीका तय हो जाता है।
ऊपर वाले सवाल से शुरू करें। पहली "हाँ" से तरीका तय होता है।
जिस failure से किसी को चोट लग सकती है या पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, उसे Q2 में कभी "छोटा असर" न मानें।
Q1: क़ानूनी अंतराल सबसे पहले
सबसे पहले क़ानून देखें। जापान में, उदाहरण के लिए, क्रेन की सुरक्षा का नियम (Ordinance on Safety of Cranes) क्रेन की self-inspection साल में कम से कम एक बार और महीने में कम से कम एक बार करना ज़रूरी बनाता है। जापान का Ordinance on Industrial Safety and Health फ़ोर्कलिफ़्ट के लिए एक साल से ज़्यादा के अंतराल पर नहीं होने वाली specified self-inspection (tokutei jishu kensa) और एक महीने से ज़्यादा के अंतराल पर नहीं होने वाली periodic self-inspection तय करता है।
ऐसी मशीनों में हालत कितनी भी अच्छी हो, जाँच क़ानूनी अंतराल पर करनी ही है। CBM को क़ानूनी जाँच के ऊपर जोड़ा जा सकता है, उसकी जगह नहीं रखा जा सकता।
भारत में भी कुछ मशीनों की क़ानूनी जाँच तय है। Factories Act 1948 की धारा 28 में hoist और lift की जाँच किसी competent person से हर 6 महीने में कम से कम एक बार कराने और उसका रजिस्टर रखने का नियम है। धारा 29 में क्रेन जैसी lifting machine, chain और rope की जाँच के नियम हैं। 2020 का OSH Code इन नियमों को नए ढाँचे में लाने वाला क़ानून है, लेकिन आपकी साइट पर अभी कौन-सा क़ानून और राज्य का कौन-सा नियम लागू है, यह आपके EHS या compliance विभाग से ही पक्का होगा। इसलिए कोई भी अंतराल बदलने से पहले उनसे पूछ लें।
हालाँकि बेहतर monitoring कभी-कभी लंबे क़ानूनी अंतराल की वजह भी बन सकती है। जापान की High Pressure Gas Safety Institute (KHK) के मुताबिक़, High Pressure Gas Safety Act के तहत "super certified" साइट अपनी लगातार चलाने की अवधि ख़ुद तय कर सकती है, जो अधिकतम आठ साल तक जा सकती है। सामान्य certified साइट के लिए यह अवधि चार साल जैसी होती है। super certification की अतिरिक्त शर्तों में IoT और big data जैसी नई तकनीक अपनाना शामिल है।
Q2: असर कम हो तो BM चुनें
अगला सवाल: मशीन रुके तो क्या होगा? NASA की RCM गाइड run-to-failure (खराब होने तक चलाना) को सोच-समझकर लिया गया फ़ैसला मानती है, जो कुछ मशीनों के लिए ठीक है। उसके उदाहरणों में 7.5 hp (करीब 5.5 kW) से छोटी गैर-ज़रूरी बिजली की मोटरें, comfort cooling, टॉयलेट के exhaust fan, छोटे कम-तापमान वाले वॉटर हीटर वगैरह हैं, जिनके failure का असर नगण्य है।
फ़ैक्टरी में इसके उम्मीदवार ऑफ़िस का AC, स्टैंडबाय मशीन वाले छोटे पंप और लाइटें हो सकती हैं। अगर रोकथाम की जाँच और बदलाव का खर्च, खराब होने के बाद ठीक करने से ज़्यादा है, तो BM समझदारी का फ़ैसला है।
Q3 और Q4: संकेत नापे जा सकें तो CBM, उम्र का अंदाज़ा हो तो TBM
जिन मशीनों का असर बड़ा है, उन पर पिछले हिस्से की CBM की तीन शर्तें लगाएँ। संकेत नापे जा सकते हैं और P-F अंतराल में गुंजाइश है, तो CBM। अगर बिगाड़ घिसाई की तरह इस्तेमाल के हिसाब से बढ़ता है, और उम्र का मोटा अंदाज़ा लग जाता है, तो TBM। दोनों लागू हों तो CBM में पार्ट कम बेकार जाते हैं।
इनमें से कुछ नहीं: डिज़ाइन सुधारें
अगर failure बिना संकेत के आता है और उसका समय भी नहीं बताया जा सकता, तो कोई मेंटेनेंस तरीका उसे हल नहीं करेगा। मशीन को ही बदलना पड़ेगा। Improvement maintenance (kairyo hozen) में मटीरियल या बनावट सुधारी जाती है, और maintenance prevention (hozen yobo) में सीखी बातें अगली मशीन के डिज़ाइन में डाली जाती हैं।
कुछ failure छिपे होते हैं। सेफ्टी डिवाइस और स्टैंडबाय सिस्टम आम तौर पर बंद पड़े रहते हैं, इसलिए जब तक काम न पड़े, उनकी खराबी पता नहीं चलती। इनके लिए समय-समय पर यह जाँच रखें कि वे सच में चलते हैं। failure के प्रकार और उनके असर को क्रम से लिखने के लिए FMEA काम आता है।
महत्व और पार्ट के हिसाब से तरीके मिलाना

चुनने का क्रम पता हो, तब भी प्लांट की हर मशीन पर एक-एक करके काम करना बहुत बड़ा काम है। आम तरीका यह है कि मशीनों को महत्व (criticality) के हिसाब से रैंक दें, हर रैंक के लिए एक डिफ़ॉल्ट तरीका तय करें, और पार्ट तक सिर्फ़ ज़रूरी मशीनों में जाएँ। महत्व का रैंक कैसे बनाते हैं, यह अलग लेख में है।
डिफ़ॉल्ट महत्व से तय करें, और ज़रूरी मशीनों की हालत पर ज़्यादा नज़र रखें।
रैंक कितने हों और उनकी शर्तें क्या हों, यह हर प्लांट ख़ुद तय करता है। ISA InTech के एक लेख में मोटा बँटवारा दिया है: करीब 10–20% मशीनें ज़्यादा महत्व की, 20–30% मध्यम और 40–60% कम महत्व की।
महत्व के रैंक से डिफ़ॉल्ट तय करें
रैंक तय करने की आम शर्तें ये हैं:
- मशीन रुकने पर प्रोडक्शन पर असर
- सेफ्टी और पर्यावरण पर असर
- क्वालिटी पर असर
- ठीक करने में लगने वाला समय और खर्च
- स्टैंडबाय मशीन है या नहीं
कई प्लांट हर शर्त पर पॉइंट देकर उन्हें जोड़ते हैं। मक़सद है कि मेंटेनेंस की मेहनत और पैसा सबसे ज़रूरी मशीनों पर लगे। अगर हर मशीन की जाँच एक जैसी हो, तो ज़रूरी मशीनों को कम ध्यान मिलता है।
एक मशीन में भी पार्ट के हिसाब से अलग तरीका
रैंक A की मशीन में भी, पार्ट में बाँटने पर तरीके मिले-जुले हो जाते हैं। पंप और मोटर के सेट में यह ऐसा दिख सकता है:
- बेयरिंग: वाइब्रेशन नापकर CBM
- V-बेल्ट और gland packing: तय अंतराल पर बदलकर TBM
- इंडिकेटर लैंप: जलने पर बदलना, यानी BM
पूरी मशीन को "CBM" का ठप्पा लगाने के बजाय, हर पार्ट के failure होने के असली तरीके के हिसाब से तरीका दें। इससे पैसा और मेहनत कम बेकार जाती है।
BM वाली मशीन के लिए ज़रूरी तैयारी
BM चुनने का मतलब कुछ न करना नहीं है। खराब होने पर मशीन जल्दी ठीक हो सके, इसके लिए ये चीज़ें तैयार रखें:
- स्पेयर पार्ट का स्टॉक
- ठीक करने की प्रक्रिया
- बदलने में कितना समय लगेगा, इसका अंदाज़ा
हर failure का रिकॉर्ड ज़रूर रखें। अगर एक ही मशीन बार-बार खराब हो रही है, तो "असर छोटा है" वाली मान्यता टूट चुकी है, और उसका रैंक या तरीका दोबारा देखने का वक़्त है।
मेंटेनेंस के तरीके दोबारा देखना: पाँच कदम और आम गलतियाँ

मेंटेनेंस का तरीका एक बार तय करके भुला देने की चीज़ नहीं है। failure का data आता रहता है, और उसके हिसाब से आप इसे सुधारते रहते हैं। मौजूदा मेंटेनेंस प्लान को दोबारा देखने के लिए पाँच कदम चलें।
मशीनों की सूची से शुरू करें, फिर नतीजे देखकर तरीके और अंतराल सुधारते रहें।
सारी मशीनें एक साथ दोबारा देखना ज़रूरी नहीं। रैंक A की मशीनों से शुरू करना व्यावहारिक है।
पाँचवें कदम में सबसे काम का data है हर बदले गए पार्ट की हालत का रिकॉर्ड। अगर TBM में बदले पार्ट में अभी काफ़ी जान बाकी है, तो अंतराल बढ़ाया जा सकता है। अगर बदलने से पहले ही वह घिस चुका है, तो अंतराल छोटा करें या CBM पर जाने की सोचें।
इस दोबारा देखने में तीन गलतियाँ बार-बार मिलती हैं:
- सब कुछ CBM पर डालने की कोशिश: कम असर वाली मशीनों पर और बिना संकेत वाले failure पर भी sensor लग जाते हैं, और monitoring का काम बढ़ता जाता है
- TBM का अंतराल बिना आधार के वैसा ही रखना: maker की सिफ़ारिश या पिछले आदमी की सेटिंग जस की तस चलती रहती है, इसलिए ज़रूरत से ज़्यादा मेंटेनेंस और चूकें सुधरती नहीं
- BM वाली मशीन की कोई तैयारी नहीं: स्पेयर पार्ट और प्रक्रिया न हो तो छोटी-सी खराबी भी लंबा स्टॉपेज बन जाती है
पहली गलती IoT फैलने के साथ और आम हो गई है। लोगों की कमी और पुरानी होती मशीनों की वजह से कई कंपनियाँ condition monitoring की ओर बढ़ी हैं। मक़सद याद रखें: failure के नुकसान और मेंटेनेंस के खर्च का जोड़ घटाना, monitoring करना अपने आप में लक्ष्य नहीं है। अचानक रुकना OEE में breakdown loss के रूप में भी दिखता है।
NASA की RCM गाइड failure के होने के तरीके और उसके असर के हिसाब से तरीके मिलाने को reliability-centered maintenance कहती है। गाइड के मुताबिक़ संतुलित RCM प्रोग्राम से सालाना मेंटेनेंस बजट में अक्सर 30–50% की बचत होती है। नतीजे साइट और मशीन के हिसाब से बदलते हैं, लेकिन यह आँकड़ा दिखाता है कि मेंटेनेंस के तरीके दोबारा चुनना ही खर्च घटाने का एक रास्ता है।
जापानी मेंटेनेंस शब्द: जल्दी देखने की तालिका
जापानी साथियों से बात करते समय ये शब्द सबसे ज़्यादा सुनने को मिलेंगे।
| जापानी नाम (romaji) | हिंदी में मतलब | English / संक्षेप |
|---|---|---|
| yobo hozen | failure से पहले का मेंटेनेंस | Preventive maintenance (PM) |
| jikan keikaku hozen / jikan kijun hozen | समय के हिसाब से मेंटेनेंस | Time-based maintenance (TBM); IEC 60050-192 में "scheduled maintenance" |
| teiki hozen | कैलेंडर के अंतराल पर मेंटेनेंस, TBM का एक रूप | Periodic (calendar-based) maintenance |
| keiji hozen | चलने के घंटों के हिसाब से मेंटेनेंस, TBM का एक रूप | Age-based (operating-hour-based) maintenance |
| jotai kijun hozen / jotai kanshi hozen | मशीन की हालत के हिसाब से मेंटेनेंस | Condition-based maintenance (CBM) |
| yochi hozen | data से failure का अंदाज़ा लगाकर मेंटेनेंस (अक्सर CBM के लिए ढीले तौर पर भी बोला जाता है) | Predictive maintenance |
| jigo hozen | खराब होने के बाद ठीक करना | Breakdown / corrective maintenance (BM) |
| kairyo hozen | डिज़ाइन सुधारकर failure घटाना (TPM में अक्सर CM; "corrective maintenance" नहीं) | Improvement maintenance |
| hozen yobo | अगली मशीन के डिज़ाइन में ही मेंटेनेंस आसान बनाना | Maintenance prevention (MP) |
| nichijo tenken | रोज़ की जाँच, अक्सर ऑपरेटर करता है | Daily inspection |
| gokan tenken | देखकर, सुनकर, छूकर, सूँघकर जाँच | Sensory inspection |
चेकलिस्ट: मेंटेनेंस का तरीका या अंतराल बदलने से पहले
कोई भी अंतराल बदलने से पहले इन सवालों पर एक-एक करके हाँ या नहीं लिखें।
- क्या अंतराल क़ानून या नियम से तय है (जापान में या भारत में)? अगर हाँ, तो उसे वैसा ही रखें और CBM सिर्फ़ ऊपर से जोड़ें।
- क्या आपको पता है कि मौजूदा अंतराल क्यों चुना गया था (maker की सिफ़ारिश, failure का इतिहास, कोई पुरानी घटना)?
- इस पार्ट के खराब होने पर क्या होगा: प्रोडक्शन रुकना, सेफ्टी या पर्यावरण का ख़तरा, या खराब क्वालिटी का माल बाहर जाना?
- क्या इस failure का कोई नापने लायक संकेत मिलता है (वाइब्रेशन, तापमान, तेल की हालत, करंट)?
- क्या P-F अंतराल इतना लंबा है कि उसके आधे से कम पर जाँच हो सके, पार्ट मँगाया जा सके और काम का समय तय हो सके?
- क्या पार्ट घंटों या साइकिल के हिसाब से बिगड़ता है, ताकि उम्र का मोटा अंदाज़ा लग सके?
- क्या monitoring का खर्च उन नुकसानों और बदलाव के खर्च से कम है जो वह बचाएगा?
- जिन्हें खराब होने तक चलाना है, उनके लिए क्या स्पेयर पार्ट, ठीक करने की प्रक्रिया और समय का अंदाज़ा तैयार है?
- क्या आप बदले गए पार्ट की हालत लिखेंगे, ताकि अगली बार देखने के लिए data हो?
जापानी पक्ष से पूछने के सवाल
अगर मेंटेनेंस प्लान जापानी मुख्यालय या मशीन बनाने वाली कंपनी से आया है, या आप उसे बदलना चाहते हैं, तो ये सवाल पूछें:
- इस प्लान में कौन-से काम TBM हैं, कौन-से CBM हैं, और कौन-से जान-बूझकर BM रखे गए हैं?
- हर TBM अंतराल का आधार क्या है: maker की सिफ़ारिश, failure का data, या क़ानून?
- जापान में कौन-सी जाँचें क़ानूनी रूप से ज़रूरी हैं, और क्या वही नियम हमारी साइट पर भी लागू होता है, या सिर्फ़ यहाँ का स्थानीय क़ानून?
- जब आप "yochi hozen" कहते हैं, तो आपका मतलब trend से अंदाज़ा लगाना है या आम तौर पर हालत की जाँच?
- CBM वाले पार्ट के लिए नापने की जगहें, तरीके और काम शुरू करने वाले threshold क्या हैं?
- मदर प्लांट में कौन-सी मशीनें रैंक A हैं, और उन्हें वहाँ रखने की शर्तें क्या हैं?
- अगर हम बदले गए पार्ट की हालत देखकर अंतराल बढ़ाएँ, तो बदलाव कौन मंज़ूर करेगा, और क्या इसका मशीन की warranty पर असर पड़ेगा?
इस गाइड की सीमाएँ
- failure पैटर्न के प्रतिशत विमान और जहाज़ों की स्टडी से आए हैं। ये रुझान दिखाते हैं, फ़ैक्टरी की मशीनों पर सीधे लागू होने वाले मान नहीं हैं।
- 30–50% बजट घटने की बात NASA ने सुविधाओं में RCM प्रोग्राम के बारे में कही है। आपके नतीजे आपके प्लांट और शुरुआती हालत पर निर्भर करेंगे।
- जापानी क़ानून के उदाहरण (क्रेन, फ़ोर्कलिफ़्ट, high-pressure gas) जापान के नियम हैं। भारत में Factories Act 1948, OSH Code 2020 और आपके राज्य के नियम देखें। क़ानून से जुड़ा कोई भी अंतराल बदलने से पहले अपनी साइट के compliance या EHS वाले से पूछ लें। राज्यों में नियम कब और कैसे लागू हुए, यह इस लेख में तय नहीं किया गया है।
- महत्व के रैंक, उनकी शर्तें और मेंटेनेंस के शब्द कंपनी और इंडस्ट्री के हिसाब से अलग होते हैं। यहाँ के रैंक के उदाहरणों को शुरुआत मानें, स्टैंडर्ड नहीं।
- भारत के BIS (IS) स्टैंडर्ड में इस लेख के JIS शब्दों से सीधे मेल खाने वाला स्टैंडर्ड यहाँ पक्का नहीं किया गया है। "बिल्कुल वही" मानकर न चलें, अपनी कंपनी के स्टैंडर्ड या सप्लायर से पूछें।
- यह लेख मेंटेनेंस का तरीका चुनना समझाता है। यह कोई वर्क इंस्ट्रक्शन नहीं है। असली मेंटेनेंस के काम में अपनी साइट के LOTO (Lockout/Tagout: ताला और टैग) और सेफ्टी नियम मानें।
सारांश
- मेंटेनेंस प्रिवेंटिव और कोरेक्टिव (BM) में बँटता है। प्रिवेंटिव में TBM (समय के हिसाब से) और CBM (हालत के हिसाब से) आते हैं।
- TBM का प्लान बनाना आसान है पर ज़रूरत से ज़्यादा मेंटेनेंस हो जाता है। CBM में बर्बादी कम है, पर हालत नापने का तरीका और साफ़ पास-फ़ेल की शर्त चाहिए।
- ज़्यादातर failure का उम्र से लेना-देना नहीं है, इसलिए सिर्फ़ तय समय पर बदलना उन्हें नहीं रोक सकता।
- इस क्रम से चुनें: क़ानूनी ज़रूरत, failure का असर, नापने लायक संकेत, अंदाज़े में आने वाली उम्र।
- महत्व के रैंक से डिफ़ॉल्ट तय करें, ज़रूरी मशीनों में पार्ट के हिसाब से तरीका दें, और असली data देखकर दोबारा जाँचते रहें।
सही मेल चुनने की शुरुआत इससे होती है कि आप अपनी मशीन को और उसके खराब होने के तरीके को जानें।
FAQ
TBM और CBM में क्या फ़र्क है?
TBM (टाइम-बेस्ड मेंटेनेंस) कैलेंडर या चलने के घंटों के तय अंतराल पर पार्ट की सर्विस या बदलाव करता है। CBM (कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस) तभी काम करता है जब नापने या जाँच से बिगाड़ के संकेत दिखें। दोनों प्रिवेंटिव मेंटेनेंस हैं, फ़र्क बस इतना है कि काम शुरू करने का trigger क्या है।
क्या CBM और प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस एक ही हैं?
ठीक-ठीक नहीं। CBM में नापी हुई हालत पर आधारित हर मेंटेनेंस आता है, ऑपरेटर की जाँच भी। प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस का आम मतलब है monitoring data से अंदाज़ा लगाना कि failure कब होगा, इसलिए इसे CBM का आगे बढ़ा हुआ रूप समझें। जापानी फ़ैक्टरियों में yochi hozen शब्द अक्सर दोनों के लिए ढीले तौर पर चलता है।
खराब होने तक चलाना (run-to-failure) कब ठीक है?
जब failure का असर प्रोडक्शन, सेफ्टी और क्वालिटी पर कम हो, और रोकथाम का काम ठीक करने से ज़्यादा महँगा पड़े। NASA की RCM गाइड के उदाहरणों में 7.5 hp से छोटी गैर-ज़रूरी मोटरें, टॉयलेट के exhaust fan और छोटे वॉटर हीटर हैं। स्पेयर पार्ट और ठीक करने की प्रक्रिया तैयार रखें, और जिस failure से इंसान या पर्यावरण को नुकसान हो सकता है, उस पर इसे कभी न लगाएँ।
CBM में जाँच कितने अंतराल पर करें?
आम अंगूठे का नियम है कि जाँच का अंतराल P-F अंतराल के आधे से कम रखें। P-F अंतराल पहले पकड़ में आने वाले संकेत से मशीन का काम बंद होने तक का समय है। इससे समस्या पकड़ने के एक से ज़्यादा मौके मिलते हैं। अगर P-F अंतराल बहुत छोटा है, तो लगातार monitoring या कोई और तरीका अपनाएँ।
क्या CBM के लिए sensor ज़रूरी हैं?
नहीं। JIS Z 8115 के नोट के अनुसार हालत का आकलन शेड्यूल के मुताबिक़ ऑपरेटर के देखने से भी हो सकता है। अजीब आवाज़ या गर्मी की रोज़ की जाँच, और साफ़ नियम कि "कब मेंटेनेंस को बुलाना है", CBM में गिने जाते हैं। sensor उन ज़रूरी मशीनों पर फ़ायदा देते हैं जहाँ जल्दी पकड़ने की क़ीमत खर्च से ज़्यादा है।
स्रोत
- मेंटेनेंस के शब्द और परिभाषाएँ: JIS Z 8115:2019, dependability की शब्दावली (जापानी); IEC Electropedia, 192-06-12 scheduled maintenance
- कंडीशन-बेस्ड मेंटेनेंस की सोच: Institute of Electrical Engineers of Japan, Power and Energy Society, "Glossary No. 147: Condition-Based Maintenance" (जापानी)
- failure पैटर्न की स्टडी, run-to-failure के उदाहरण, ओवरहॉल का असर, RCM की बचत: NASA, "Reliability-Centered Maintenance Guide for Facilities and Collateral Equipment" (सितंबर 2008)
- P-F curve, पकड़ने के तरीके, महत्व का बँटवारा: ISA InTech, "Improving maintenance by adopting a P-F curve methodology" (2019)
- जाँच का अंतराल और P-F अंतराल: Power-MI, "The P-F Curve: A Cornerstone in Condition-Based Maintenance"
- क्रेन की self-inspection (जापान): JISHA Safety and Health Information Center, Ordinance on Safety of Cranes, Articles 34 और 35 (जापानी)
- फ़ोर्कलिफ़्ट की specified और periodic self-inspection (जापान): e-Gov, Ordinance on Industrial Safety and Health, Articles 151-21, 151-22 और 151-24 (जापानी)
- super-certified साइट की लगातार चलाने की अवधि (जापान): High Pressure Gas Safety Institute of Japan (KHK), "Super Certification and Voluntary Safety Certification" (जापानी)
- भारत में hoist, lift और lifting machine की जाँच: Factories Act 1948, धारा 28 और 29 (Safety provisions, पाठ्य सामग्री)
मूल जापानी लेखयह गाइड जापान के पाठकों के लिए लिखे गए MONOSCOPE के एक लेख पर आधारित है: 設備保全のTBMとCBMの違い|事後保全を含めた選び方と使い分け


