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202626/10

जापानी फ़ैक्टरी में क्वालिटी का काम: 8 स्टेप में पूरा प्रोसेस

मेंटेनेंस और क्वालिटीअपडेट: 26/10/202644 मिनट में पढ़ें

हो सकता है आप गुरुग्राम, मानेसर या निमराना की किसी जापानी कंपनी में काम करते हों, या ऐसी कंपनी को पार्ट सप्लाई करने वाली फ़ैक्टरी में हों। वहाँ आपने सुना होगा: "क्वालिटी प्लान (hinshitsu keikaku-sho) दीजिए", "QC process chart (QC kotei-hyo) कहाँ है?", या "मास प्रोडक्शन judgement (ryosan iko hantei) कब है?"। जब ग्राहक के पास कोई गड़बड़ी पहुँचती है, तब वे जल्दी पहली रिपोर्ट माँगते हैं, जिसमें साफ़ लिखा हो कि गड़बड़ी "क्यों बनी" और "बाहर क्यों निकल गई"।

ये सारी माँगें एक ही workflow के अलग-अलग स्टेप से आती हैं। जापानी कंपनी में क्वालिटी का काम 8 स्टेप के एक चक्र की तरह देखा जा सकता है, जो पहला पार्ट बनने से पहले शुरू होता है और प्रोडक्ट ग्राहक तक पहुँचने के बाद भी चलता रहता है। जब आपको पता हो कि माँग किस स्टेप की है, तो समझ आ जाता है कि ग्राहक किस चीज़ को बचाना चाहता है और अच्छा जवाब कैसा होना चाहिए।

इस लेख में 8 स्टेप तीन हिस्सों में बताए गए हैं: मास प्रोडक्शन से पहले, मास प्रोडक्शन के दौरान और शिपमेंट के बाद। हर स्टेप में बताया है कि कौन-से दस्तावेज़ और टूल इस्तेमाल होते हैं, कौन शामिल होता है और आम गलतियाँ क्या हैं। आख़िर में हर हिस्से के लिए जापानी साइड से पूछने लायक सवालों की लिस्ट भी है।

मुख्य बातें
  • Workflow में 8 स्टेप हैं, तीन हिस्सों में। पहले क्वालिटी प्लान, डिज़ाइन रिव्यू और रिस्क की जाँच, और मास प्रोडक्शन का फ़ैसला। फिर incoming, in-process और outgoing जाँच। आख़िर में शिकायत पर कार्रवाई और क्वालिटी ऑडिट।
  • क्वालिटी का काम जितना पहले हो, उतना ज़्यादा असर करता है। ड्रॉइंग पर पकड़ी गई गड़बड़ी में शायद एक लाइन बदलनी पड़े। प्रोडक्शन शुरू होने के बाद पकड़ी जाए तो मोल्ड और मशीनें ठीक करनी पड़ सकती हैं, या भेजे जा चुके प्रोडक्ट वापस मँगाने पड़ सकते हैं।
  • जाँच का मक़सद सिर्फ़ खराब पीस छाँटना नहीं है। असली मक़सद प्रोसेस की गड़बड़ी जल्दी पकड़ना है। खराब पीस को प्रोसेस के अंदर ही रोकना चाहिए, आख़िरी जाँच तक नहीं पहुँचने देना चाहिए।
  • ग्राहक गड़बड़ी बताए तो उम्मीद रखिए कि आपसे गड़बड़ी होने का कारण और बाहर निकल जाने का कारण (ryushutsu genin, यानी जाँच में क्यों नहीं पकड़ी गई) अलग-अलग माँगा जाएगा। साथ में अस्थायी उपाय, पक्का उपाय, असर की जाँच और yokoten (दूसरे मिलते-जुलते प्रोडक्ट और प्रोसेस तक उपाय फैलाना) भी दिखाना होगा।
  • मास प्रोडक्शन वाले और ऑर्डर पर बनने वाले प्रोडक्ट में flow वही रहता है, बस ज़ोर अलग जगह होता है। कौन-सा स्टैंडर्ड लागू होगा, यह ग्राहक की इंडस्ट्री तय करती है।
विषय-सूची
  1. पूरा workflow एक नज़र में
  2. मास प्रोडक्शन से पहले: क्वालिटी बनाना
  3. मास प्रोडक्शन के दौरान: क्वालिटी टिकाए रखना
  4. शिपमेंट के बाद: शिकायत पर कार्रवाई और सीख
  5. प्रोडक्ट और कंपनी के हिसाब से workflow में फ़र्क
  6. हर हिस्से में जापानी साइड से पूछने लायक सवाल
  7. इस लेख की सीमाएँ
  8. FAQ
  9. स्रोत

पूरा workflow एक नज़र में

डिज़ाइन इंजीनियर और क्वालिटी एश्योरेंस इंजीनियर प्रोटोटाइप पार्ट और ड्रॉइंग देखकर रिस्क ढूँढ रहे हैं

क्वालिटी का काम प्रोडक्ट की पूरी ज़िंदगी के साथ इसी क्रम में चलता है:

क्वालिटी प्लान → डिज़ाइन रिव्यू और रिस्क की जाँच → मास प्रोडक्शन का फ़ैसला → Incoming जाँच → प्रोसेस के दौरान क्वालिटी कंट्रोल → Outgoing जाँच → शिकायत पर कार्रवाई और दोबारा न होने का उपाय → क्वालिटी ऑडिट और सुधार

चित्र 1: क्वालिटी एश्योरेंस और क्वालिटी कंट्रोल का workflow

काम तीन हिस्सों में बँटा है: मास प्रोडक्शन से पहले, मास प्रोडक्शन के दौरान और शिपमेंट के बाद।

मास प्रोडक्शन से पहले
01क्वालिटी प्लानक्वालिटी का टारगेट तय करना, और कब व कैसे जाँचना है यह तय करना
02डिज़ाइन रिव्यू और रिस्क की जाँचड्रॉइंग और प्रोटोटाइप में छिपी गड़बड़ियाँ पहले ढूँढना
03मास प्रोडक्शन का फ़ैसलापक्का करना कि प्रोसेस लगातार अच्छे पार्ट बना सकता है
मास प्रोडक्शन के दौरान
04Incoming जाँचसप्लायर से आए पार्ट और मटीरियल जाँचना
05प्रोसेस के दौरान क्वालिटी कंट्रोलप्रोसेस का डेटा देखना और गड़बड़ी जल्दी पकड़ना
06Outgoing जाँचभेजने से पहले आख़िरी पास/फ़ेल तय करना
शिपमेंट के बाद
07शिकायत पर कार्रवाई और दोबारा न होने का उपायअसली कारण ढूँढना और उपाय की रिपोर्ट देना
08क्वालिटी ऑडिट और सुधारअपनी और सप्लायर की व्यवस्था जाँचकर सुधारना

कंपनी और प्रोडक्ट के हिसाब से स्टेप के नाम और बँटवारा अलग हो सकता है। मास प्रोडक्शन के दौरान और शिपमेंट के बाद का काम साथ-साथ चलता है।

तीनों हिस्से याद रखने का आसान तरीक़ा: मास प्रोडक्शन से पहले क्वालिटी को बनाया जाता है, मास प्रोडक्शन के दौरान क्वालिटी को टिकाए रखा जाता है, और शिपमेंट के बाद जो बिगड़ा उसे ठीक किया जाता है और सीख अगले प्रोडक्ट में लगाई जाती है।

नीचे की टेबल में वे शब्द हैं जो आप जापानी ग्राहक या पैरेंट कंपनी से सबसे ज़्यादा सुन सकते हैं। ऑटोमोबाइल ग्राहकों के साथ काम किया हो तो यह flow जाना-पहचाना लगेगा, क्योंकि यह APQP (Advanced Product Quality Planning) के पाँच phase के क़रीब है। APQP आपके काम में नहीं आता तो आख़िरी कॉलम छोड़ सकते हैं।

स्टेपजापानी शब्दआपसे क्या माँगा जा सकता हैसबसे नज़दीकी APQP phase
क्वालिटी प्लानhinshitsu keikakuक्वालिटी प्लान, ज़रूरी characteristics की लिस्ट, जाँच का शेड्यूलPlan and define program
डिज़ाइन रिव्यूsekkei shinsa (DR)FMEA, रिव्यू के पॉइंट और उन पर एक्शनProduct design and development
मास प्रोडक्शन का फ़ैसलाryosan iko hanteiप्रोसेस capability का डेटा (Cpk), inspection standard, QC process chartProcess design and development; product and process validation
Incoming जाँचukeire kensaसप्लायर का inspection certificate—
प्रोसेस के दौरान कंट्रोलkotei-nai hinshitsu kanriकंट्रोल चार्ट, बदलाव की सूचना—
Outgoing जाँचshukka kensaजाँच के रिकॉर्ड, inspection certificate—
शिकायत पर कार्रवाईfuguai taio, saihatsu boshiपहली रिपोर्ट, कारण और उपाय वाली जाँच रिपोर्टFeedback, assessment, and corrective action
क्वालिटी ऑडिटhinshitsu kansaअंदरूनी और सप्लायर ऑडिट के रिकॉर्डFeedback, assessment, and corrective action

QC process chart में हर प्रोसेस स्टेप के साथ उसके कंट्रोल आइटम, जाँच का तरीक़ा और जाँच की बारंबारता लिखी जाती है। यह control plan के सबसे नज़दीक का दस्तावेज़ है, पर बिल्कुल वही नहीं। कॉलम और डिटेल कंपनी के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए ग्राहक से उनका टेम्प्लेट माँग लीजिए।

मास प्रोडक्शन से पहले: क्वालिटी बनाना

क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर कोऑर्डिनेट मेज़रिंग मशीन पर पार्ट का नाप ले रहा है

इस दौर में प्रोडक्शन के पार्ट अभी बने ही नहीं होते, ज़्यादा से ज़्यादा प्रोटोटाइप होते हैं। यहाँ जो भी गड़बड़ी ठीक हो जाती है, उससे आगे रिजेक्शन और शिकायतें कम होती हैं।

इंजीनियर आम तौर पर मानते हैं कि गड़बड़ी जितनी देर से पकड़ी जाए, उसे ठीक करने में उतना ज़्यादा समय और पैसा लगता है। ड्रॉइंग पर शायद एक लाइन बदलनी पड़े। प्रोडक्शन शुरू होने के बाद वही गड़बड़ी मोल्ड और मशीनों की मरम्मत तक, या भेजे जा चुके प्रोडक्ट वापस मँगाने तक पहुँच सकती है। यानी क्वालिटी का काम जितना ऊपर (शुरुआत में) हो, उतना फ़ायदा देता है।

क्वालिटी प्लान

नया प्रोडक्ट बनाने का फ़ैसला होते ही क्वालिटी टीम ग्राहक की माँगें, कानूनी नियम और पुरानी गड़बड़ियाँ देखकर क्वालिटी का टारगेट तय करती है। hinshitsu keikaku-sho (क्वालिटी प्लान) में लिखा जाता है कि कौन-से characteristics ज़रूरी माने जाएँगे और उन्हें कब, किस तरीक़े से जाँचा जाएगा।

इसमें डिज़ाइन, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग और सेल्स शामिल रहते हैं। इस स्टेप का काम ग्राहक की माँग को फ़ैक्टरी की अपनी भाषा में बदलना है, यानी टॉलरेंस, टेस्ट की शर्तें और जाँच के आइटम, जिन पर प्लांट सीधे काम कर सके। माँग गलत समझ ली जाए तो बाद में बहुत सारा काम दोबारा करना पड़ता है, इसलिए जो बात साफ़ न हो उसे अभी पूछ लिया जाता है।

प्लान में शेड्यूल भी तय होता है: प्रोटोटाइप और टेस्ट कब होंगे, और हर स्टेज पर मंज़ूरी कौन देगा। क्वालिटी की जाँच के पॉइंट डेवलपमेंट के शेड्यूल के ऊपर रख दिए जाएँ तो कोई जाँच छूटती नहीं और टलती भी नहीं।

डिज़ाइन रिव्यू और रिस्क की जाँच

ड्रॉइंग या प्रोटोटाइप तैयार होने पर क्वालिटी टीम डिज़ाइन रिव्यू (DR, sekkei shinsa) में क्वालिटी की नज़र से अपनी राय देती है। FMEA (Failure Mode and Effects Analysis) जैसे तरीक़ों से देखा जाता है कि डिज़ाइन में कहाँ ख़राबी आने का डर है और ख़राबी आई तो क्या होगा। फिर तय किया जाता है कि कौन-सा उपाय पहले होगा।

क्वालिटी एश्योरेंस इंजीनियर से उम्मीद रहती है कि वह पुरानी गड़बड़ियों और शिकायतों का तजुर्बा साथ लाए। आम गलती यह है कि FMEA सिर्फ़ कागज़ भरने का काम बनकर रह जाता है। FMEA तभी काम का है जब वह असली उपाय और टेस्ट तक पहुँचे।

रिव्यू में क्वालिटी इंजीनियर उन बातों पर भी जानबूझकर सवाल करते हैं जिन्हें डिज़ाइनर ठीक मानता है। कुछ बातें सुनने में अच्छी नहीं लगतीं। फिर भी इस स्टेज पर बहस करना, प्रोडक्शन शुरू होने के बाद वही गड़बड़ी सँभालने से बहुत सस्ता पड़ता है।

मास प्रोडक्शन का फ़ैसला

लाइन तैयार होने पर टीम प्रोटोटाइप और पहली प्रोडक्शन के पार्ट नापती है, ताकि पक्का हो सके कि प्रोसेस लगातार स्पेसिफ़िकेशन के अंदर पार्ट बना सकता है। साथ में यह भी देखा जाता है कि ये दस्तावेज़ तैयार हैं या नहीं:

  • प्रोसेस capability index (Cpk) जैसे आँकड़े
  • Inspection standard (kensa kijunsho)
  • QC process chart (QC kotei-hyo)

ऑटो पार्ट जैसे प्रोडक्ट में सप्लायर ये दस्तावेज़ इकट्ठा करके मास प्रोडक्शन शुरू करने से पहले ग्राहक की मंज़ूरी लेता है। शेड्यूल के दबाव में जाँच अधूरी रहते हुए प्रोडक्शन शुरू कर दिया जाए, तो शुरू होते ही रिजेक्शन एक साथ बढ़ने लगते हैं। इसीलिए पास होने की शर्त पहले से तय होनी चाहिए। अंदाज़ा लगाने की जगह ग्राहक से पूछिए कि फ़ैसले से पहले कौन-सी Cpk वैल्यू और कौन-से दस्तावेज़ चाहिए।

फ़ैसले की मीटिंग में डिज़ाइन, प्रोडक्शन इंजीनियरिंग, मैन्युफ़ैक्चरिंग और क्वालिटी के लोग बैठते हैं और हर बचे हुए मुद्दे और उसके उपाय को एक-एक करके देखते हैं। मीटिंग चलाने या आख़िरी फ़ैसला करने का काम क्वालिटी एश्योरेंस का हो सकता है।

कुछ मुद्दे बाक़ी हों और फिर भी प्रोडक्शन शुरू करना हो, तो शर्तें तय होती हैं: कौन-सा आइटम कब तक बंद होगा, और तब तक जाँच कड़ी रहेगी। शर्त के साथ आगे बढ़ने का फ़ैसला (शर्त के साथ पास) असल काम में आम बात है। इससे जुड़ा एक शब्द आप सुन सकते हैं: shoki ryudo (शोकी र्यूदो), यानी प्रोडक्शन शुरू होने के बाद एक तय समय तक खास निगरानी और कड़ी जाँच।

मास प्रोडक्शन के दौरान: क्वालिटी टिकाए रखना

क्वालिटी एश्योरेंस इंजीनियर खराब पार्ट का कारण ढूँढने के लिए बात कर रहे हैं

प्रोडक्शन शुरू होने के बाद लक्ष्य यह होता है कि हर दिन एक जैसी क्वालिटी बने। जाँच तीन जगह होती है: incoming, in-process और outgoing।

इस दौर में मुख्य काम शॉप फ़्लोर का है। क्वालिटी एश्योरेंस और क्वालिटी कंट्रोल के इंजीनियर जाँच की शर्तें तय करते हैं, इकट्ठा हुए डेटा का विश्लेषण करते हैं और कुछ गड़बड़ होने पर सही डिपार्टमेंट को काम पर लगाते हैं।

चित्र 2: मास प्रोडक्शन के दौरान तीन जाँच

हर जाँच अलग चीज़ को, अलग मक़सद से जाँचती है।

INIncoming जाँचइस्तेमाल से पहले पक्का करना कि पार्ट और मटीरियल स्पेसिफ़िकेशन के मुताबिक़ हैं
PRIn-process जाँचबनाते समय ही खराब पीस पकड़ना, ताकि वह अगले प्रोसेस में न जाए
OUTOutgoing जाँचग्राहक तक पहुँचने से पहले आख़िरी पास/फ़ेल तय करना
जाँच सिर्फ़ खराब पीस छाँटने के लिए नहीं है। उसका मक़सद प्रोसेस की गड़बड़ी जितनी जल्दी हो सके पकड़ना है।

Incoming जाँच

सप्लायर से आए पार्ट और मटीरियल को स्पेसिफ़िकेशन और सप्लायर के inspection certificate से मिलाकर देखा जाता है: नाप, दिखावट, मटीरियल वगैरह। आम तरीक़ा यह है कि हर पीस की जगह लॉट में से कुछ पीस निकालकर जाँचे जाते हैं (सैंपलिंग)।

असल में जाँच कितनी कड़ी होगी, यह सप्लायर के हिसाब से तय होता है। जिसका रिकॉर्ड स्थिर है उसकी जाँच हल्की, और जिसमें बार-बार दिक़्क़त आती है उसकी जाँच कड़ी। क्वालिटी यह जानकारी purchasing से बाँटती है और ज़रूरत पड़े तो सप्लायर को गाइड भी करती है। आप सप्लायर हैं तो आपके पार्ट कितनी बारीकी से जाँचे जाएँगे, यह आपके क्वालिटी रिकॉर्ड पर निर्भर करता है।

Incoming जाँच में खराबी मिले तो पूरा लॉट होल्ड पर रखा जाता है और सप्लायर से पार्ट छाँटने या दोबारा बनाने को कहा जाता है। फिर ग्राहक की तरफ़ से कारण और उपाय की रिपोर्ट माँगी जाती है। चक्र तभी पूरा होता है जब अगली डिलीवरी दिखा दे कि उपाय काम कर रहा है।

प्रोसेस के दौरान क्वालिटी कंट्रोल

प्रोडक्शन के दौरान ऑपरेटर और inspector तय आइटम नापकर रिकॉर्ड करते हैं। क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर इस डेटा को कंट्रोल चार्ट जैसे चार्ट पर रखते हैं और देखते हैं कि नाप का फैलाव या रुझान बदल तो नहीं रहा।

कोई गड़बड़ी दिखे तो वे मैन्युफ़ैक्चरिंग और प्रोडक्शन इंजीनियरिंग के साथ कारण ढूँढते हैं और मशीन या काम का तरीक़ा सुधारते हैं। आम खामी यह है कि डेटा भरा तो जाता है पर उसे कोई देखता नहीं। क्वालिटी कंट्रोल में डेटा देखना और उस पर एक्शन लेना भी शामिल है।

बदलावों पर भी कंट्रोल चाहिए। मशीन, मटीरियल, ऑपरेटर या काम का तरीक़ा बदले तो क्वालिटी बदल सकती है। जापानी प्लांट इन्हें henkaten (हेनकातेन, यानी हालात का बदलाव) कहते हैं। इन्हें पहले से पहचानकर और हर बदलाव से पहले और बाद में क्वालिटी जाँचकर अचानक आने वाला रिजेक्शन रोका जाता है। कई जापानी ग्राहक सप्लायर से कहते हैं कि ऐसा बदलाव करने से पहले उन्हें बताएँ, इसलिए अपने क्वालिटी एग्रीमेंट में नियम देख लीजिए।

प्रोसेस में दिखी दिक़्क़तें फ़्लोर के shift leader और team leader के साथ मिलकर सुलझाई जाती हैं। लाइन पर कुछ अलग लगे, जैसे आवाज़, नाप या दिखावट, तो उसे छोटा समझकर छोड़ना नहीं चाहिए; अपने team leader को बताइए। क्वालिटी इंजीनियर जब फ़्लोर के लोगों से रोज़ मिलते हैं और छोटी बात बताना आसान बना देते हैं, तो गड़बड़ियाँ जल्दी पकड़ में आती हैं।

कैमरा और AI से दिखावट की जाँच, और मशीन के सेंसर से क्वालिटी डेटा अपने आप इकट्ठा करना भी अब बढ़ रहा है। मशीन चलते हुए जाँच या नाप का काम हो तो अपनी कंपनी के सेफ्टी नियम ज़रूर मानिए।

Outgoing जाँच

तैयार प्रोडक्ट को ग्राहक के साथ तय शर्तों पर आख़िरी बार जाँचा जाता है। नाप, दिखावट और फ़ंक्शन टेस्ट के अलावा लेबल, गिनती और पैकिंग भी देखी जाती है।

सैंपलिंग से जाँचना है या हर पीस, यह प्रोडक्ट की अहमियत और पुराने रिजेक्शन के रिकॉर्ड से तय होता है। सेफ्टी से जुड़े characteristics और ग्राहक के बताए आइटम की अक्सर 100% जाँच होती है। इन शर्तों को inspection standard में लिखना भी क्वालिटी कंट्रोल का काम है।

Outgoing जाँच आख़िरी दरवाज़ा है, पर उस पर ज़्यादा भरोसा करें तो जाँच का बोझ बढ़ता है और फिर भी खराब पीस निकल जाते हैं। खराब पीस को प्रोसेस के अंदर ही रोकना चाहिए। Outgoing जाँच में कोई खराबी मिले तो टीम पीछे जाकर देखती है कि प्रोसेस में कहाँ उसे रोका जा सकता था।

Outgoing जाँच के रिकॉर्ड बाद में किसी दिक़्क़त पर सबूत भी बनते हैं कि भेजते समय प्रोडक्ट किस हालत में था। कई ग्राहक inspection certificate भी माँगते हैं, इसलिए रिकॉर्ड सही-सही रखना इस स्टेप का अहम हिस्सा है।

शिपमेंट के बाद: शिकायत पर कार्रवाई और सीख

ऑडिट टीम सप्लायर की फ़ैक्टरी में प्रोसेस जाँच रही है

प्रोडक्ट ग्राहक तक पहुँचने के बाद भी क्वालिटी एश्योरेंस का काम चलता रहता है। इस समय सप्लायर कैसे जवाब देता है, इसका ग्राहक के भरोसे पर बहुत बड़ा असर पड़ता है।

शिपमेंट के बाद की जानकारी सिर्फ़ गड़बड़ी की सूचना नहीं होती। ग्राहक के सवाल और बाज़ार में प्रोडक्ट के इस्तेमाल का डेटा भी अगले प्रोडक्ट की क्वालिटी सुधारने के काम आता है।

शिकायत पर कार्रवाई और दोबारा न होने का उपाय

ग्राहक गड़बड़ी बताता है तो जापानी टीमें उसे अक्सर kureemu (अंग्रेज़ी "claim" से) कहती हैं, यानी ग्राहक की शिकायत। टीम सबसे पहले असली खराब पीस और प्रोडक्शन रिकॉर्ड देखकर असर का दायरा तय करती है। वह जाँचती है कि उसी दौरान बने बाक़ी प्रोडक्ट तो प्रभावित नहीं हैं, और ज़रूरत हो तो शिपमेंट रोककर स्टॉक छाँटती है।

फिर cause-and-effect (फिशबोन) डायग्राम और naze-naze bunseki (क्यों-क्यों विश्लेषण, यानी 5 Why) जैसे टूल से कारण की जड़ तक जाया जाता है। उपाय दो सवालों के लिए बनते हैं: गड़बड़ी क्यों हुई और वह बाहर क्यों निकल गई। जाँच और उपाय एक रिपोर्ट में लिखकर ग्राहक को समझाए जाते हैं। काम तब तक पूरा नहीं होता जब तक दिख न जाए कि उपाय सचमुच असर कर रहा है। रिपोर्ट का फ़ॉर्मेट (8D) एक अलग लेख का विषय है।

कई ग्राहक पहले से तय कर लेते हैं कि गड़बड़ी की सूचना के बाद पहली रिपोर्ट कितने समय में चाहिए। गड़बड़ी होने से पहले ही ग्राहक से यह समय पूछ लीजिए। शुरुआती दिनों में ग्राहक का भरोसा तभी टिकता है जब आप असर का दायरा और अस्थायी उपाय जल्दी दिखा दें।

चित्र 3: गड़बड़ी दोबारा न हो, इसके लिए चार पॉइंट

उपाय को सिर्फ़ एक बार का इलाज बनने से कैसे रोकें।

होने का कारण और बाहर निकलने का कारणगड़बड़ी क्यों बनी और जाँच में क्यों नहीं पकड़ी गई, दोनों अलग देखें
अस्थायी उपाय और पक्का उपायपहले नुक़सान रोकें, फिर सिस्टम से दोबारा होना रोकें
असर की जाँचउपाय के बाद के डेटा से पक्का करें कि वह सचमुच काम किया
Yokoten (उपाय फैलाना)वही उपाय मिलते-जुलते प्रोडक्ट और दूसरे प्रोसेस में भी लगाएँ

आम गलती यह है कि कारण को "ऑपरेटर की लापरवाही" बताकर बात ख़त्म कर दी जाती है। जो उपाय लोगों के ध्यान रखने पर टिके हों, वे ज़्यादा दिन नहीं चलते। इसलिए बुनियादी तरीक़ा है कि jig, मशीन या काम के तरीक़े से ही गड़बड़ी रोकी जाए। "ऑपरेटर को दोबारा ट्रेनिंग दी" पर रुकने वाली रिपोर्ट से ग्राहक के संतुष्ट होने की उम्मीद कम है।

जाँच में कई रिकॉर्ड लगते हैं: प्रोडक्शन रिकॉर्ड, जाँच के रिकॉर्ड और मशीन के चलने का डेटा। रिकॉर्ड रोज़ ठीक से रखे हों तो असली कारण जल्दी मिलता है। इसलिए शिकायत पर जवाब की रफ़्तार दिखाती है कि प्लांट रोज़ कितना सलीक़े से चलता है।

क्वालिटी ऑडिट और सुधार

क्वालिटी ऑडिट में तय समय पर देखा जाता है कि रोज़ की क्वालिटी को सँभालने वाली व्यवस्थाएँ सचमुच काम कर रही हैं या नहीं। क्वालिटी टीम ISO 9001 के तहत अंदरूनी ऑडिट से हर डिपार्टमेंट को जाँचती है, और सप्लायर की फ़ैक्टरी में जाकर प्रोसेस और रिकॉर्ड भी देखती है।

ऑडिट में मिली कमियाँ और साल भर के रिजेक्शन व शिकायतों का डेटा टॉप मैनेजमेंट की मीटिंग में रखा जाता है। फिर अगले साल के क्वालिटी टारगेट और सुधार के विषयों में जोड़ा जाता है। शिपमेंट के बाद की जानकारी को अगले प्रोडक्ट के क्वालिटी प्लान में वापस पहुँचाने से चक्र पूरा होता है।

सप्लायर ऑडिट में ऑडिटर प्रोसेस में घूमकर काम और रिकॉर्ड देखते हैं और जो बात खटके उसे सुधार के अनुरोध के रूप में बताते हैं। कभी-कभी वे purchasing के साथ जाते हैं, ताकि तय हो सके कि इस सप्लायर से कारोबार आगे चलाना है या नहीं। ग्राहक ऑडिट में क्या देखता है और तैयारी कैसे करें, यह अलग लेख का विषय है।

प्रोडक्ट और कंपनी के हिसाब से workflow में फ़र्क

क्वालिटी इंजीनियर प्रोडक्शन लाइन पर प्रोडक्ट जाँच रहा है

ऊपर बताया flow ज़्यादातर मैन्युफ़ैक्चरिंग कंपनियों में एक जैसा है, पर प्रोडक्ट के प्रकार और कंपनी के आकार के हिसाब से ज़ोर काफ़ी बदल जाता है।

चित्र 4: मास प्रोडक्शन वाले और ऑर्डर पर बनने वाले प्रोडक्ट

कितनी मात्रा में बनता है, इससे क्वालिटी बचाने का तरीक़ा बदल जाता है।

मास प्रोडक्शन वाले
ऑर्डर पर बनने वाले
उदाहरण
ऑटो पार्ट, घरेलू उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, खाने का सामान
इंडस्ट्रियल मशीन, प्लांट का उपकरण, खास मशीनें
क्वालिटी कंट्रोल का केंद्र
प्रोसेस के डेटा पर कंट्रोल और सैंपलिंग जाँच
हर यूनिट की जाँच, टेस्ट और रिकॉर्ड
प्रोडक्शन से पहले का ज़ोर
प्रोसेस शुरू करने और मंज़ूरी में समय देना
हर डिज़ाइन का रिव्यू और स्पेसिफ़िकेशन की पुष्टि
शिपमेंट के बाद
उसी लॉट पर असर की जाँच
इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग में मौजूद रहना, हर केस अलग देखना

एक ही कंपनी में प्रोडक्ट के हिसाब से दोनों तरीक़े साथ चल सकते हैं।

मास प्रोडक्शन वाले और ऑर्डर पर बनने वाले प्रोडक्ट

ऑटोमोबाइल जैसी इंडस्ट्री में, जहाँ एक ही प्रोडक्ट बहुत बड़ी मात्रा में बनता है, क्वालिटी की जड़ प्रोसेस का स्थिर रहना है। टीमें सांख्यिकी के तरीक़ों से प्रोसेस कंट्रोल करती हैं और रिजेक्शन रेट में हल्का-सा बदलाव भी नज़र से जाने नहीं देतीं।

इंडस्ट्रियल मशीन जैसे ऑर्डर पर बनने वाले काम में हर यूनिट का स्पेसिफ़िकेशन अलग होता है। ज़्यादातर समय तैयार प्रोडक्ट के टेस्ट, ग्राहक की मौजूदगी में जाँच (witness inspection) और जाँच के रिकॉर्ड बनाने में जाता है, और क्वालिटी हर ग्राहक के साथ अलग से पक्की की जाती है। जापानी मशीन बनाने वालों के साथ ऐसे witness टेस्ट कैसे चलते हैं, यह FAT/SAT के अलग लेख में है।

इंडस्ट्री के हिसाब से ज़रूरी स्टैंडर्ड भी अलग होते हैं। ये ISO 9001 में इंडस्ट्री की अपनी शर्तें जोड़ते हैं:

  • ऑटोमोबाइल: IATF 16949
  • एयरोस्पेस: JIS Q 9100 (अमेरिका के AS9100 और यूरोप के EN 9100 का जापानी रूप)
  • मेडिकल डिवाइस: ISO 13485

ग्राहक की इंडस्ट्री तय करती है कि काम कितनी बारीकी से करना होगा।

बड़ी कंपनी और छोटी-मझोली कंपनी

बड़ी जापानी कंपनियों में क्वालिटी एश्योरेंस डिपार्टमेंट अक्सर कस्टमर क्वालिटी, प्रोसेस क्वालिटी, सप्लायर क्वालिटी और क्वालिटी सिस्टम में बँटा होता है, और हर आदमी एक क्षेत्र में गहराई से काम करता है। जैसे कस्टमर क्वालिटी ग्राहक से बातचीत और शिकायतें सँभालती है, और सप्लायर क्वालिटी सप्लायर ऑडिट और गाइडेंस। कई कंपनियाँ लोगों को इन भूमिकाओं में बारी-बारी से घुमाती हैं, ताकि वे धीरे-धीरे पूरी तस्वीर समझ सकें।

छोटी और मझोली कंपनियों में आम तौर पर कुछ ही क्वालिटी के लोग जाँच से लेकर ग्राहक से बातचीत और ISO सिस्टम के काम तक सब सँभालते हैं। वे पूरा workflow जल्दी देख लेते हैं, पर हर किसी के ज़िम्मे दायरा बड़ा होता है।

चित्र 5: बड़ी और छोटी कंपनी के क्वालिटी डिपार्टमेंट

कंपनी के आकार से तय होता है कि कौन क्या सँभालता है।

बड़ी कंपनी
छोटी या मझोली कंपनी
काम का बँटवारा
कस्टमर, प्रोसेस, सप्लायर और सिस्टम क्वालिटी में बँटा
छोटी टीम जाँच से लेकर ग्राहक तक सब सँभालती है
ताक़त
एक क्षेत्र की गहरी जानकारी
क्वालिटी के पूरे workflow की समझ
किनसे वास्ता
कई खास डिपार्टमेंट; ज़्यादातर काम तालमेल का
अक्सर ग्राहक और शॉप फ़्लोर से सीधी बातचीत

एक ही आकार की कंपनियों में भी कंपनी की नीति और प्रोडक्ट से ढाँचा बदलता है।

आपके लिए इसका मतलब है कि किससे बात करनी है। बड़े ग्राहक के यहाँ जिसने आपके लॉन्च के दस्तावेज़ मंज़ूर किए, वही शिकायत भी सँभाले, यह ज़रूरी नहीं। इसलिए पूछ लीजिए कि हर स्टेज का ज़िम्मेदार कौन है। छोटे ग्राहक के यहाँ अक्सर एक ही आदमी सब देखता है।

हर हिस्से में जापानी साइड से पूछने लायक सवाल

ये सवाल प्रोजेक्ट की शुरुआत में पूछिए, या जब कोई माँग आए और समझ न आए कि वह किसलिए है। जवाब ग्राहक के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए लिखित में लीजिए।

स्टेजपूछने का सवाल
क्वालिटी प्लानआप किन characteristics को ख़ास (critical या safety) आइटम मानते हैं, और ड्रॉइंग पर उन्हें कैसे दिखाते हैं?
क्वालिटी प्लानआपको कौन-से टेस्ट और कौन-सी मंज़ूरियाँ, किस माइलस्टोन पर चाहिए?
डिज़ाइन रिव्यूक्या आप हमारी FMEA देखना चाहते हैं? आप उसे रिव्यू करेंगे या सिर्फ़ रिकॉर्ड के लिए लेंगे?
मास प्रोडक्शन का फ़ैसलाआपको कौन-सी Cpk वैल्यू चाहिए, किन characteristics के लिए और कितने सैंपल पर?
मास प्रोडक्शन का फ़ैसलापहली प्रोडक्शन शिपमेंट से पहले कौन-से दस्तावेज़ मंज़ूर होने ज़रूरी हैं: QC process chart, inspection standard या और कुछ? क्या आपके पास टेम्प्लेट है?
मास प्रोडक्शन का फ़ैसलाकुछ मुद्दे बाक़ी हों और हम प्रोडक्शन शुरू करें, तो कौन-सी शर्तें लागू होंगी, और shoki ryudo कितने समय चलेगा?
Incoming / outgoingक्या हर लॉट के साथ inspection certificate चाहिए? किस फ़ॉर्मेट में, और सैंपलिंग प्लान क्या होगा?
Outgoingकिन आइटम की 100% जाँच ज़रूरी है?
प्रोसेस के दौरानकौन-से बदलाव (मशीन, मटीरियल, ऑपरेटर, तरीक़ा, सब-सप्लायर) करने से पहले आपको बताना होगा, और कितने दिन पहले?
शिकायत पर कार्रवाईपहली रिपोर्ट और फ़ाइनल रिपोर्ट की डेडलाइन क्या है? क्या रिपोर्ट का कोई तय फ़ॉर्मेट है?
शिकायत पर कार्रवाईशिकायत के लिए हमारा संपर्क कौन है, और क्या वही आदमी लॉन्च की मंज़ूरी भी देता है?
ऑडिटक्या आप सप्लायर ऑडिट करने वाले हैं? कितनी बार, और क्या-क्या देखेंगे?

इस लेख की सीमाएँ

  • स्टेप के नाम, उनकी सीमाएँ और दस्तावेज़ कंपनी, इंडस्ट्री और प्रोडक्ट के हिसाब से अलग होते हैं। कुछ कंपनियाँ स्टेप मिला देती हैं, कुछ अपने अलग गेट जोड़ देती हैं।
  • Cpk की माँगी गई वैल्यू, रिपोर्ट की डेडलाइन और सैंपलिंग प्लान जैसे आँकड़े हर ग्राहक या कॉन्ट्रैक्ट तय करता है। इस लेख में कोई आम वैल्यू नहीं दी गई है; ग्राहक से पक्का कीजिए।
  • टेबल में APQP का मिलान उन पाठकों के लिए मोटा अंदाज़ा है जो ऑटोमोबाइल के शब्द जानते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि जापानी ग्राहक AIAG का APQP मैन्युअल ही मानता है।
  • इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (IATF 16949, JIS Q 9100, ISO 13485) में यहाँ बताई बातों से ज़्यादा शर्तें होती हैं। अपने ग्राहक पर लागू स्टैंडर्ड ख़ुद देखिए।
  • भारत में BIS ने ISO 9001 को IS/ISO 9001 के नाम से अपनाया है, पर आपकी कंपनी का सर्टिफ़िकेट किस संस्करण पर है, यह क्वालिटी डिपार्टमेंट से पूछिए। "एक जैसा" मान लेना ठीक नहीं।
  • सेफ्टी के नियम (Factories Act 1948, OSH Code 2020) इस लेख का विषय नहीं हैं। राज्य में वे कितने लागू हैं, यह अलग हो सकता है, इसलिए कंपनी के सेफ्टी डिपार्टमेंट से पूछिए।

FAQ

मैन्युफ़ैक्चरिंग में क्वालिटी एश्योरेंस के मुख्य स्टेप क्या हैं?

जापानी कंपनियों में 8 स्टेप हैं, तीन हिस्सों में। मास प्रोडक्शन से पहले: क्वालिटी प्लान, डिज़ाइन रिव्यू और रिस्क की जाँच, और मास प्रोडक्शन का फ़ैसला। मास प्रोडक्शन के दौरान: incoming जाँच, प्रोसेस के दौरान क्वालिटी कंट्रोल और outgoing जाँच। शिपमेंट के बाद: शिकायत पर कार्रवाई और दोबारा न होने का उपाय, और क्वालिटी ऑडिट, जो सीख अगले प्रोडक्ट तक पहुँचाता है।

QC process chart (QC kotei-hyo) क्या होता है?

यह एक टेबल है जिसमें हर प्रोसेस स्टेप, उसके कंट्रोल आइटम और जाँचने का तरीक़ा लिखा होता है। यह APQP और PPAP के control plan के क़रीब है, पर फ़ॉर्मेट कंपनी के हिसाब से बदलते हैं। इसलिए अपने ग्राहक से उनका टेम्प्लेट माँग लीजिए।

गड़बड़ी होने का कारण और बाहर निकल जाने का कारण में क्या फ़र्क है?

होने का कारण बताता है कि खराब पीस बना क्यों। बाहर निकलने का कारण (ryushutsu genin) बताता है कि जाँच या प्रोसेस ने उसे शिपमेंट से पहले क्यों नहीं पकड़ा। उम्मीद रखिए कि दोनों के लिए अलग-अलग उपाय दिखाने होंगे।

क्वालिटी में yokoten का क्या मतलब है?

Yokoten का मतलब है उपाय को दूसरे मिलते-जुलते प्रोडक्ट और दूसरे प्रोसेस तक फैलाना, ताकि वही दिक़्क़त कहीं और न हो। जापानी ग्राहक को दी जाने वाली गड़बड़ी की रिपोर्ट में यह आइटम अक्सर होता है।

"ऑपरेटर को दोबारा ट्रेनिंग" कमज़ोर उपाय क्यों माना जाता है?

जो उपाय लोगों के ध्यान रखने पर टिके हों, वे ज़्यादा दिन नहीं चलते। मज़बूत उपाय वह है जो jig, मशीन या काम के तरीक़े से गड़बड़ी को रोक दे, और डेटा दिखाए कि उपाय काम किया।

स्रोत

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संपादक के बारे में

MONOSCOPE संपादकीय टीमFOUNDER & EDITOR

प्लांट उपकरण निर्माता और प्लांट इंजीनियरिंग कंपनी में लगभग दस साल तक उपकरणों के प्रस्ताव, डिज़ाइन और कमीशनिंग का काम करने के बाद डिजिटल मार्केटिंग में आए। आज B2B निर्माताओं को वेब कंसल्टिंग देते हैं, ताकि वे अपने उत्पाद और तकनीक आसानी से समझा सकें। जापान के राष्ट्रीय लाइसेंस Energy Manager और तृतीय श्रेणी चीफ़ इलेक्ट्रिकल इंजीनियर धारक।

2017 से एक इंजीनियरिंग ब्लॉग (500 से ज़्यादा लेख) और लगभग 20,000 सब्सक्राइबर वाला जापानी YouTube चैनल चलाते हैं। हर गाइड जापानी शॉप फ़्लोर के नज़रिए से लिखा जाता है और उद्धृत मानकों से मिलाकर जाँचा जाता है।

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