DRBFM क्या है? डिज़ाइन रिव्यू (DR) के 6 Step, टेम्पलेट और उदाहरण

मान लीजिए, आप मानेसर या नीमराना के किसी पार्ट्स प्लांट में प्रोडक्शन टीम लीडर या नए इंजीनियर हैं। आपकी कंपनी किसी जापानी कार कंपनी या उसकी Tier-1 कंपनी को ब्रैकेट सप्लाई करती है। अब रेज़िन (प्लास्टिक) का ग्रेड बदलना है, या मोल्डिंग दूसरी मशीन पर ले जानी है। कस्टमर कहता है कि बदलाव की मंज़ूरी से पहले DRBFM भरकर दो, और आपको "DR मीटिंग" में बुलाया जाता है।
ऐसे में कई सवाल उठते हैं। DR क्या होता है? DRBFM की शीट में क्या लिखना है? और मीटिंग में प्रोडक्शन या मेंटेनेंस की तरफ़ से आपको क्या बोलना है? यह गाइड इन्हीं सवालों के जवाब आसान भाषा में देती है। आखिर में एक भरा हुआ DRBFM उदाहरण (काल्पनिक), अपनी शीट बनाने के लिए कॉलम की गाइड और मीटिंग से पहले की चेकलिस्ट भी है।
- डिज़ाइन रिव्यू (DR) डिज़ाइन की पहले से तय और रिकॉर्ड की जाने वाली जाँच है, जो आम तौर पर मीटिंग के रूप में होती है। इसमें प्रोडक्शन, क्वालिटी, परचेज़ जैसे विभाग डिज़ाइन को देखकर तय करते हैं कि काम अगले स्टेज पर जा सकता है या नहीं।
- हर स्टेज के गेट पर एक DR होता है। छोटे प्रोजेक्ट में भी कम से कम 3 DR ज़रूरी मानें: डिज़ाइन शुरू होने से पहले, ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले, और मास प्रोडक्शन से पहले।
- एक DR के 6 step हैं: (1) मकसद और पास होने की शर्त तय करना, (2) पेपर पहले से भेजना, (3) सही लोगों को बुलाना, (4) ज़रूरी मुद्दों पर ही बात करना, (5) फ़ैसला और हर पॉइंट का रिकॉर्ड, (6) फ़ॉलो-अप और सीख को दूसरे प्रोडक्ट तक ले जाना।
- DRBFM में बात पहले से चल रहे डिज़ाइन में हुए बदलाव, इस्तेमाल या माहौल में आए बदलाव, और उनसे प्रभावित हिस्सों पर रखी जाती है। इसकी शीट का क्रम है: बदलाव → चिंता → कब हो सकता है → कस्टमर पर असर → डिज़ाइन में सुधार → कैसे जाँचेंगे।
- DR को खानापूर्ति बनने से रोकने के लिए "शर्त के साथ पास" और "दोबारा रिव्यू" को सामान्य नतीजा मानें, हर पॉइंट के साथ सबूत माँगें, और हर पॉइंट का एक ज़िम्मेदार व्यक्ति और तारीख तय करें।
विषय-सूची
- डिज़ाइन रिव्यू (DR) क्या है?
- डिज़ाइन रिव्यू कब होता है?
- एक डिज़ाइन रिव्यू के 6 step
- हर स्टेज पर DR में क्या जाँचें
- DR में कौन आता है और कौन क्या देखता है
- DRBFM क्या है?
- DRBFM और FMEA में फ़र्क
- DRBFM का उदाहरण: स्टील ब्रैकेट की जगह रेज़िन (काल्पनिक)
- DRBFM टेम्पलेट: शीट के कॉलम और उनमें क्या लिखें
- DR खानापूर्ति क्यों बन जाता है, और इसे कैसे रोकें
- DR से पहले अपने इंजीनियर या सुपरवाइज़र से पूछने के सवाल
- यह गाइड कहाँ लागू नहीं होती
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
डिज़ाइन रिव्यू (DR) क्या है?
जापानी में इसे sekkei shinsa (設計審査) कहते हैं। जापान का स्टैंडर्ड JIS Z 8115 इसे डिज़ाइन के काम का तय और रिकॉर्ड किया गया रिव्यू कहता है। यानी यह कोई भी सवाल आने पर बुलाई गई अचानक की मीटिंग नहीं है। इसे प्लान में पहले से रखा जाता है और इसका नतीजा लिखा जाता है।
उसी स्टैंडर्ड के नोट के मुताबिक, DR में वे सभी रिव्यू गतिविधियाँ आती हैं जो requirement या डिज़ाइन के काम में कमी ढूँढकर उसे ठीक करवाने के लिए की जाती हैं। इसलिए DR सिर्फ़ ड्रॉइंग की गलती ढूँढना नहीं है। इसमें यह भी देखा जाता है कि कस्टमर की requirement सही समझी गई थी या नहीं।
DR का मकसद वे गड़बड़ियाँ पकड़ना है जो डिज़ाइनर अकेले शायद न देख पाए। इसके लिए प्रोडक्शन, क्वालिटी, परचेज़ और सेल्स के लोग अपनी नज़र से डिज़ाइन देखते हैं। जापान सरकार की संस्था SMRJ की वेबसाइट J-Net21 भी DR को ऐसा तरीका बताती है जिसमें कई विभाग मिलकर डिज़ाइन की क्वालिटी और बनाने की क्वालिटी, दोनों जाँचते हैं।
ISO 9001 से DR का संबंध
ISO 9001 की धारा 8.3.4 ("डिज़ाइन और डेवलपमेंट का कंट्रोल") में रिव्यू, verification और validation ज़रूरी हैं। जो गड़बड़ी मिले उस पर एक्शन लेना और रिकॉर्ड रखना भी ज़रूरी है। भारत में BIS ने इस स्टैंडर्ड को IS/ISO 9001:2015 के नाम से अपनाया है, और BIS की लिस्ट में इसे ISO 9001:2015 के बराबर (identical) बताया गया है। इसीलिए ISO 9001 वाली कंपनियों में अक्सर DR की लिखित प्रक्रिया होती है।
रिव्यू, verification और validation में लोग अक्सर उलझ जाते हैं, जबकि तीनों का मकसद अलग है। DR को समझने का सबसे आसान तरीका यह है: DR तय करता है कि डिज़ाइन अभी जैसा है, वैसा अगले स्टेज पर जा सकता है या नहीं।
तीनों जाँच ही हैं, पर हर एक का सवाल अलग है।
ISO 9001 के मुताबिक ये तीनों अलग-अलग भी हो सकते हैं और साथ में भी। DR में verification के नतीजे देखना आम बात है।
डिज़ाइन रिव्यू कब होता है?
DR डेवलपमेंट के आखिर में एक बार होने वाली मीटिंग नहीं है। बुनियादी नियम यह है कि प्लानिंग से लेकर प्रोडक्शन शुरू होने तक हर स्टेज के गेट पर एक DR हो, और प्रोजेक्ट उसे पास करके ही आगे बढ़े। स्टेज के नाम और गिनती हर कंपनी में अलग होती है। एक आम तरीका 6 स्टेज का है:
हर स्टेज के गेट पर एक DR। पास होने के बाद ही प्रोजेक्ट आगे बढ़ता है।
स्टेज की गिनती और नाम कंपनी और प्रोडक्ट के हिसाब से बदलते हैं। Skillnote और Koto Online (जापानी) की जानकारी से MONOSCOPE ने बनाया।
ये स्टेज डिज़ाइनर के अपने काम के क्रम से मिलते हैं। एक अच्छा तरीका है कि डिज़ाइन के पड़ाव और रिव्यू के पड़ाव एक साथ रखें: कॉन्सेप्ट डिज़ाइन पूरा होते ही DR2, ड्रॉइंग सेट तैयार होते ही DR3। इससे DR अलग से बोझ नहीं लगता, काम का हिस्सा बन जाता है।
गड़बड़ी जितनी जल्दी पकड़ी जाए, सुधार उतना सस्ता पड़ता है। कॉन्सेप्ट स्टेज में पकड़ी गई दिक्कत के लिए शायद सिर्फ़ तरीका बदलना पड़े। वही दिक्कत मोल्ड (डाई) बनने के बाद मिले तो मोल्ड में सुधार या नया मोल्ड बनाना पड़ता है। मास प्रोडक्शन के बाद मिले तो बाज़ार में गए पार्ट तक ठीक करने पड़ सकते हैं। इसलिए DR1 से DR3 को गंभीरता से लेना ही दोबारा काम (rework) कम करने का सबसे छोटा रास्ता है।
छोटे प्रोजेक्ट में कितने DR चाहिए?
छोटे पार्ट बदलाव या मिलते-जुलते प्रोडक्ट के लिए सभी 6 DR पूरी मीटिंग के साथ करना मुमकिन नहीं होता। J-Net21 तीन मौके बताता है: डिज़ाइन शुरू होने से पहले, ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले और मास प्रोडक्शन से पहले। शुरुआत के लिए इन तीन को ज़रूरी बना लें, और जिस प्रोजेक्ट में बहुत कुछ नया हो, उसमें स्टेज बढ़ाएँ।
बदलाव कितना भी छोटा हो, ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले वाला रिव्यू न छोड़ें। ड्रॉइंग एक बार सप्लायर या प्रोडक्शन तक पहुँच गई, तो सुधार का खर्च और उसमें लगने वाले लोग दोनों बहुत बढ़ जाते हैं।
एक डिज़ाइन रिव्यू के 6 step

हर स्टेज पर DR रख देने से कुछ नहीं होता, अगर मीटिंग लापरवाही से चले। नीचे के 6 step एक DR को तैयारी से लेकर एक्शन पूरे होने तक ले जाते हैं। मीटिंग इन 6 में से सिर्फ़ एक step है। नतीजा ज़्यादातर मीटिंग से पहले और बाद के काम से तय होता है।
मीटिंग बीच का एक step है। नतीजा तैयारी और फ़ॉलो-अप से तय होता है।
छोटे बदलाव में Step 1–3 हल्के किए जा सकते हैं, पर Step 5 और 6 न छोड़ें।
Step 1: मकसद और पास होने की शर्त तय करें
पहले यह तय करें कि इस रिव्यू में कौन-सा फ़ैसला करना है। इसे अगले काम से जोड़ें, जैसे "क्या प्रोटोटाइप की ड्रॉइंग जारी कर सकते हैं?" या "क्या लाइन की मशीन का ऑर्डर दे सकते हैं?"
फिर पास होने की शर्त तय करें। जैसे: "कैलकुलेशन में परफ़ॉर्मेंस टारगेट से काफ़ी मार्जिन है" या "सभी बड़े पॉइंट बंद हो चुके हैं, या उनका एक्शन प्लान मंज़ूर है।" शर्त न हो, तो फ़ैसला अक्सर उसकी बात पर चला जाता है जो सबसे ज़ोर से बोलता है।
Step 2: पेपर तैयार करें और पहले से भेजें
सिर्फ़ ड्रॉइंग और स्पेसिफ़िकेशन का ढेर न लगाएँ। सबसे ऊपर लिखें कि पिछले प्रोडक्ट से क्या बदला है और कहाँ चिंता है। इससे कम समय में भी रिव्यू करने वाले सीधे मुद्दे तक पहुँच जाते हैं।
ड्रॉइंग, स्पेसिफ़िकेशन और बाकी पेपर मीटिंग से कुछ दिन पहले भेजें, और सभी से पढ़कर आने को कहें। अगर ज़्यादातर लोग पेपर मीटिंग में पहली बार देखें, तो पूरा समय समझाने में चला जाता है और पॉइंट ऊपर-ऊपर के ही निकलते हैं।
Step 3: मुद्दों के हिसाब से लोगों को बुलाएँ
हर बार वही लोग बुलाने के बजाय, मुद्दों के हिसाब से लोग चुनें। नया मटीरियल है तो मटीरियल या सरफ़ेस ट्रीटमेंट का जानकार, बनाने का नया तरीका है तो प्रोडक्शन इंजीनियरिंग और प्रोडक्शन के लोग। जिस हिस्से में बदलाव हुआ है, उसे अच्छी तरह जानने वाला कोई न कोई ज़रूर हो। हर विभाग क्या देखता है, यह नीचे "कौन आता है" वाले हिस्से में है।
Step 4: बात ज़रूरी मुद्दों पर ही रखें
मीटिंग की शुरुआत में मकसद और पास होने की शर्त दोबारा बताएँ। फिर डिज़ाइनर मुख्य रूप से बदलाव और चिंताएँ रखे। अगर आम जानकारी में ही समय निकल गया, तो असली चर्चा का समय नहीं बचता।
नियम यह रखें कि हर पॉइंट के साथ सबूत हो: पुरानी खराबी, कैलकुलेशन या टेस्ट का नतीजा, सिर्फ़ "मुझे डर है" नहीं। जो मुद्दा मीटिंग में न सुलझे, उसके लिए तय करें कि कौन क्या जाँचेगा और अगला फ़ैसला कैसे होगा, फिर आगे बढ़ें।
Step 5: फ़ैसला करें और हर पॉइंट रिकॉर्ड करें
मीटिंग साफ़ फ़ैसले के साथ खत्म करें: पास, शर्त के साथ पास, या दोबारा रिव्यू। फ़ैसला साफ़ न हो और काम आगे बढ़ जाए, तो DR करने का कोई मतलब नहीं रहता।
पॉइंट मीटिंग के मिनट्स में दबकर न रह जाएँ। हर पॉइंट को अलग से एक एक्शन आइटम लॉग में लिखें, जिसमें ये कॉलम हों:
- क्रम संख्या (No.)
- पॉइंट क्या है
- कितना गंभीर है
- ज़िम्मेदार व्यक्ति
- पूरा करने की तारीख
- क्या एक्शन लिया और नतीजा
ISO 9001 में भी रिव्यू में मिली गड़बड़ी पर एक्शन और उसका रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है।
Step 6: फ़ॉलो-अप करें और सीख आगे ले जाएँ
DR का फ़ायदा तभी है जब पॉइंट पर सच में एक्शन हो। तारीख आने पर लॉग में उस पॉइंट की हालत देखें। पॉइंट तभी बंद करें जब पॉइंट उठाने वाला व्यक्ति या क्वालिटी विभाग मान ले कि एक्शन काफ़ी है।
इसके बाद जो पॉइंट दूसरे प्रोडक्ट पर भी लागू होते हैं, उन्हें डिज़ाइन स्टैंडर्ड और चेकलिस्ट में जोड़ें। जापानी कंपनियाँ इसे yokoten (योकोतेन, 横展), यानी सीख को दूसरी जगहों तक फैलाना कहती हैं। इसी step से तय होता है कि हर रिव्यू में वही पॉइंट बार-बार आएँगे, या कंपनी की डिज़ाइन क्वालिटी धीरे-धीरे बेहतर होगी।
हर स्टेज पर DR में क्या जाँचें

DR में क्या देखना है, यह स्टेज के साथ बदलता है। प्लानिंग स्टेज में टॉलरेंस की बात बहुत जल्दी है, और मास प्रोडक्शन से ठीक पहले प्रोडक्ट के कॉन्सेप्ट पर बहस बहुत देर से। कम समय का सही इस्तेमाल करने के लिए उसी बात पर ध्यान दें जो सिर्फ़ उसी स्टेज पर तय हो सकती है।
प्रोजेक्ट आगे बढ़ने के साथ ध्यान आइडिया से हटकर पार्ट और प्रोसेस पर आता है।
- क्या डेवलपमेंट टारगेट में कस्टमर की requirement आ गई है?
- क्या चुना गया तरीका तकनीकी रूप से मुमकिन है?
- क्या कानून, स्टैंडर्ड और सेफ्टी की requirement पहचान ली गई है?
- क्या टारगेट कॉस्ट और शेड्यूल व्यावहारिक हैं?
- मज़बूती, लाइफ़ और गर्मी के कैलकुलेशन या एनालिसिस का आधार
- टॉलरेंस, असेंबली में आसानी, और शेप बन सकती है या नहीं
- मटीरियल और खरीदे जाने वाले पार्ट का चुनाव, और वे मिलेंगे या नहीं
- BOM ड्रॉइंग से मिलता है; पुरानी खराबियों का ध्यान रखा गया
- क्या नतीजे टारगेट पूरे करते हैं, और कितने मार्जिन से?
- क्या टेस्ट की हालत असली इस्तेमाल जैसी है?
- क्या खराबी का कारण मिला और सुधार ड्रॉइंग में आया?
- प्रोटोटाइप बनाने में आई दिक्कतें
- प्रोसेस capability (क्या प्रोसेस लगातार टॉलरेंस के अंदर पार्ट बना सकता है), इंस्पेक्शन का तरीका, jig-fixture और मशीनें
- वर्क इंस्ट्रक्शन और ऑपरेटर की ट्रेनिंग
- सप्लायर की प्रोडक्शन तैयारी और पहले पीस की जाँच
- शुरुआती खराबी का रुझान और बाज़ार से मिली जानकारी
J-Net21, Skillnote और Koto Online (जापानी) की जानकारी से MONOSCOPE ने बनाया। अपनी पुरानी खराबियाँ जोड़ने से यह चेकलिस्ट और मज़बूत बनती है।
प्लानिंग और कॉन्सेप्ट: requirement और तरीका पक्का करें
इस स्टेज के रिव्यू ड्रॉइंग बनने से पहले होते हैं। इनमें देखा जाता है कि क्या बनाना है और कैसे। मुख्य सवाल यह है कि कस्टमर की requirement सही तरह से डेवलपमेंट टारगेट में बदली गई है या नहीं, और चुना गया तरीका तकनीकी रूप से चल सकता है या नहीं।
कानून, स्टैंडर्ड और सेफ्टी की requirement यहाँ आसानी से छूट जाती है, और बाद में पता चले तो प्रोडक्ट का बुनियादी ढाँचा बदलना पड़ सकता है। इसलिए कॉन्सेप्ट स्टेज में ही लागू होने वाले कानून और स्टैंडर्ड की लिस्ट बना लें। इस स्टेज में सेल्स और क्वालिटी की राय खास काम की होती है।
ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले: क्या यह बन सकता है, और काम करेगा?
ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले वाले रिव्यू में आमतौर पर सबसे ज़्यादा पॉइंट निकलते हैं। देखें कि मज़बूती और लाइफ़ के कैलकुलेशन और CAE (कंप्यूटर पर लोड, गर्मी वगैरह का असर देखने वाली जाँच) के नतीजों में टारगेट से काफ़ी मार्जिन है या नहीं, और उनकी मान्यताएँ (assumptions) सही हैं या नहीं।
प्रोडक्शन की तरफ़ से ये बातें देखें:
- क्या यह शेप बनाई जा सकती है?
- क्या पार्ट असेंबल हो सकता है?
- क्या टॉलरेंस पार्ट के काम और उसे बनाने के खर्च, दोनों के हिसाब से सही है?
डाइमेंशनल टॉलरेंस और ज्योमेट्रिक टॉलरेंस (GD&T) कब कौन-सा इस्तेमाल होता है, यह समझ हो तो ये पॉइंट और सटीक बनते हैं।
ड्रॉइंग के साथ BOM (bill of materials) भी देखें। अगर इंजीनियरिंग BOM में पार्ट नंबर या मात्रा ड्रॉइंग से नहीं मिलते, तो वही गलती मैन्युफ़ैक्चरिंग BOM में भी चली जाती है। E-BOM और M-BOM का फ़र्क ध्यान में रखें और जाँचें कि प्रोडक्शन को दिया जाने वाला सारा डेटा आपस में मेल खाता हो।
प्रोटोटाइप की जाँच: नतीजे और टेस्ट की हालत, दोनों पर सवाल करें
प्रोटोटाइप के रिव्यू में सिर्फ़ यह न देखें कि नतीजे टारगेट तक पहुँचे या नहीं। यह भी देखें कि टेस्ट की हालत असली इस्तेमाल जैसी थी या नहीं। अगर तापमान, वाइब्रेशन या साइकिल की गिनती असली से हल्की थी, तो पास होने का कोई खास मतलब नहीं।
प्रोटोटाइप बनाते समय आई हर खराबी को एक-एक करके देखें: कारण मिला या नहीं, और सुधार ड्रॉइंग या स्पेसिफ़िकेशन में आया या नहीं। प्रोटोटाइप बनाने वाली टीम से यह भी पूछें कि कहाँ असेंबली मुश्किल थी और कौन-से डाइमेंशन ज़्यादा ऊपर-नीचे हो रहे थे।
मास प्रोडक्शन से पहले: क्या प्रोसेस हर बार एक जैसा बना सकता है?
मास प्रोडक्शन से पहले के रिव्यू में ध्यान प्रोडक्ट से हटकर प्रोसेस पर आता है। मुख्य बातें ये हैं:
- मशीन, jig और fixture की तैयारी
- प्रोसेस capability
- इंस्पेक्शन का तरीका
- वर्क इंस्ट्रक्शन और ट्रेनिंग
- बाहर से आने वाले पार्ट के सप्लायर की तैयारी
लॉन्च के बाद शुरुआती प्रोडक्शन के समय को जापानी प्लांट shoki ryudo (शोकी र्यूदो, 初期流動) कहते हैं, यानी शुरुआती प्रोडक्शन पर खास निगरानी। इस दौरान शुरुआती खराबी का रुझान और बाज़ार से मिली जानकारी (शिकायतें, कस्टमर का फ़ीडबैक) देखें, और दिक्कत न बचे तो सामान्य कंट्रोल पर जाएँ। खास निगरानी कब खत्म होगी, इसकी शर्त पहले से तय करें, वरना यह बेवजह लंबी खिंचती रहती है।
DR में कौन आता है और कौन क्या देखता है
DR की क्वालिटी इस पर बहुत टिकी है कि मीटिंग में कौन है। J-Net21 के मुताबिक सेल्स, डिज़ाइन, प्रोडक्शन, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, क्वालिटी कंट्रोल और परचेज़ के मैनेजर आते हैं, और तकनीकी जोखिम ज़्यादा हो तो ऊपर का मैनेजमेंट भी।
ज़रूरी यह है कि हर व्यक्ति अपनी जगह से क्या देखना है, यह जानता हो, सिर्फ़ बुलाया गया है इसलिए न बैठा हो। भूमिकाएँ ऐसे बँटती हैं:
चलाने वाले, पेश करने वाले और रिव्यू करने वाले अलग हों, तो हर भूमिका साफ़ रहती है।
J-Net21 और Skillnote (जापानी) की जानकारी से MONOSCOPE ने बनाया। प्रोजेक्ट के हिसाब से मटीरियल, इलेक्ट्रिकल या सॉफ़्टवेयर के जानकार, या ऊपर का मैनेजमेंट भी जोड़ें।
अक्सर क्वालिटी एश्योरेंस (QA) विभाग ही DR की तैयारी, मीटिंग का तालमेल, रिकॉर्ड और एक्शन का फ़ॉलो-अप संभालता है, मास प्रोडक्शन से पहले के रिव्यू में भी।
कई कंपनियों में डिज़ाइन मैनेजर ही चेयरपर्सन होता है, पर तब शेड्यूल और बजट के दबाव में फ़ैसला अक्सर नरम पड़ जाता है। ज़रूरी प्रोजेक्ट में क्वालिटी या किसी दूसरे विभाग का मैनेजर चेयरपर्सन बन सकता है। डिज़ाइन से एक कदम दूर का व्यक्ति चेयर करे, तो फ़ैसला निष्पक्ष रखना आसान होता है।
प्रोडक्शन या मेंटेनेंस से बुलाए गए हों, तो क्या लेकर जाएँ
अगर आप लाइन से DR में बुलाए गए हैं, तो आपकी सबसे बड़ी ताकत लाइन का अनुभव है। ऊपर बताई गई बातों में से प्रोडक्शन की तरफ़ से ये पॉइंट सबूत के साथ रखें:
- प्रोटोटाइप या पिछले मॉडल में कहाँ असेंबली मुश्किल थी
- कौन-से डाइमेंशन ज़्यादा ऊपर-नीचे होते थे (मापे हुए डेटा के साथ)
- मौजूदा मशीन, jig-fixture और इंस्पेक्शन से नया पार्ट लगातार तय टॉलरेंस में बन सकता है या नहीं, या कुछ नया चाहिए
- वर्क इंस्ट्रक्शन और ऑपरेटर की ट्रेनिंग में क्या बदलना होगा
- पुराने मिलते-जुलते पार्ट में आई खराबी या नियर मिस, जिसका रिकॉर्ड हो
सिर्फ़ "मुझे लगता है दिक्कत होगी" कहने के बजाय रिजेक्शन का डेटा, फ़ोटो या माप साथ ले जाएँ। अगर अभी सबूत न हो, तब भी चिंता बताएँ: उसे जाँच के खुले पॉइंट के रूप में लॉग में लिखवाएँ और तय करवाएँ कि कौन, क्या, कब तक जाँचेगा।
DRBFM क्या है?
डिज़ाइन रिव्यू अक्सर इसलिए भटक जाते हैं क्योंकि उनमें हर चीज़ पर बराबर ध्यान देने की कोशिश होती है। इसका एक जवाब DRBFM (Design Review Based on Failure Mode) है, जो Toyota Motor Corporation से शुरू हुआ। इसे व्यवस्थित तरीके के रूप में तात्सुहिको योशिमुरा (Tatsuhiko Yoshimura) से जोड़ा जाता है, जिन्होंने Toyota में काम किया और Kyushu University में प्रोफ़ेसर भी रहे।
DRBFM इस सोच से शुरू होता है कि दिक्कतें अक्सर तब आती हैं जब पहले से चल रहे, भरोसेमंद डिज़ाइन में बदलाव किया जाता है। टीम पुराने डिज़ाइन के मुकाबले हर बदलाव की लिस्ट बनाती है और चर्चा उन्हीं बदलावों से आने वाली चिंताओं पर रखती है।
यह तरीका अब सिर्फ़ जापान तक सीमित नहीं है। SAE International ने 2013 में SAE J2886 (DRBFM) जारी किया (मौजूदा संस्करण अप्रैल 2023), और AIAG ने 2014 में DRBFM की गाइड CQI-24 जारी की। आपका कस्टमर किस नियम या फ़ॉर्मेट को मानता है, अपने इंजीनियर या कस्टमर से पूछ लें।
बदलाव (henkoten) और हालात का बदलाव (henkaten)
जापानी DRBFM सामग्री में दो तरह के बदलाव अलग रखे जाते हैं। Henkoten (हेनकोतेन, 変更点) वे बदलाव हैं जो जानबूझकर किए गए। Henkaten (हेनकातेन, 変化点) हालात या माहौल के वे बदलाव हैं जो बिना किसी के चाहे हो गए। चित्र 6 की तरह दोनों की लिस्ट बनानी है।
सिर्फ़ वह नहीं जो आपने बदला, बल्कि डिज़ाइन के आसपास जो बदला, उसकी भी लिस्ट बनाएँ।
Nikkei xTECH, "Toyota-style DRBFM में बदलाव संभालने के 4 नज़रिए" (जापानी) से MONOSCOPE ने बनाया।
कई प्लांट में लाइन पर ऑपरेटर, मशीन, मटीरियल या तरीका बदलने को भी "henkaten" कहकर बोर्ड पर दिखाया जाता है। DRBFM में यही शब्द डिज़ाइन के आसपास की हालत के बदलाव के लिए आता है। आपके प्लांट में दोनों किस नाम से और किस फ़ॉर्म में चलते हैं, यह अपने सुपरवाइज़र या क्वालिटी विभाग से पूछ लें।
GD3: Good Design, Good Discussion, Good Dissection
DRBFM तीन बातों को अहम मानता है, जिन्हें GD3 कहते हैं: Good Design, Good Discussion और Good Dissection। यहाँ "Dissection" का मतलब है टेस्ट के बाद पार्ट को खोलकर बारीकी से देखना।
काम में इसका मतलब है: बदलाव छोटे और कुछ हिस्सों तक सीमित रखें, जुड़े हुए लोग हर बदलाव पर ठोस बात करें, और टेस्ट हुए पार्ट को ध्यान से देखकर कमज़ोर जगह ढूँढें।
आम DR में भी यह सोच लाई जा सकती है। बस पेपर में सबसे ऊपर बदलाव और हालात के बदलाव की लिस्ट रख दें। जब रिव्यू करने वाले एक नज़र में देख लें कि पुराने प्रोडक्ट से क्या अलग है, तो वे अपना कम समय वहीं लगाते हैं जहाँ सच में चर्चा चाहिए।
DRBFM और FMEA में फ़र्क
नाम से ही पता चलता है कि DRBFM डिज़ाइन रिव्यू में failure mode की सोच लाता है, इसलिए इसकी तुलना अक्सर FMEA (failure mode and effects analysis) से होती है। Failure mode का मतलब है: पार्ट में किस तरह की खराबी हो सकती है। मुख्य फ़र्क दायरे का है: DRBFM में बात सिर्फ़ बदलाव और उनसे प्रभावित हिस्सों तक रहती है।
| FMEA | DRBFM | |
|---|---|---|
| दायरा | पूरे डिज़ाइन या प्रोसेस के failure mode एक साथ पहचानता है | भरोसेमंद डिज़ाइन में हुए बदलाव और उनसे प्रभावित हिस्सों तक सीमित |
| कहाँ ज़्यादा काम का | नया डिज़ाइन और नया हिस्सा | पुराना डिज़ाइन, जिसमें कुछ खास बदलाव हैं |
| मुख्य नतीजा | failure mode, उनके असर और एक्शन का व्यवस्थित एनालिसिस | हर बदलाव की चिंता, डिज़ाइन में सुधार और जाँच का तरीका, रिव्यू में सहमति के साथ |
| आपस में संबंध | पहले से बना FMEA यह समझने में मदद करता है कि बदलाव का असर कहाँ तक जाता है। AIAG के मुताबिक DRBFM बेसलाइन डिज़ाइन बनने के बाद के इंजीनियरिंग बदलावों पर ध्यान देता है, और DRBFM के लिए FMEA ज़रूरी नहीं। SAE J2886 कहता है कि DRBFM, FMEA की जगह लेने के लिए नहीं है। AIAG में DRBFM (CQI-24) और AIAG & VDA FMEA Handbook अलग-अलग दस्तावेज़ हैं। | |
काम का बोझ कम रखने का एक व्यावहारिक तरीका: नए डिज़ाइन के लिए FMEA से पूरा कवर करें, और पुराने डिज़ाइन के बदलावों के लिए DRBFM से ध्यान केंद्रित करें। अगर कस्टमर दोनों माँगता है, तो पूछें कि दोनों दस्तावेज़ आपस में कैसे जुड़ने चाहिए।
DRBFM का उदाहरण: स्टील ब्रैकेट की जगह रेज़िन (काल्पनिक)
DRBFM शीट में हर बदलाव के लिए लिखा जाता है कि चिंता क्या है, यह कब हो सकती है, कस्टमर पर क्या असर होगा, और डिज़ाइन में क्या सुधार करके इसे दूर करेंगे।
शीट पहले डिज़ाइनर भरता है। DR के दिन दूसरे विभागों के लोग वे चिंताएँ और कारण जोड़ते हैं जो डिज़ाइनर से छूट गए, और टीम डिज़ाइन सुधार और जाँच के तरीके पर सहमत होती है। स्टील ब्रैकेट को रेज़िन में बदलने पर शीट कुछ ऐसी दिख सकती है:
| कॉलम | उदाहरण |
|---|---|
| बदलाव / हालात का बदलाव | इंजन के पास लगने वाले ब्रैकेट का मटीरियल, वज़न कम करने के लिए, कोल्ड-रोल्ड स्टील शीट (JIS SPCC) से 30% ग्लास फ़ाइबर वाले नायलॉन (PA66-GF30) में बदला |
| चिंता (failure mode) | (1) बोल्ट का जोड़ ढीला हो जाए। (2) माउंटिंग होल खिसक जाएँ और पार्ट लग न पाए। |
| कब हो सकता है? (कारण) | (1) लगातार गर्म रहने वाली जगह पर बोल्ट का दबाव रेज़िन पर लगातार रहता है; रेज़िन धीरे-धीरे दबता है (creep) और कसाव कम हो जाता है। (2) नमी वाले माहौल में रेज़िन नमी सोखता है और उसके डाइमेंशन बदल जाते हैं। |
| कस्टमर पर असर | आवाज़ और वाइब्रेशन। सबसे बुरी हालत में पार्ट गिर सकता है। |
| चिंता दूर करने के लिए डिज़ाइन सुधार | बोल्ट के जोड़ में धातु (मेटल) के कॉलर लगाएँ, ताकि कसाव का दबाव कॉलर उठाए। माउंटिंग होल को लंबे स्लॉट बनाएँ, ताकि गर्मी से फैलाव और नमी से डाइमेंशन बदलने की गुंजाइश रहे। |
| जाँच और पुष्टि | ऊँचे तापमान में रखने के बाद कसाव बचा रहता है या नहीं, इसका टेस्ट; ऊँचे तापमान और नमी में रखने के बाद डाइमेंशन की माप; असली मशीन पर वाइब्रेशन टेस्ट |
| ज़िम्मेदार व्यक्ति और तारीख | डिज़ाइन इंजीनियर (टेस्ट, टेस्ट इंजीनियर करेगा)। अगले DR तक नतीजे बताने हैं। |
सबसे अहम कॉलम "कब हो सकता है?" है, और इसमें ठोस हालत लिखनी चाहिए। "मज़बूती कम है" लिखने से बात आगे नहीं बढ़ती। "लगातार गर्म रहने वाली जगह पर जब बोल्ट का दबाव लगातार रहे" लिखने से हालत साफ़ होती है, और यह तय करना भी आसान होता है कि टेस्ट कैसे करें।
बदलाव मटीरियल का ही क्यों न हो, उसे उस माहौल के साथ देखें जिसमें पार्ट रहेगा, जैसे तापमान और नमी। इससे चिंताएँ छूटती नहीं।
DRBFM टेम्पलेट: शीट के कॉलम और उनमें क्या लिखें
अगर कस्टमर ने कोई फ़ॉर्म नहीं दिया है, तो इस लेआउट से शुरू करें। अगर कस्टमर का अपना DRBFM फ़ॉर्म है, तो वही इस्तेमाल करें, क्योंकि कॉलम के नाम और क्रम कंपनी के हिसाब से अलग होते हैं। इसमें ऊपर के उदाहरण वाले कॉलम हैं, साथ में ट्रैकिंग के लिए "No." और "नतीजा और हालत" के कॉलम जोड़े गए हैं।
| कॉलम | क्या लिखें | अक्सर दिखने वाली कमज़ोर एंट्री |
|---|---|---|
| No. | हर चिंता की एक लाइन, ताकि हर एक को बंद होने तक ट्रैक किया जा सके | कई चिंताएँ एक ही लाइन में |
| बदलाव / हालात का बदलाव | पुराने डिज़ाइन से क्या बदला: डिज़ाइन, मटीरियल, प्रोसेस, या इस्तेमाल और माहौल, और क्यों | "छोटा बदलाव", पुराने पार्ट से कोई तुलना नहीं |
| चिंता (failure mode) | इस बदलाव की वजह से पार्ट में क्या गड़बड़ हो सकती है | "कोई चिंता नहीं", बिना कारण बताए |
| कब हो सकता है? (कारण) | ठोस हालत: तापमान, नमी, लोड, समय, इस्तेमाल या असेंबली का तरीका | "मज़बूती कम है", बिना किसी हालत के |
| कस्टमर पर असर | आखिरी इस्तेमाल करने वाले या अगले असेंबली करने वाले को क्या महसूस होगा | सिर्फ़ पार्ट पर असर |
| डिज़ाइन सुधार | डिज़ाइन में वह बदलाव जो चिंता को हटाए या कम करे | डिज़ाइन सुधार की जगह "ध्यान रखेंगे" या "इंस्पेक्शन करेंगे" |
| जाँच और पुष्टि | वह टेस्ट या एनालिसिस जो दिखाए कि सुधार काम करता है, उसकी हालत के साथ | टेस्ट की हालत असली इस्तेमाल से हल्की |
| ज़िम्मेदार व्यक्ति और तारीख | एक व्यक्ति का नाम और तारीख, अक्सर अगला DR | व्यक्ति की जगह विभाग का नाम; कोई तारीख नहीं |
| नतीजा और हालत | टेस्ट का नतीजा, फ़ैसला, और पॉइंट बंद होने की तारीख | मीटिंग के बाद खाली छोड़ दिया |
DR खानापूर्ति क्यों बन जाता है, और इसे कैसे रोकें

जिन कंपनियों में DR की प्रक्रिया है, वहाँ भी अक्सर शिकायत सुनाई देती है: "मीटिंग तो होती है, पर कुछ निकलता नहीं" या "पॉइंट तो आते हैं, पर कोई ठीक नहीं करता।" J-Net21 भी चेतावनी देता है कि DR सिर्फ़ रस्म न बन जाए। जापानी में इसे keigaika (केइगाइका, 形骸化) कहते हैं: प्रक्रिया बाहर से चलती दिखती है, पर अंदर से सिर्फ़ खानापूर्ति रह जाती है। इसके लक्षण पहचाने जा सकते हैं, और हर लक्षण का कारण ढूँढने से इलाज भी मिल जाता है।
ज़्यादातर लक्षण मीटिंग से पहले और बाद के छूटे हुए कामों से आते हैं।
J-Net21, Koto Online और Skillnote (जापानी) की जानकारी से MONOSCOPE ने बनाया।
मीटिंग करना ही मकसद बन गया है
असली दिक्कत यह है कि DR करना ही अपने आप में मकसद बन जाता है। अगर शेड्यूल में सिर्फ़ DR की तारीख तय हो और किसी को पता न हो कि मीटिंग में क्या फ़ैसला करना है, तो वह प्रेज़ेंटेशन बन जाती है और नतीजा हमेशा "पास" होता है।
पहला इलाज यह है कि शर्त के साथ पास और दोबारा रिव्यू को फ़ेल न मानें, सामान्य नतीजा मानें। अगर शेड्यूल में दोबारा रिव्यू की गुंजाइश पहले से रखी हो, तो फ़ैसला नरम करने की कोई वजह नहीं रहती।
पॉइंट बिना सबूत के आते हैं
Koto Online के मुताबिक DR के खानापूर्ति बनने के तीन कारण हैं:
- बिना सोचे, जो मन में आया वैसे पॉइंट
- पेपर पढ़े बिना मीटिंग में आना
- नियम हर बार अलग होना
ऐसे पॉइंट लगातार आते रहें, तो डिज़ाइनर का समय हर एक का जवाब देने में जाता है और असली ज़रूरी पॉइंट दब जाते हैं। नियम बनाएँ कि पॉइंट सबूत के साथ आएँ: पुरानी खराबी, कैलकुलेशन या टेस्ट का नतीजा। जो चिंता उसी समय साबित न हो सके, उसे जाँच का खुला पॉइंट बनाएँ। कौन, क्या, कब तक जाँचेगा, यह तय हो जाए तो चर्चा आगे बढ़ती रहती है।
रिव्यू दोष देने की जगह बन गया है
जब DR डिज़ाइनर की गलती गिनाने की जगह बन जाता है, तो डिज़ाइनर अपनी चिंताएँ पेपर में लिखना बंद कर देते हैं। यह DR की सबसे खराब हालत है: जिस रिव्यू में कोई चिंता सामने ही नहीं आती, वह गड़बड़ी पकड़ने का अपना मौका खुद गँवा देता है।
Skillnote भी आलोचना के बजाय सुधार के सुझाव वाले पॉइंट पर ज़ोर देता है। चेयरपर्सन माहौल बदल सकता है: जो डिज़ाइनर खुद चिंता बताए उसकी तारीफ़ करे, और रिव्यू करने वालों से हर पॉइंट के साथ कोई दूसरा रास्ता या जाँच का तरीका भी माँगे।
रिकॉर्ड अगली बार काम नहीं आता
DR में लिखे गए पॉइंट और एक्शन अगले प्रोजेक्ट के लिए कीमती जानकारी हैं। J-Net21 भी कहता है कि DR के नतीजे लिखे जाएँ, व्यवस्थित किए जाएँ और अगले प्रोडक्ट के डेवलपमेंट में इस्तेमाल हों।
एक्शन लॉग को प्रोडक्ट के साथ फ़ाइल में बंद न करें। पॉइंट को प्रकार के हिसाब से गिनें, बार-बार आने वाले पॉइंट चेकलिस्ट और डिज़ाइन स्टैंडर्ड में जोड़ें, और DR की प्रक्रिया की भी समीक्षा का मौका रखें, चाहे साल में एक बार ही सही। इससे DR की प्रक्रिया धीरे-धीरे बेहतर होती है।
DR से पहले अपने इंजीनियर या सुपरवाइज़र से पूछने के सवाल
अगर आपको DR या DRBFM के काम में बुलाया गया है, तो शीट भरने या मीटिंग में जाने से पहले ये सवाल पूछ लें:
- इस प्रोजेक्ट में किन बदलावों के लिए DRBFM चाहिए: डिज़ाइन, मटीरियल, प्रोसेस, प्लांट, या सप्लायर का बदलाव?
- कस्टमर का कोई तय DRBFM फ़ॉर्म है? शीट किस भाषा में भरनी है?
- कस्टमर किस नियम को मानता है: अपने अंदर के नियम, SAE J2886, या AIAG CQI-24?
- क्या DFMEA या PFMEA भी अपडेट करना है? वह DRBFM से कैसे जुड़ेगा?
- मीटिंग में कस्टमर की तरफ़ से कौन आएगा, और हमारी तरफ़ से प्रोडक्शन और क्वालिटी के कौन लोग जाएँगे?
- शीट मीटिंग से कितने दिन पहले चाहिए, और कमेंट कैसे मिलेंगे?
- पास किसे माना जाएगा: क्या तय तारीख वाले खुले पॉइंट चलेंगे?
- जाँच के लिए कौन-से टेस्ट और किस हालत में चाहिए? क्या कच्चा डेटा (raw data) भी देना है?
- क्या इस बदलाव के लिए कस्टमर को अलग से बदलाव की सूचना या मंज़ूरी चाहिए? किस क्रम में?
रिव्यू से पहले की चेकलिस्ट
- रिव्यू का मकसद और पास होने की शर्त लिखी हुई है
- बदलाव और हालात के बदलाव (डिज़ाइन, मटीरियल, प्रोसेस, इस्तेमाल और माहौल) की लिस्ट पेपर में सबसे ऊपर है
- हर बदलाव की तुलना पुराने, भरोसेमंद डिज़ाइन से की गई है
- हर "कब हो सकता है?" में ठोस हालत लिखी है
- हर चिंता के लिए सिर्फ़ इंस्पेक्शन नहीं, डिज़ाइन सुधार भी लिखा है
- टेस्ट की हालत असली इस्तेमाल जैसी है
- पेपर मीटिंग से कुछ दिन पहले भेजे गए
- बदले गए हिस्से को जानने वाले लोग बुलाए गए
- एक्शन लॉग तैयार है, जिसमें ज़िम्मेदार व्यक्ति और तारीख के कॉलम हैं
- (प्रोडक्शन की तरफ़ से) असेंबली की दिक्कत, डाइमेंशन का डेटा और पुरानी खराबी का रिकॉर्ड साथ है
यह गाइड कहाँ लागू नहीं होती
- हर कंपनी का तरीका अलग है। रिव्यू के स्टेज की गिनती, उनके नाम, DRBFM फ़ॉर्म और पास की शर्त कंपनी, इंडस्ट्री और कस्टमर के हिसाब से बदलती है। आपके कस्टमर की requirement सबसे पहले है।
- यह SAE J2886 या AIAG CQI-24 का सार नहीं है। हमने इन दोनों का पूरा पाठ नहीं पढ़ा है। अगर कस्टमर इनमें से किसी का नाम ले, तो उसी दस्तावेज़ से काम करें।
- शीट का उदाहरण काल्पनिक है। मटीरियल, कारण और टेस्ट सिर्फ़ यह दिखाने के लिए हैं कि कॉलम कैसे भरें। यह असली रेज़िन ब्रैकेट के लिए डिज़ाइन की सलाह नहीं है।
- सेफ्टी और कानून के फ़ैसले ज़िम्मेदार लोगों के हैं। DR बता सकता है कि कौन-से कानून और स्टैंडर्ड लागू होते हैं, पर पालन का फ़ैसला आपकी इंजीनियरिंग, सेफ्टी और लीगल टीम करती है। प्लांट की सेफ्टी के लिए भारत में Factories Act 1948 और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 (OSH Code) जैसे नियम हैं; आपके प्लांट पर क्या लागू है, यह सेफ्टी टीम से पूछें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
DRBFM का पूरा नाम क्या है?
DRBFM का पूरा नाम Design Review Based on Failure Mode है। यह Toyota से शुरू हुआ डिज़ाइन रिव्यू का तरीका है, जिसमें बात पहले से चल रहे डिज़ाइन में हुए बदलावों पर रखी जाती है। SAE ने इसे J2886 के रूप में जारी किया है, और AIAG की DRBFM गाइड CQI-24 है।
DRBFM और FMEA में क्या फ़र्क है?
FMEA सभी failure mode एक साथ पहचानता है, जबकि DRBFM बात को पुराने डिज़ाइन से हुए बदलाव और उनसे प्रभावित हिस्सों तक रखता है। आम तौर पर नए डिज़ाइन के लिए FMEA और पुराने डिज़ाइन के बदलावों के लिए DRBFM ठीक रहता है। पहले से बना FMEA यह समझने में मदद करता है कि बदलाव का असर कहाँ तक जाता है।
एक प्रोजेक्ट में कितने डिज़ाइन रिव्यू चाहिए?
बुनियादी नियम है कि हर स्टेज के गेट पर एक DR हो; प्लानिंग से शुरुआती प्रोडक्शन तक 6 स्टेज एक आम तरीका है। छोटे प्रोजेक्ट में 3 DR ज़रूरी रखें: डिज़ाइन शुरू होने से पहले, ड्रॉइंग रिलीज़ से पहले और मास प्रोडक्शन से पहले। बहुत कुछ नया हो, तभी और बढ़ाएँ।
क्या ISO 9001 में डिज़ाइन रिव्यू ज़रूरी है?
हाँ। ISO 9001 की धारा 8.3.4 में डिज़ाइन और डेवलपमेंट के दौरान रिव्यू, verification और validation, मिली गड़बड़ी पर एक्शन, और इनका रिकॉर्ड ज़रूरी है। भारत में यह स्टैंडर्ड BIS के IS/ISO 9001:2015 के रूप में भी है। ये तीनों अलग-अलग या साथ में किए जा सकते हैं, और DR में verification के नतीजे देखना आम है।
प्रोडक्शन का टीम लीडर DR में क्या योगदान दे सकता है?
लाइन का अनुभव, सबूत के साथ: प्रोटोटाइप या पिछले मॉडल में कहाँ असेंबली मुश्किल थी, कौन-से डाइमेंशन ज़्यादा ऊपर-नीचे होते थे, और मौजूदा मशीन व jig से पार्ट लगातार तय टॉलरेंस में बन सकता है या नहीं। पुरानी खराबी या नियर मिस का रिकॉर्ड हो, तो वह भी साथ ले जाएँ।
स्रोत
- डिज़ाइन रिव्यू की परिभाषा: JIS Z 8115:2019 dependability शब्दावली, 192-12-09 "design review" (जापानी)
- DR का समय, सदस्य और सावधानियाँ: J-Net21 (SMRJ), "प्रोडक्ट डेवलपमेंट में डिज़ाइन रिव्यू" (जापानी)
- ISO 9001 धारा 8.3.4: pdcatovision.com, "डिज़ाइन और डेवलपमेंट रिव्यू की requirement" (जापानी)
- IS/ISO 9001:2015: BIS, Know Your Standards
- स्टेज के हिसाब से DR और उसे चलाने का तरीका: Skillnote, "डिज़ाइन रिव्यू (DR) क्या है?" (जापानी)
- DR चलाना और खानापूर्ति बनने के कारण: Koto Online, "डिज़ाइन रिव्यू क्या है?" (जापानी)
- DRBFM का परिचय: Toyota Enterprise, DRBFM कोर्स (जापानी); Wikipedia, "Design review based on failure mode"
- बदलाव के 4 नज़रिए: Nikkei xTECH, "Toyota-style DRBFM में बदलाव संभालने के 4 नज़रिए" (जापानी)
- SAE J2886: SAE International, J2886_202304 Design Review Based on Failure Modes (DRBFM)
- AIAG CQI-24: AIAG, CQI-24 DRBFM Reference Guide
मूल जापानी लेखयह गाइड जापान के पाठकों के लिए लिखे गए MONOSCOPE के एक लेख पर आधारित है: デザインレビュー(DR)の進め方|段階別のチェック観点・DRBFMの記入例と形骸化の防ぎ方


